कॉरपोरेट, शैक्षणिक संस्थान और सरकारी विभाग दिव्यांगजनों के लिए रोजगार एवं कौशल विकास के अधिक अवसर उपलब्ध कराएं - राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा
· सीएसआर निधि में दिव्यांगजनों के लिए उप-कोटा होना चाहिए - पूर्व केंद्रीय सचिव लव वर्मा
· दिव्यांगजनों के कौशल विकास हेतु विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय स्थापित करेंगे - डॉ. जितेंद्र अग्रवाल
'विकसित भारत' का अर्थ एक समावेशी भारत है, जिसमें दिव्यांगजनों का सशक्तिकरण एक महत्वपूर्ण आधार है। कॉरपोरेट क्षेत्र, शैक्षणिक संस्थानों तथा सरकारी विभागों को दिव्यांगजनों के लिए रोजगार एवं कौशल प्रशिक्षण के अधिक अवसर सृजित कर उनके लिए अनुकूल एवं समावेशी वातावरण तैयार करना चाहिए। यह आह्वान महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने किया।
राज्यपाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तथा आधुनिक प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हो रही प्रगति दिव्यांगजनों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल रही है। किंतु प्रौद्योगिकी का वास्तविक उद्देश्य तभी सार्थक होगा, जब उसमें करुणा, मानवीय संवेदनशीलता और न्यायपूर्ण दृष्टिकोण का समावेश हो।
दिव्यांगजनों के कौशल विकास एवं सशक्तिकरण के लिए कार्यरत 'सार्थक एजुकेशन ट्रस्ट' के 18वें स्थापना दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए राज्यपाल यह विचार व्यक्त कर रहे थे। यह समारोह को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, मुंबई में आयोजित किया गया था।
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