Tuesday, 1 April 2025

रिज़र्व बैंक भारत की आर्थिक स्थिरता का आधारस्तंभ; डिजिटल लेन-देन में देश को

 रिज़र्व बैंक भारत की आर्थिक स्थिरता का आधारस्तंभ; डिजिटल लेन-देन में देश को वैश्विक नेतृत्व दिलाने में आरबीआई की महत्वपूर्ण भूमिका - राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू

 

मुंबई, 1 अप्रैल: भारत 2047 तक 'विकसित भारत' (Viksit Bharat 2047) बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में आर्थिक क्षेत्र की नई चुनौतियों का सामना करने के लिए एक नवीन और समावेशी वित्तीय प्रणाली आवश्यक है। रिज़र्व बैंक भारत की आर्थिक स्थिरता का आधारस्तंभ बना रहेगा। भारत को डिजिटल लेन-देन में वैश्विक नेतृत्व दिलाने में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का बड़ा योगदान है। मजबूत बैंकिंग प्रणाली, वित्तीय नवाचार और उपभोक्ताओं के विश्वास को बनाए रखने की दिशा में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। यह विचार आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने व्यक्त किए।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुंबई के नरिमन पॉइंट स्थित एनसीपीए में आयोजित भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के 90वें स्थापना दिवस समारोह में बोल रही थीं। इस अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा उपस्थित थे।

आरबीआई – भारत के आर्थिक विकास की धुरी

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि भारतीय रिज़र्व बैंक के 90वें स्थापना दिवस का यह उत्सव एक महत्वपूर्ण अवसर है। आरबीआई भारत की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक है। एक केंद्रीय बैंक के रूप में, आरबीआई देश की अनोखी विकास यात्रा के केंद्र में रहा है। स्वतंत्रता-पूर्व के कठिन समय से लेकर आज वैश्विक महाशक्ति बनने तक के सफर में आरबीआई एक मजबूत स्तंभ बना हुआ है।

1935 में स्थापित इस संस्था ने हमेशा देश के आर्थिक विकास की दिशा में अग्रणी भूमिका निभाई है। आरबीआई न केवल एक केंद्रीय बैंक है, बल्कि वित्तीय समावेशन और संस्थागत निर्माण में भी इसकी भूमिका अहम रही है। इस दृष्टिकोण से, आरबीआई ने नाबार्ड, आईडीबीआई, सिडबी और नेशनल हाउसिंग बैंक जैसी महत्वपूर्ण वित्तीय संस्थाओं की स्थापना की, जो कृषि, लघु व्यवसाय और आवास क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

वित्तीय समावेशन में आरबीआई की भूमिका

‘लीड बैंक योजना’ जैसे प्रयासों के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं पहुंची हैं। आर्थिक समावेशन की दिशा में, आरबीआई ने प्रधानमंत्री जन धन योजना के लिए अनुकूल नीतिगत वातावरण बनाया। खासकर महिलाओं की बड़ी संख्या में इस योजना में भागीदारी एक सकारात्मक परिवर्तन है, जो आर्थिक सशक्तिकरण को दर्शाता है।

डिजिटल लेन-देन में भारत का नेतृत्व

भारत को डिजिटल लेन-देन में वैश्विक नेतृत्व दिलाने में आरबीआई की महत्वपूर्ण भूमिका है। यूपीआई (UPI) जैसी अभिनव प्रणालियों ने वित्तीय लेन-देन को आसान, सुरक्षित और किफायती बना दिया है। साथ ही, आरबीआई ने एक समृद्ध वित्तीय-प्रौद्योगिकी (FinTech) पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में भी सहायता की है।

जैसे-जैसे भारत प्रौद्योगिकी-आधारित वित्तीय प्रणाली की ओर बढ़ रहा है, आरबीआई उपभोक्ता संरक्षण को और मजबूत कर रहा है और नई चुनौतियों का सामना कर रहा है। आरबीआई ने जमाकर्ताओं के लिए बीमा सुरक्षा और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत किया है। ‘एकीकृत लोकपाल योजना’ (Integrated Ombudsman Scheme) के माध्यम से उपभोक्ताओं को त्वरित और पारदर्शी शिकायत निवारण सुविधा प्रदान की जा रही है।

