Sunday, 23 August 2026

टाटा स्ट्राइव, पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका के साथ ‘प्रोजेक्ट सक्षम’ के तहत वर्ष 2023 से तीन वर्षों में 5 हजार

 टाटा स्ट्राइव, पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका के साथ प्रोजेक्ट सक्षमके तहत वर्ष 2023 से तीन वर्षों में 5 हजार स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करने के लिए कार्य कर रहा है। इस पहल में स्वयं सहायता समूहों का आधारभूत सर्वेक्षण, तकनीक के माध्यम से जानकारी का संकलन एवं प्रगति की निगरानी, प्रशिक्षण, आजीविका मॉडल विकसित करना और बाजार से जोड़ना शामिल है।

 

टाटा स्ट्राइव ने पिंपरी-चिंचवड़ क्षेत्र में तकनीकी सहायता केंद्र स्थापित किया है। दिसंबर 2023 से लगभग 10 हजार स्वयं सहायता समूहों का सहभागी पद्धति से आधारभूत सर्वेक्षण किया गया है। इनमें से 5 हजार से अधिक सक्रिय स्वयं सहायता समूहों को विभिन्न प्रशिक्षण एवं सहायता के माध्यम से सक्षम बनाने का कार्य जारी है।

रकार के कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार विभाग और टाटा कम्युनिटी इनिशिएटिव्स ट्रस्ट के बीच

 सरकार के कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार विभाग और टाटा कम्युनिटी इनिशिएटिव्स ट्रस्ट के बीच 15 जुलाई 2022 को समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ था। इसमें रोजगारोन्मुखी कौशल प्रशिक्षण, उद्यमिता एवं नवाचार विकास, समुदाय आधारित उद्यमों को मजबूत करना, सरकारी आईटीआई के विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ाना, कौशल प्रशिक्षण के लिए बुनियादी ढांचा विकसित करना, प्रशिक्षकों की क्षमता बढ़ाना और ड्युअल वीईटी कार्यक्रम का विस्तार शामिल है।

उद्यमिता और डिजिटल कौशल पर जोर

 उद्यमिता और डिजिटल कौशल पर जोर

टाटा स्ट्राइव ने महाराष्ट्र में 1,800 से अधिक लोगों को उद्यमिता का प्रशिक्षण दिया है। व्यवसाय शुरू करने के लिए उन्हें वित्तीय एवं मार्गदर्शन संबंधी सहायता भी प्रदान की गई है। सह्याद्री फार्म्स, टाटा कैपिटल, टाटा कम्युनिकेशंस, सिडबी, ओरिजिनल कॉम्पोसिट कंपनी और महाराष्ट्र राज्य कौशल विकास सोसायटी जैसी संस्थाओं ने इस पहल में सहयोग किया है।

 

माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और अमेजन के सहयोग से संचालित डिजिटल कार्यक्रमों के माध्यम से महाराष्ट्र के 4 हजार से अधिक प्रशिक्षणार्थियों को साइबर सिक्योरिटी, आईटी सिस्टम्स, डिजिटल मार्केटिंग, यूएक्स डिजाइन और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया गया है।

आईटीआई में ‘ड्युअल वीईटी’ कार्यक्रम

 आईटीआई में ड्युअल वीईटीकार्यक्रम

टाटा स्ट्राइव ने सीमेंस के सहयोग से राज्य के 270 सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में ड्युअल वीईटीकार्यक्रम लागू किया है। इसके तहत 600 से अधिक प्रशिक्षकों को शिक्षण संबंधी कौशल का प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि 35 हजार से अधिक प्रशिक्षणार्थियों को उद्योग और परियोजनाओं का प्रत्यक्ष अनुभव मिला है। प्रशिक्षणार्थियों को आईटीआई के प्रथम और द्वितीय वर्ष में ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग का अवसर दिया जाता है।

 

बजाज ऑटो लिमिटेड के सहयोग से छत्रपति संभाजीनगर जिले के 11 सरकारी और 7 निजी, कुल 18 आईटीआई में टोटल प्रोडक्टिव मेंटेनेंस के सिद्धांतों पर आधारित प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है। बजाज मैन्युफैक्चरिंग की बजाज ऑनलाइन लर्निंग एंड डिस्कवरीलर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम के माध्यम से इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में 3,500 से अधिक प्रशिक्षणार्थियों का पंजीकरण किया गया था। यह पहल अब राज्य के 900 से अधिक आईटीआई में लागू है और इसमें 80 हजार से अधिक प्रशिक्षणार्थियों का पंजीकरण हो चुका है।

महाराष्ट्र में टाटा स्ट्राइव के माध्यम से कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा

 महाराष्ट्र में टाटा स्ट्राइव के माध्यम से कौशल विकास को मिलेगा बढ़ावा

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

 

मुंबई, 22 अगस्त : टाटा कम्युनिटी इनिशिएटिव्स ट्रस्ट के माध्यम से संचालित टाटा स्ट्राइव द्वारा महाराष्ट्र के युवाओं के कौशल विकास, रोजगार क्षमता, उद्यमिता और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न पहल की जा रही हैं। राज्य में टाटा स्ट्राइव का कार्य वर्ष 2015 से जारी है तथा नवी मुंबई, पुणे, नागपुर और नासिक में बड़े कौशल विकास केंद्र संचालित हैं। इन पहलों से रोजगार के अवसर बढ़ाने को गति मिलेगी, यह विश्वास मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने व्यक्त किया।

