Sunday, 22 March 2026

सेवा ही जैन धर्म की पहचान है।

 उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि जैन समाज देशभर में विभिन्न माध्यमों से समाजहित के कार्य कर रहा है और सेवा ही जैन धर्म की पहचान है। ६४ लोगों द्वारा दीक्षा ग्रहण करना अत्यंत प्रेरणादायी है, जिससे संयम, सादगी और आध्यात्मिकता का संदेश समाज को मिलता है। भगवान महावीर द्वारा दिया गया अहिंसा, अपरिग्रह और अनेकांतवाद का संदेश आज के समय में और अधिक प्रासंगिक है। संवाद, सहिष्णुता और सभी जीवों के प्रति करुणा जैसे मूल्यों के माध्यम से ही शांति और स्थिरता का मार्ग प्राप्त हो सकता है, ऐसा भी उन्होंने स्पष्ट किया।

तमिलनाडु और जैन धर्म के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने साहित्य, संस्कृति और ज्ञान के संवर्धन में जैन समाज के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि जैन दर्शन के जीवनमूल्य आज भी समाज के लिए मार्गदर्शक हैं।

जैन धर्म का संदेश शांति, संयम और समन्वय का — राज्यपाल जिष्णू देव वर्मा

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