वित्तीय साक्षरता और साइबर सुरक्षा

वित्तीय साक्षरता उपभोक्ता संरक्षण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। आरबीआई द्वारा चलाई जा रही विभिन्न पहलें और प्रकाशन नागरिकों को वित्तीय लेन-देन में जोखिम समझने, धोखाधड़ी से बचने और समझदारी से आर्थिक निर्णय लेने में सहायता करते हैं।

तकनीक की तेजी से हो रही प्रगति के साथ साइबर सुरक्षा के जोखिम भी बढ़ रहे हैं। इस कारण आरबीआई डिजिटल लेन-देन को और अधिक सुरक्षित बनाने के लिए सक्रिय कदम उठा रहा है।

ग्रीन फाइनेंस और सतत विकास

आरबीआई पर्यावरण-अनुकूल नीतियों की दिशा में भी कदम बढ़ा रहा है। ग्रीन (हरित) अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए आरबीआई ने ‘ग्रीन डिपॉजिट फ्रेमवर्क’ और ‘प्राथमिकता क्षेत्र ऋण’ (Priority Sector Lending – PSL) के तहत हरित वित्त पोषण जैसे उपाय अपनाए हैं।

राष्ट्र की अर्थव्यवस्था में आरबीआई की भूमिका

आरबीआई ने समय के साथ खुद को विकसित किया है और भारत के आर्थिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। महंगाई नियंत्रण, वित्तीय समावेशन, आर्थिक स्थिरता और मजबूत वृद्धि के क्षेत्रों में इसकी भूमिका निर्णायक रही है।

पिछले 90 वर्षों में, आरबीआई की यात्रा सरकार की नीतियों और दृष्टिकोण के साथ तालमेल बनाए रखते हुए आगे बढ़ी है। आर्थिक सुधारों से लेकर स्थिरता तक, सरकार और आरबीआई का सहयोग देश की आर्थिक वृद्धि में सहायक रहा है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा, “केवल एक हस्ताक्षर से आरबीआई गवर्नर का हस्ताक्षर एक साधारण कागज के टुकड़े को मुद्रा बना देता है। यह ताकत किसी अन्य हस्ताक्षर में नहीं है। आम नागरिकों का आरबीआई से सीधा संपर्क नहीं होता, लेकिन उनके दैनिक आर्थिक लेन-देन में आरबीआई का अप्रत्यक्ष रूप से प्रभाव रहता है।”

जनता का विश्वास – आरबीआई की सबसे बड़ी पूंजी

पिछले नौ दशकों में, आरबीआई ने जनता का विश्वास अर्जित किया है, और इसे बनाए रखना उसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इस भरोसे को बनाए रखने के लिए, आरबीआई ने हमेशा स्थिरता, आर्थिक प्रगति और वित्तीय सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।

1990 के आर्थिक उदारीकरण से लेकर कोविड-19 महामारी तक, आरबीआई ने त्वरित और प्रभावी उपाय किए हैं। वैश्वीकरण के दौर में भी देश की वित्तीय प्रणाली की स्थिरता बनाए रखने के लिए आरबीआई ने सराहनीय कार्य किया है।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी आरबीआई के योगदान को रेखांकित किया और वैश्विक स्तर पर हो रहे तीव्र परिवर्तनों के बावजूद आरबीआई द्वारा आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की सराहना की।

समारोह के दौरान आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्वागत भाषण दिया। इस मौके पर विशेष डाक टिकट का भी अनावरण किया गया।


मासेमारी नौकांसाठी मार्च महिन्यात १ लाख ६८ हजार कि.ली. डिझेल कोटा मंजूर

 मासेमारी नौकांसाठी मार्च महिन्यात

१ लाख ६८ हजार कि.ली. डिझेल कोटा मंजूर

 

मुंबई, दि. १ : सन २०२५ – २६ कालावधीकरीता राज्यातील सागरी जिल्ह्यातील १३८ मच्छिमार सहकार संस्थेतील सभासदांच्या एकूण ७ हजार ७९६ यांत्रिकी मासेमारी नौकांना मार्च महिन्यासाठी १ लाख ६८ हजार १०९ कि.ली. इतका डिझेल कोटा मंजूर करण्यात आल्याची माहिती मत्स्यव्यवसाय विभागाने दिली आहे.

