फॉर्च्यून इंडिया 100 मोस्ट पावरफुल वुमेन' सम्मान समारोह
महिला स्वयं सहायता समूहों ने देश में क्रांति लाई है : राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा
नीता अंबानी, स्मृति ईरानी, जिया मोदी और नीरजा बिड़ला की उपस्थिति
मुंबई दि.11 : महिला स्वयं सहायता समूहों ने देश में महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक सशक्तीकरण को नई गति प्रदान की है तथा ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं के जीवन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाए हैं। गांव-गांव की महिलाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित हो रही है। यह कार्य और अधिक प्रभावी बनाने के लिए समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना आवश्यक है। यह बात महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने आज यहाँ कही।
'फॉर्च्यून इंडिया 100 मोस्ट पावरफुल वुमेन' सम्मान समारोह का शुभारंभ 10 जुलाई को मुंबई में राज्यपाल श्री जिष्णु देव वर्मा की प्रमुख उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर वे उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे।
कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल भी उपस्थित थीं। इस अवसर पर राज्यपाल ने 'फॉर्च्यून इंडिया' पत्रिका के नवीनतम अंक का विमोचन किया।
विभिन्न क्षेत्रों में नेतृत्व कर रही महिलाओं को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से अनेक महिलाओं ने अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है तथा वे अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनी हैं।
उन्होंने त्रिपुरा की एक ग्रामीण महिला का उदाहरण देते हुए कहा कि जो महिला कभी बैंक जाने से भी हिचकिचाती थी, वही बाद में अधिकारियों के समक्ष पूरे आत्मविश्वास के साथ पावर-पॉइंट प्रस्तुति देने लगी। आज वह 'बैंक सखी' के रूप में अनेक महिलाओं को वित्तीय सेवाओं से जोड़ने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को दिए गए ऋणों में अनुत्पादक परिसंपत्तियों (एनपीए) का प्रतिशत एक प्रतिशत से भी कम है। महिलाओं के हाथों में दिया गया धन सुरक्षित रहता है।
राज्यपाल ने कहा कि देश की लगभग 50 प्रतिशत आबादी महिलाएँ हैं। उनके विकास की उपेक्षा करके 'विकसित भारत' का लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सकता। इसलिए समाज के अंतिम पायदान पर खड़ी महिला तक पहुँचकर उसका सशक्तीकरण सुनिश्चित करना समय की आवश्यकता है।
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