आयुष मंत्रालयांतर्गत राज्यातील आदिवासी भागात ३०० आयुर्वेदिक दवाखाने उभारण्याचा मानसही मंत्री झिरवाळ यांनी व्यक्त केला. आदिवासी बांधवांकडे असलेले पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान मौखिक स्वरूपात असून, ते शास्त्रोक्त पद्धतीने लिखित स्वरूपात संकलित करण्यासाठी विशेष प्रयत्न करण्यात येणार आहेत. यामुळे आदिवासी भागातील पारंपरिक वैद्यकीय ज्ञानाचे जतन व संवर्धन होण्यास मदत होईल, असे त्यांनी सांगितले.
जय हो ०१
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Friday, 13 February 2026
केंद्रीय मंत्र्यांची भेट घेऊन राज्यासाठी महत्त्वपूर्ण प्रकल्पांबाबत पाठपुरावा
अन्न व औषध प्रशासन मंत्री झिरवाळ सध्या दोन दिवसांच्या दिल्ली दौऱ्यावर असून, त्यांनी विविध केंद्रीय मंत्र्यांची भेट घेऊन राज्यासाठी महत्त्वपूर्ण प्रकल्पांबाबत पाठपुरावा केला. केंद्रीय आरोग्य मंत्री नड्डा यांच्यासोबत राज्यातील अन्न व औषध प्रशासन विभागाच्या सक्षमीकरणाबाबतही चर्चा झाली. महाराष्ट्रातील अन्न व औषध प्रशासन विभाग अधिक बळकट करण्यासाठी आवश्यक निधीत वाढ करण्यास केंद्रीय मंत्री नड्डा यांनी मान्यता दिली.
या दौऱ्यात मंत्री झिरवाळ यांनी केंद्रीय आदिवासी व्यवहार मंत्री जुआल ओराम यांचीही भेट घेतली. आदिवासी समाजाच्या सर्वांगीण विकासासाठी शिक्षण व आरोग्य सुविधा बळकट करण्याबाबत यावेळी सकारात्मक चर्चा झाली. आदिवासी भागातील नागरिकांचे जीवनमान उंचावण्यासाठी केंद्र सरकारकडून आवश्यक निधी व सहकार्य देण्याचे आश्वासन देण्यात आले.
नाशिक, पुणे, नागपूर येथे ‘इन्क्युबेशन पार्क’ व ‘फार्मा पार्क’ उभारणार
नाशिक, पुणे, नागपूर येथे ‘इन्क्युबेशन पार्क’ व ‘फार्मा पार्क’ उभारणार
- अन्न व औषध प्रशासन मंत्री नरहरी झिरवाळ
नवी दिल्ली, दि. १२ : राज्यातील औषध संशोधन, उत्पादन व औद्योगिक विकासाला गती देण्यासाठी नाशिक, पुणे आणि नागपूर येथे ‘इन्क्युबेशन पार्क’ व ‘फार्मा पार्क’ उभारण्या संदर्भात अन्न व औषध प्रशासन मंत्री नरहरी झिरवाळ यांनी केंद्रीय आरोग्य व कुटुंब कल्याण मंत्री श्री. जगत प्रकाश नड्डा यांची भेट घेऊन सविस्तर चर्चा केली. या प्रकल्पांना केंद्रीय मंत्री नड्डा यांनी प्राथमिक स्तरावर मान्यता दिली असल्याची माहिती मंत्री झिरवाळ यांनी दिली.