 

            मच्छिमार नौकांना डिझेल कोटा मंजूर करण्याविषयी स्थापन केलेल्या समितीने हा डिझेल कोटा मंजूर केला आहे. यामध्ये सद्यस्थितीत कार्यरत असलेल्या रिअर क्राफ्ट ऑनलाईन प्रणालीनुसार नौका नोंदणी प्रमाणपत्र घेतलेल्या तसेच विधीग्राह्य मासेमारी परवाना असलेल्या अधिकृत मासेमारी नौकांनाच डिझेल कोटा अनुज्ञेय करण्यात आला आहे. तसेच महाराष्ट्र सागरी नियमन अधिनियम १९८१ (सुधारित २०२१) च्या तरतुदींचा भंग करणाऱ्यांचे निलंबन करण्यात आले. तसेच गस्ती नौका व ड्रोन सर्वेक्षणामध्ये दोषी आढळलेल्या नौकांचा मासेमारी परवाना रद्द केला असून अशा नौकांना डिझेल कोटा देण्याचे प्रस्तावात समाविष्ट करण्यात आलेले नसल्याचेही मत्स्यव्यवसाय विभागाने कळविले आहे.

 

व्याघ्र हल्ल्यातील मृतांच्या कुटुंबियांना विशेष नुकसान भरपाई

 व्याघ्र हल्ल्यातील मृतांच्या कुटुंबियांना विशेष नुकसान भरपाई

 

गडचिरोली जिल्ह्यात गेल्या पाच वर्षांत व्याघ्र हल्ल्यात सुमारे 50 हून अधिक मनुष्याचा मृत्यू झाला आहे. विशेषतः गडचिरोली, चार्मोशी, आरमोरी, वडसा आणि धानोरा क्षेत्रात वाघांच्या हल्ल्यात नागरिकांचा मृत्यू झाला आहे. गडचिरोलीतील परिस्थितीचा अभ्यास करून गडचिरोलीतील अतिरिक्त वाघांचे स्थलांतर तीन महिन्यात करण्यात यावेत. तसेच गेल्या पाच वर्षांत व्याघ्र हल्ल्यात मृत्युमुखी पडलेल्या नागरिकांची माहिती गोळा करून त्यांच्या वारस कुटुंबियांना विशेष नुकसान भरपाई देण्याचे निर्देश मुख्यमंत्री श्री. फडणवीस यांनी दिले होते.

यासंदर्भात परिस्थितीचे अवलोकन करून आराखडा तयार करण्यासंदर्भात मुख्यमंत्री तथा गडचिरोलीचे पालकमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांच्या सुचनेनुसार 'मित्रा'चे मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री. परदेशी यांच्या मार्गदर्शनाखाली बैठक झाली. या बैठकीत विविध उपाययोजनांवर चर्चा झाली. यामध्ये गडचिरोली जिल्ह्यातील चपराळा व प्राणहिता अभयारण्यात सागवान झाडांचे विरळीकरण करणे व कुरणाचे प्रमाण वाढविण्याचा निर्णय झाला. जेणेकरून तृणभक्षी प्राण्याची संख्या वाढून मांस भक्षी प्राण्यांना खाद्य मिळेल. प्रत्येक गावात पोलिस पाटीलच्या धर्तीवर वन पाटील नेमण्याचेही यावेळी ठरविण्यात आले. स्थानिकांना जंगलात लाकूड, सरपण गोळा करण्यासाठी जंगलात जावे लागू नये यासाठी गावामध्ये पाइपलाइनद्वारे CBG गॅस पुरवठा करण्यासाठी ग्रामस्थांच्या शेतात गवत उत्पादन करून त्याचा उपयोग सीबीजीसाठी करण्याचा निर्णय यावेळी घेण्यात आला. त्यासाठी सीबीजी गॅस प्लांट उभारण्याचेही ठरविण्यात आले. वन्य प्राण्यामुळे नुकसान झालेल्या पिकांची नुकसान भरपाई लवकर देण्यासाठी ई पंचनामा करणे, वाघांची वाढती संख्या लक्षात घेऊन चपराळा अभयारण्यातील 6 गावांच्या स्थलांतरासाठी तेथील स्थानिकांचे सामाजिक, आर्थिक मूल्यांकन करणे, पुनर्वसनासाठी नव्या जागेचा शोध घेणे आदी उपाय योजना राबविण्याचा निर्णय बैठकीत घेण्यात आला.

