Thursday, 1 October 2026

अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचाना ही सुशासन -महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा

 अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुँचाना ही सुशासन

-महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा


‘विकसित भारत’ का अर्थ केवल बढ़ा हुआ जीडीपी या बैंक बैलेंस नहीं; अंत्योदय के सिद्धांत पर अंतिम व्यक्ति का सशक्तीकरण आवश्यक

मुंबई, 01 अक्टूबर: ‘विकसित भारत 2047’ केवल आर्थिक प्रगति की अवधारणा नहीं है, बल्कि यह एक समृद्ध, सक्षम, समावेशी, तकनीकी रूप से उन्नत और अपनी सभ्यता-संस्कृति पर आत्मविश्वास रखने वाले भारत की परिकल्पना है। विकसित भारत का अर्थ केवल बढ़ा हुआ जीडीपी, आय या बैंक खाते में जमा राशि नहीं है। सरकारी निर्णयों, योजनाओं और सेवाओं का प्रभावी लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना तथा उसका सशक्तीकरण करना ही सुशासन का मूल तत्व है। यह प्रतिपादन महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने किया।


राज्यपाल पांचजन्य साप्ताहिक द्वारा मुंबई में आयोजित ‘सुशासन संवाद – मुंबई संकल्प’ परिचर्चा को संबोधित कर रहे थे।


राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सामने विकसित भारत 2047 का प्रेरणादायी लक्ष्य रखा है। इस संकल्पना का केंद्रबिंदु विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रतिपादित ‘अंत्योदय’ दर्शन में भी इसी विचार का प्रतिबिंब दिखाई देता है। शासन की योजनाएँ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचें, उसे सशक्त बनाएँ और उसके जीवन स्तर में सुधार लाएँ, यही वास्तविक सुशासन है।


‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ केवल एक राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि समावेशी विकास का मंत्र है। राज्यपाल ने ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः’ की भारतीय विचार परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलना तथा शासन और समाज द्वारा कंधे से कंधा मिलाकर विकास के लिए कार्य करना भारतीय लोकतंत्र की मूल दिशा है।

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