Thursday, 12 February 2026
तीन प्रमुख स्तंभ
30 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। बिल गेट्स और हिलेरी क्लिंटन जैसी वैश्विक हस्तियों की उपस्थिति कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय महत्व देती है।
तीन प्रमुख स्तंभ
1. खाद्य प्रणाली — टिकाऊ कृषि और पोषण
2. ऊर्जा संक्रमण — स्वच्छ ऊर्जा की ओर बदलाव
3. शहरी लचीलापन — शहरों को जलवायु जोखिम से सुरक्षित बनाना
नवाचार और युवा नेतृत्व
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के सहयोग से नवाचार प्रतियोगिता आयोजित होगी। युवा हरित नवाचार कार्यक्रम भविष्य
ग्लोबल साउथ की आवाज
ग्लोबल साउथ की आवाज
विकासशील देश जलवायु संकट से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं, परंतु निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सीमित रहती है। मुंबई क्लाइमेट वीक इस नेतृत्व को मजबूत करेगा।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक प्रमुख भागीदार है, डेलॉइट रणनीतिक ज्ञान भागीदार है, जबकि टीआईएसएस और आईआईटी बॉम्बे शैक्षणिक सहयोगी हैं। कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ इसमें शामिल हैं। यूनीसेफ का YuWaah युवा सहभागिता को मजबूत करेगा।
30 से अधिक देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। बिल गेट्स और हिलेरी क्लिंटन जैसी वैश्विक हस्तियों की उपस्थिति कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय महत्व देती है।
चर्चा से समाधान की ओर
चर्चा से समाधान की ओर
इस कार्यक्रम का उद्देश्य व्यावहारिक और लागू किए जा सकने वाले समाधान तलाशना है। मुख्य कार्यक्रम जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में होंगे, जबकि शहरभर में कॉलेजों, सामुदायिक केंद्रों और सांस्कृतिक संस्थानों में गतिविधियां आयोजित होंगी।
नेतृत्व संवाद, विषयगत सत्र, एमसीडब्ल्यू इनोवेशन चैलेंज, युवा हरित नवाचार प्रतियोगिता और समाधान प्रदर्शनी इसका हिस्सा होंगी। “हब-एंड-स्पोक” मॉडल नीति चर्चा और जनभागीदारी को साथ लाता है, यह संदेश देता है कि जलवायु कार्रवाई सामूहिक जिम्मेदारी है।
पहले दिन अर्थशॉट प्राइज का विशेष सत्र होगा, जो प्रिंस विलियम की परिकल्पना पर आधारित है और प्रकृति, खाद्य प्रणाली तथा मानव-केंद्रित समाधान पर केंद्रित रहेगा। साथ ही रोड शो, कला व मीडिया कार्यक्रम और सस्टेनेबिलिटी मेला जलवायु कार्रवाई को रोजमर्रा के जीवन से जोड़ेगा।
“वार्तावरण” नामक नागरिक मंच लोगों को कविता, भाषण, कहानी और गीतों के माध्यम से जलवायु अनुभव साझा करने का अवसर देगा।
मुंबई क्लाइमेट वीक : जलवायु कार्रवाई के लिए भारत का वैश्विक मंच
मुंबई क्लाइमेट वीक : जलवायु कार्रवाई के लिए भारत का वैश्विक मंच
मुंबई में आयोजित होने वाला भारत का पहला क्लाइमेट वीक केवल चर्चा तक सीमित न रहकर वास्तविक जलवायु कार्रवाई की दिशा में एक मंच बनेगा। सरकार, उद्योग, विशेषज्ञ, युवा और नागरिकों को साथ लाकर यह पहल ग्लोबल साउथ के लिए जलवायु नेतृत्व का नया मॉडल प्रस्तुत करेगी।
खाद्य सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और शहरी स्थिरता पर केंद्रित यह कार्यक्रम नवाचार, युवा सहभागिता और जनोन्मुख गतिविधियों के माध्यम से जलवायु कार्रवाई को आम लोगों तक पहुँचाने का प्रयास करेगा। मुंबई से दिया जाने वाला संदेश स्पष्ट है जलवायु समाधान सामूहिक जिम्मेदारी और त्वरित कार्रवाई से ही संभव है।
जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की या केवल वैज्ञानिक चर्चा का विषय नहीं रहा। बाढ़, गर्मी की लहरें, अनियमित वर्षा और खाद्य सुरक्षा की चुनौतियाँ सीधे दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही हैं। इस पृष्ठभूमि में 17–19 फरवरी 2026 को होने वाला मुंबई क्लाइमेट वीक भारत तथा विशेष रूप से ग्लोबल साउथ देशों के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
यह केवल सम्मेलनों का आयोजन नहीं, बल्कि संवाद से कार्रवाई की दिशा में एक प्रयास है, जहां सरकार, उद्योग, विशेषज्ञ, युवा और आम नागरिक एक मंच पर आएँगे।
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