तसेच यासंबंधीच्या उपाय योजना करण्याबाबत या विषयावर काम करणाऱ्या वाईल्ड लाईफ इन्स्टिट्यूट सारख्या संस्थांच्या तज्ञांची नेमणूक करण्यात येणार आहे. धोकाग्रस्त व संवेदनशील क्षेत्राचे सौम्यीकरण (मिटीगेशन) आराखडा तयार करण्याबाबतही यावेळी चर्चा करण्यात आली. मानव आणि वन्यजीव संघर्षात आढळणारे वाघ हे वयस्कर असल्याचे दिसून येते. अशा वाघाच्या स्थलांतर संदर्भातही धोरणात्मक निर्णय घेण्याचे आवश्यक असल्याचे मत यावेळी मांडण्यात आले. 

डिजीटल व्यवहारांत देशाला जागतिक नेतृत्व मिळवून देण्यात वाटा


 डिजीटल व्यवहारांत देशाला जागतिक नेतृत्व मिळवून देण्यात वाटा

भारताला डिजिटल व्यवहारांमध्ये जागतिक नेतृत्व मिळवून देण्यात आरबीआय चा मोठा वाटा आहे. युपीआय (UPI) सारख्या नाविन्यपूर्ण प्रणालींमुळे आर्थिक व्यवहार सहज, सुरक्षित आणि किफायतशीर झाले आहेत. याशिवाय, आरबीआय ने एक संपन्न वित्तीय-तंत्रज्ञान (Fin-Tech) पर्यावरण निर्माण करण्यासही मदत केली आहे. जसे-जसे भारत तंत्रज्ञानाधारित वित्तीय व्यवस्थेकडे वाटचाल करत आहे, तसे आरबीआय ग्राहक संरक्षण अधिक बळकट करत आहे आणि नव्या आव्हानांचा सामना करत आहे. आरबीआय ग्राहकांच्या विश्वासास प्राधान्य देत असून, ठेवीदारांसाठी विमा सुरक्षा, तसेच तक्रार निवारण यंत्रणा मजबूत करत आहे. 'एकात्मिक लोकपाल योजना' (Integrated Ombudsman Scheme) द्वारे ग्राहकांना तक्रार निवारणाची सुलभ आणि पारदर्शक सुविधा मिळत आहे.

वित्तीय साक्षरता ही ग्राहक संरक्षणाचा एक महत्त्वाचा भाग आहे. आरबीआयच्या विविध मोहिमा आणि प्रकाशने नागरिकांना वित्तीय व्यवहारांतील जोखीम समजावून सांगतात, फसवणुकीपासून वाचण्यास मदत करतात आणि सुज्ञ आर्थिक निर्णय घेण्यास प्रोत्साहन देतात. तंत्रज्ञानाच्या झपाट्याने होणाऱ्या प्रगतीसोबतच सायबर सुरक्षेच्या जोखमीही वाढत आहेत. त्यामुळे आरबीआय डिजिटल व्यवहार अधिक सुरक्षित करण्यासाठी सक्रिय पावले उचलत आहे. आरबीआय पर्यावरण पूरक धोरणांच्या दिशेने पावले उचलत आहे. हरित (ग्रीन) अर्थव्यवस्थेकडे वाटचाल करताना आरबीआयने 'ग्रीन डिपॉझिट फ्रेमवर्क' आणि 'प्राधान्य क्षेत्र कर्जपुरवठा' (Priority Sector Lending - PSL) अंतर्गत हरित वित्तपुरवठा यासारख्या उपक्रमांद्वारे मोठे योगदान दिले आहे. आरबीआयने काळानुसार स्वतःला विकसित करत भारताच्या आर्थिक परिवर्तनात महत्त्वपूर्ण भूमिका बजावली आहे. महागाई नियंत्रण, वित्तीय समावेशन, आर्थिक स्थैर्य आणि मजबूत वाढ यासारख्या विविध क्षेत्रांमध्ये त्याची भूमिका निर्णायक ठरली आहे.