 

नागपुर स्थित टाटा स्ट्राइव केंद्र का उद्घाटन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 26 जुलाई 2026 को किया। इन प्रमुख केंद्रों के माध्यम से अब तक 8 हजार से अधिक युवाओं को रोजगारोन्मुखी कौशल प्रशिक्षण दिया जा चुका है।

 

कौशल, रोजगार, उद्यमिता एवं नवाचार मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा की पहल पर यह कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। टाटा स्ट्राइव के विस्तार एवं सहयोगी केंद्रों के माध्यम से भी 6 हजार से अधिक प्रशिक्षणार्थियों को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण दिया गया है। ठाणे में एयर कंडीशनिंग क्षेत्र तथा पुणे और भिलवडी (सांगली) में ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए विशेष प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित की गई हैं। इसके अलावा तलोजा और नागपुर में बहु-कौशल प्रशिक्षण केंद्र संचालित हैं।

 


पारधी, कातकरी तसेच इतर वंचित व स्थलांतरित समाजातील बालकांना शिक्षणाच्या मुख्य प्रवाहात

 

 

पारधी, कातकरी तसेच इतर वंचित व स्थलांतरित समाजातील बालकांना शिक्षणाच्या मुख्य प्रवाहात टिकवून ठेवण्यासाठी विशेष प्रयत्न, जन्मदाखला, आधार व इतर आवश्यक कागदपत्रांच्या अभावामुळे शिक्षण तसेच शासकीय योजनांचा लाभ घेताना येणाऱ्या अडचणी दूर करण्यासाठी जिल्हास्तरावर संबंधित विभागांनी समन्वयाने कार्यवाही करण्याचे यावेळी सूचीत करण्यात आले.

 

आश्रमशाळा व निवासी संस्थांमध्ये शिक्षण घेऊन विविध क्षेत्रांत उल्लेखनीय कामगिरी करणाऱ्या विद्यार्थ्यांच्या यशोगाथा समाजासमोर आणण्याच्या सूचनाही देण्यात आल्या.

 

बालकांच्या सुरक्षिततेशी संबंधित विविध बाबींची प्रत्यक्ष पाहणी करून आश्रमशाळा व निवासी संस्थांमधील संपूर्ण सुविधांचा आढावा घेण्यासाठी महाराष्ट्र राज्य बाल हक्क संरक्षण आयोगाच्या वतीने राज्यस्तरीय तपासणी समिती गठीत करण्याचा निर्णय बैठकीत घेण्यात आला. ही समिती संबंधित विभागांशी समन्वय साधून आवश्यक त्या ठिकाणी पाहणी व तपासणी करून अहवाल आयोगास सादर करणार आहे.

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आश्रमशाळा व निवासी संस्थांमध्ये उपलब्ध असलेल्या सुविधांचा बालकांना

 

आश्रमशाळा व निवासी संस्थांमध्ये उपलब्ध असलेल्या सुविधांचा बालकांना प्रत्यक्ष मिळत असलेल्या लाभाबाबत तपासणी करण्यासाठी चाईल्ड सेफ्टी ऑडिटप्रभावी देखरेख पद्धत विकसित करण्याबाबत बैठकीत चर्चा झाली. यामध्ये पिण्याचे पाणी, अन्नाची गुणवत्ता, आरोग्य, स्वच्छता, CCTV व्यवस्था, कर्मचाऱ्यांची पडताळणी, तक्रार निवारण व्यवस्था आणि विद्यार्थ्यांचा अभिप्राय या बाबींचा समावेश करण्याची सूचना करण्यात आली.

 

बालकांच्या सुरक्षेच्या दृष्टीने निवासी संस्थांमध्ये बसविण्यात आलेल्या CCTV यंत्रणेचे नियमित निरीक्षण, रेकॉर्डिंग व आवश्यकतेनुसार फुटेज सुरक्षित ठेवण्याची व्यवस्था करण्यावर भर देण्यात आला. तसेच बालकांच्या थेट संपर्कात येणाऱ्या कायमस्वरूपी, कंत्राटी व इतर कर्मचाऱ्यांचे पोलिस पडताळणी पूर्ण असणे आवश्यक असल्याचे स्पष्ट करण्यात आले.

 

यावेळी निवासी संस्थांमध्ये दूषित पाणी अथवा अन्नामुळे बालकांच्या आरोग्यास धोका निर्माण होऊ नये, यासाठी पाणी तपासणी, पाण्याच्या टाक्यांची स्वच्छता, भोजनाची गुणवत्ता, स्वयंपाकघरातील स्वच्छता, अन्न हाताळणी, नियमित आरोग्य तपासणी तसेच आपत्कालीन वैद्यकीय प्रतिसाद याबाबत नियमित देखरेख करण्याच्या  आवश्यकतेवर चर्चा झाली.

 

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