मुख्यमंत्री ने कहा कि संत शक्ति ही सज्जन शक्ति है और साधु-संतों ने भारतीय संस्कृति को बनाए रखा है। जब दुनिया की कई संस्कृतियां समाप्त हो गईं, तब भी भारतीय संस्कृति जीवित रही। यह प्राचीन होने के साथ-साथ नित नई भी है, यही इसकी विशेषता है। संतों ने इस प्रवाह में आई बुराइयों को दूर कर संस्कृति की निरंतरता बनाए रखी है। महाराष्ट्र के वारकरी संप्रदाय ने भी अनेक आक्रमणों का सामना करते हुए वारी की परंपरा को जीवित रखा, जिसका प्रतिबिंब कुंभ मेले में दिखाई देता है।
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Monday, 6 April 2026
श्रद्धालुओं को गोदावरी के निर्मल और प्रवाही जल में स्नान करने की सुविधा मिले
मुख्यमंत्री श्री फडणवीस ने कहा कि श्रद्धालुओं को गोदावरी के निर्मल और प्रवाही जल में स्नान करने की सुविधा मिले, इसके लिए उपाय किए जा रहे हैं। त्र्यंबकेश्वर में गोदावरी का प्रवाह बारहमासी बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। कुशावर्त के लिए जल शुद्धिकरण परियोजना शुरू की गई है। त्र्यंबकेश्वर मार्ग, नाशिक परिक्रमा मार्ग, रेलवे स्टेशन की सुविधाओं में सुधार, घाटों की संख्या और लंबाई बढ़ाना, पुराने मंदिरों का संरक्षण, मंदिरों तक जाने वाले मार्गों का चौड़ीकरण, ओझर हवाई अड्डे का विस्तार जैसे विकास कार्य जारी हैं। साधुग्राम के लिए स्थायी भूमि अधिग्रहण का निर्णय लिया गया है और वहां सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
प्रयागराज की तर्ज पर नाशिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला विकास प्राधिकरण की स्थापनाl
प्रयागराज की तर्ज पर नाशिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेला विकास प्राधिकरण की स्थापना की गई है। कुंभ मेले के सूक्ष्म और सुव्यवस्थित नियोजन के लिए नाशिक के अधिकारियों के दल ने प्रयागराज का दौरा किया था। पिछले कुंभ मेले की तुलना में इस बार दस गुना अधिक श्रद्धालुओं के आने की संभावना है, उसी के अनुसार तैयारी की जा रही है। विकास कार्यों के दौरान साधु-संतों, महंतों और अखाड़ों से प्राप्त सुझावों को भी शामिल किया जाएगा, ऐसा मुख्यमंत्री ने बताया।
सिंहस्थ कुंभमेले के लिए 35 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य होंगे
सिंहस्थ कुंभमेले के लिए 35 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य होंगे
— मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
अखिल भारतीय संत समिति की बैठक में मुख्यमंत्री ने सिंहस्थ कुंभमेले को अविस्मरणीय बनाने का दिया आश्वासन
नाशिक, 5 अप्रैल : प्रभु श्रीराम के पदस्पर्श से पावन हुए नाशिक-त्र्यंबकेश्वर में अगले वर्ष आयोजित होने वाले सिंहस्थ कुंभमेले को भव्य और अविस्मरणीय बनाने के लिए 35 हजार करोड़ रुपये के विभिन्न विकास कार्य किए जा रहे हैं। श्रद्धालुओं को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए योजना बनाई गई है और इस प्रक्रिया में साधु-संतों का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण है, ऐसा प्रतिपादन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया।
Sunday, 5 April 2026
Maharashtra Freedom of Religion Bill will help curb malpractices in society and strict action
The Chief Minister also stated that the Maharashtra Freedom of Religion Bill will help curb malpractices in society and strict action will be taken against fraudulent practices.
On this occasion, Avichal Devacharya, Jitendranand Swami, Ravindra Puri Maharaj, and Tushar Bhosale shared their views. MLA Adv. Rahul Dhikale, Mayor Himgauri Adke-Aher, Deputy Mayor Vilas Shinde, Standing Committee Chairman Machhindra Sanap, former MLA Balasaheb Sanap, corporators, and saints and seers from across the country were also present.
He described the Kumbh Mela as the largest spiritual gathering of Indian culture
He described the Kumbh Mela as the largest spiritual gathering of Indian culture—a festival of purification of the mind and soul. It serves to remove the pollution of thoughts and keep Indian culture flowing. As devotees from all castes and religions participate, the Kumbh Mela stands as a symbol of national unity and cultural identity. Beyond the holy dip, it is also a platform for guidance from saints and exchange of ideas, making the upcoming Kumbh Mela truly unforgettable, he expressed.
Additionally, on the lines of Prayagraj, the Nashik-Trimbakeshwar Kumbh Mela
Additionally, on the lines of Prayagraj, the Nashik-Trimbakeshwar Kumbh Mela Development Authority has been established. For meticulous planning, a team of Nashik officials had visited Prayagraj. Compared to the previous Kumbh Mela, ten times more devotees are expected this time, and planning is being done accordingly. Suggestions from saints, mahants, and akhadas will also be incorporated in the development process, he added.
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