गेल्या ९० वर्षांत आरबीआयचा प्रवास सरकारच्या दृष्टीकोन आणि धोरणांशी सुसंगत राहिला आहे. आर्थिक सुधारणांपासून स्थिरतेपर्यंत, सरकार आणि आरबीआय यांचे सहकार्य देशाच्या आर्थिक वाढीसाठी उपयुक्त ठरले आहे.  केवळ एका स्वाक्षरीने आरबीआयच्या गव्हर्नरच्या स्वाक्षरीने एक साधे कागदाचे तुकडे चलन बनते. ही ताकद दुसऱ्या कोणाच्याही स्वाक्षरीला नाही. सर्वसामान्य नागरिकांना आरबीआय सोबत थेट संपर्क नसतो, परंतु त्यांच्या दैनंदिन आर्थिक व्यवहारांमध्ये आरबीआयचा अप्रत्यक्षपणे प्रभाव असतो. गेल्या नव्या दशकांत आरबीआयने कमावलेली सर्वात मोठी संपत्ती म्हणजे जनतेचा विश्वास. हा विश्वास कायम राखण्यासाठी आरबीआयने नेहमीच स्थिरता, आर्थिक प्रगती आणि वित्तीय सुरक्षेच्या उद्दिष्टांवर भर दिला आहे. १९९० च्या आर्थिक उदारीकरणापासून कोविड-१९ महामारीपर्यंत आरबीआयने वेगवान आणि प्रभावी उपाययोजना केल्या आहेत. तसेच, जागतिकीकरणाच्या काळातही देशाच्या वित्तीय व्यवस्थेची सुसूत्रता कायम राखली असल्याचे सांगून राष्ट्रपती श्रीमती मुर्मू यांनी रिझर्व्ह बॅंक व्यवस्थापनाचे अभिनंदन केले.

यावेळी केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य शिंदे यांनी रिझर्व्ह बॅंकेच्या योगदानाचे महत्व अधोरेखित करत जागतिक स्तरावर होत गेलेल्या गतीमान बदलांच्या पार्श्वभूमीवरही आरबीआयने आर्थिक बाबी नियंत्रित करण्यात  ठामपणे बजावलेल्या कामगिरीचे कौतुक केले.

कार्यक्रमाचे प्रास्ताविक आरबीआयचे गव्हर्नर संजय मल्होत्रा यांनी केले. यावेळी मान्यवरांच्या हस्ते विशेष स्टॅम्पचे अनावरण ही करण्यात आले.

रिझर्व्ह बॅंक भारताच्या आर्थिक स्थैर्याचा आधारस्तंभ; डिजीटल व्यवहारांत देशाला जागतिक नेतृत्व मिळवून देण्यात आरबीआयचा महत्वाचा वाटा

 रिझर्व्ह बॅंक भारताच्या आर्थिक स्थैर्याचा आधारस्तंभ;

डिजीटल व्यवहारांत देशाला जागतिक नेतृत्व मिळवून देण्यात

आरबीआयचा महत्वाचा वाटा

- राष्ट्रपती द्रौपदी मुर्मू

 

मुंबई, दि. १ : भारत २०४७ मध्ये ‘विकसित भारत’ (Viksit Bharat 2047) होण्याच्या दिशेने पुढे जात असताना, अर्थव्यवस्थेतील नव्या आव्हानांना सामोरे जाण्यासाठी नाविन्यपूर्ण आणि समावेशक वित्तीय प्रणाली आवश्यक आहे. रिझर्व्ह बॅंक भारताच्या आर्थिक स्थैर्याचा आधारस्तंभ  राहणार आहे. भारताला डिजिटल व्यवहारांमध्ये जागतिक नेतृत्व मिळवून देण्यात रिझर्व्ह बँक ऑफ इंडियाचा मोठा वाटा आहे. मजबूत बँकिंग प्रणाली, वित्तीय नवउपक्रम आणि ग्राहकांचा विश्वास कायम राखण्याच्या दृष्टीने याची भूमिका अत्यंत महत्त्वाची असेल असे प्रतिपादन राष्ट्रपती  द्रौपदी मुर्मू यांनी आज येथे केले.

एनसीपीए नरिमन पॉईंट येथे आयोजित रिझर्व्ह बँक ऑफ इंडियाच्या ९०व्या वर्धापन दिनानिमित्त कार्यक्रमात राष्ट्रपती श्रीमती मुर्मू बोलत होत्या. यावेळी व्यासपीठावर राज्यपाल सी.पी.राधाकृष्णन, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री अजित पवार, रिझर्व्ह बॅंकेचे गर्व्हनर संजय मल्होत्रा उपस्थित होते.

राष्ट्रपती द्रौपदी मुर्मू म्हणाल्या की, रिझर्व्ह बँक ऑफ इंडियाच्या ९०व्या वर्धापन दिनाचा उत्सव आज साजरा करत  आहोत. रिझर्व्ह बँक ऑफ इंडिया या प्रतिष्ठित संस्थेच्या महत्त्वपूर्ण टप्प्यावर ही देशातील सर्वात महत्त्वाच्या संस्थांपैकी एक आहे. देशाची केंद्रीय बँक म्हणून रिझर्व्ह बँक ऑफ इंडिया भारताच्या अद्वितीय विकास प्रवासाच्या केंद्रस्थानी आहे. स्वातंत्र्यपूर्व काळातील  खडतर स्थितीपासून ते आजच्या जागतिक महासत्तेपर्यंतच्या प्रवासात आरबीआय हा महत्त्वाचा आधारस्तंभ राहिला आहे. १९३५ मध्ये स्थापन झालेली ही संस्था नेहमीच देशाच्या विकासाच्या प्रवासापेक्षा एक पाऊल पुढे राहिली असून या प्रवासात देशाचे नेतृत्वही केले असल्याचे राष्ट्रपती श्रीमती मुर्मू म्हणाल्या.

आरबीआय केवळ केंद्रीय बँक नसून वित्तीय समावेशन व संस्थात्मक उभारणीमध्येही महत्त्वाची भूमिका बजावत आहे. संस्थात्मक बांधणीच्या दृष्टिकोनातून आरबीआय ने नाबार्ड, आयडीबीआय, सिडबी आणि नॅशनल हाऊसिंग बँक यांसारख्या महत्त्वपूर्ण वित्तीय संस्था स्थापन केल्या आहेत, ज्या शेती, लघु व्यवसाय आणि गृहनिर्माण क्षेत्रासाठी महत्त्वाचा पाठिंबा देतात. 'लीड बँक योजना'सारख्या उपक्रमांमुळे बँकिंग सेवा ग्रामीण भागांपर्यंत पोहोचवण्यात मदत झाली आहे. आर्थिक समावेशनाच्या दिशेने आरबीआय ने प्रधानमंत्री जनधन योजनेसाठी अनुकूल धोरणात्मक वातावरण निर्माण केले आहे. विशेषतः, महिलांच्या मोठ्या संख्येने या योजनेत सहभागी होणे हा आर्थिक सक्षमीकरणाचा सकारात्मक बदल आहे.

आंबा निर्यातप्रश्नी नवीन नियमावली करू

 आंबा निर्यातप्रश्नी नवीन नियमावली करू

- कृषी राज्यमंत्री आशिष जयस्वाल

 

मुंबई, दि. 25 : कोकणातील आंबा हा जगामध्ये निर्यात केला जातो. शेतकऱ्यांना वेळोवेळी योग्य ते प्रबोधन, व्यवस्थापन, मार्गदर्शन करण्याचे काम कृषी विद्यापीठामार्फत केले जाते. कोकणातील आंबा व काजू उत्पादक शेतकऱ्यांना कीटक नाशके, औषध फवारणी याचबरोबर निर्यात करताना घ्यावयाची काळजी, याबाबत कृषी विद्यापीठांनी शेतकऱ्यांना मार्गदर्शन करण्यासंदर्भात नवीन मार्गदर्शक नियमावली केली जाईल, अशी माहिती कृषी राज्यमंत्री आशिष जयस्वाल यांनी लक्षवेधीच्या उत्तरात दि.

विधानपरिषद सदस्य श्रीमती चित्रा वाघ, प्रवीण दरेकर, संजय केनेकर, सुनील शिंदे यांनी राज्यातील आंबा व काजू पिकाच्या निर्याती संदर्भात लक्षवेधी सूचना मांडली होती, त्यास राज्यमंत्री जयस्वाल यांनी उत्तर दिले.

राज्यमंत्री श्री. जयस्वाल म्हणाले की, कोकणातील आंबा उत्पादनाबरोबरच राज्यात वेगवेगळ्या पद्धतीची पिके घेतली जातात. राज्यातील पिकाचे लागवड क्षेत्रानुसार कृषी विद्यापीठामार्फत संबंधित शेतकऱ्यांना मार्गदर्शन करण्यासाठी कृषी विभाग समन्वय करेल, अशी माहिती त्यांनी यावेळी दिली. 

बंदिस्त नलिका वितरण प्रणालीमुळे बचत होणारे पाणी चासकमानसाठी उपयुक्त

 बंदिस्त नलिका वितरण प्रणालीमुळे बचत होणारे

पाणी चासकमानसाठी उपयुक्त

-         जलसंपदा मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील

 

मुंबई, दि. २५ : चासकमान प्रकल्पाच्या मंजुर बंदिस्त नलिका वितरण प्रणालीमध्ये रुपांतरण करणे कामाचे संकल्पन, संरेखा व अंदाजपत्रक इत्यादीचे काम प्रगतीपथावर आहे. संकल्पनाअंती आराखड्यास मंजुरीनंतर बंदिस्त नलिका वितरण प्रणालीमुळे पाणी बचत होईल आणि हे अतिरिक्त पाणी चासकमानसाठी उपयोगी ठरेल, असा विश्वास जलसंपदा मंत्री (गोदावरी व कृष्णा खोरे विकास महामंडळ) राधाकृष्ण विखे पाटील यांनी विधान परिषदेत व्यक्त केला.

सदस्य प्रवीण दरेकर यांनी यासंदर्भातील लक्षवेधी सूचना मांडली होती.

याबाबत अधिक माहिती देताना जलसंपदा मंत्री श्री.विखे-पाटील म्हणाले, चासकमानसाठी कलमोडी धरणातून १.०७ टीएमसी पाणी आरक्षित आहे. लोकसंख्येच्या वाढीमुळे आणि औद्योगिक क्षेत्राच्या विस्तारामुळे पाण्याची मागणी वाढत आहे. कलमोडी मध्यम प्रकल्पाच्या फेर जल नियोजन प्रस्ताव महामंडळाकडून शासनास प्राप्त झाला असून प्रस्तावाची छाननी प्रक्रिया सुरू आहे. नवीन प्रकल्पाच्या अंमलबजावणीसह, जुन्या पाणीवितरण व्यवस्थेत सुधारणा करून, उपलब्ध पाण्याचा अधिक चांगला उपयोग करता येईल. यामुळे अतिरिक्त पाणी उपलब्ध होईल आणि भविष्यातील वाढती मागणी पूर्ण करता येईल, असेही श्री.विखे पाटील यांनी सांगितले.

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