Tuesday, 9 September 2025

प्रकल्पाच्या पहिल्या टप्प्यातील गोसीखुर्द ते निम्न वर्धा सर्वेक्षणाचे काम वेळेत पूर्ण

 मुख्यमंत्री श्री. फडणवीस म्हणाले कीप्रकल्पाची तपासणी राज्यस्तरीय तांत्रिक सल्लागार समितीमार्फत करून सविस्तर प्रकल्प अहवाल १५ ऑक्टोबर २०२५ पर्यंत शासनाकडे सादर करावा. तसेच या प्रकल्पाला कालबद्ध नियोजन करून गती द्यावी. यासाठी केंद्र शासनाकडे पत्र पाठवूनप्रकल्पाच्या किमान २५ टक्के निधी केंद्र सरकारकडून मिळवता येईल का यासाठी राज्य सरकारकडून पाठपुरावा केला जाईल. राज्य शासनाकडूनही आवश्यक निधी उपलब्ध करून दिला जाईल.

प्रकल्पाच्या पहिल्या टप्प्यातील गोसीखुर्द ते निम्न वर्धा सर्वेक्षणाचे काम वेळेत पूर्ण झाले आहे. पुढील कामकाजासाठी पर्यावरण मान्यता प्राप्त करून प्रकल्पाचा पहिला टप्पा तात्काळ सुरू करावाअसेही मुख्यमंत्री श्री.फडणवीस यांनी यावेळी सांगितले.


वैनगंगा- नळगंगा नदीजोड प्रकल्प अहवाल १५ ऑक्टोबरपर्यंत शासनाकडे सादर करावा केंद्राकडे निधी मागणीचे पत्र पाठवावे

 वैनगंगा- नळगंगा नदीजोड प्रकल्प अहवाल १५ ऑक्टोबरपर्यंत शासनाकडे सादर करावा

केंद्राकडे निधी मागणीचे पत्र पाठवावे

– मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

 

मुंबईदि. ८ : राज्यातील महत्त्वाकांक्षी वैनगंगानळगंगा नदीजोड प्रकल्पाद्वारे विदर्भ आणि मराठवाडा विभागातील पाणीटंचाई दूर करण्यासोबतच शेतीला शाश्वत पाणीपुरवठा उपलब्ध होणार आहे. या प्रकल्पाला गती देण्यासाठी सविस्तर प्रकल्प अहवाल (DPR) दिनांक १५ ऑक्टोबर २०२५ पर्यंत शासनाकडे सादर करावाअसे निर्देश मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी दिले. तसेच आर्थिक नियोजनासाठी केंद्र सरकारकडे निधी मागणीसंदर्भात पत्र पाठवून पाठपुरावा केला जाईल आणि राज्य सरकारकडून आवश्यक निधी उपलब्ध करून दिला जाईलअसेही मुख्यमंत्री श्री.फडणवीस यांनी यावेळी सांगितले.


स्पेक्स 2030 वन साइट प्रोग्राम

 स्पेक्स 2030 वन साइट प्रोग्राम नामक इस योजना को राज्य शासन के स्वास्थ्य विभागवन साइट लकॉटिका फाउंडेशन और WHO के सहयोग से गड़चिरोली सहित देश के पाँच पिछड़े जिलों में लागू किया जाएगा। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय अंधत्व निवारण व दृष्टिदोष नियंत्रण कार्यक्रम (NPCBVI) के अंतर्गत संचालित होगा।

विश्व स्तर पर 2.2 अरब लोग दृष्टिदोष का सामना कर रहे हैंऔर इनमें से कम से कम अरब मामले इलाज योग्य हैं। भारत में लगभग 53% दृष्टिदोष अपूर्ण दृष्टिदोष (Refractive Errors) के कारण होता हैजो लगभग प्रत्येक दसवां स्कूल जाने वाले छात्र प्रभावित करता है। इसी संदर्भ में WHO ने स्पेक्स 2030 पहल की शुरुआत कीजिसका लक्ष्य 2030 तक सस्ते व गुणवत्तापूर्ण चश्मों की सार्वभौमिक उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

इस पहल के तहत गड़चिरोली के साथ-साथ आसाम (धुबड़ी)ओडिशा (कलाहांडी)राजस्थान (अलवर)और उत्तर प्रदेश (प्रयागराज) में आशा किरण मॉडल अपनाया जाएगा। इस मॉडल में आशा कार्यकर्ता घर-घर पहुंच कर प्राथमिक नेत्र जाँच करेंगेप्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चश्मे उपलब्ध कराए जाएंगेऔर सरकारी अस्पतालों में मोतियाबिंद की सर्जरी कराई जाएगी।

इस योजना में स्थानीय स्वास्थ्य कर्मचारियों का प्रशिक्षणजनजागृति अभियानविद्यालय व ग्राम पंचायत स्तर पर स्वास्थ्य संवादस्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं व मीडिया द्वारा प्रचार प्रसारऔर कार्यक्रम की प्रभावशीलता मापने हेतु डेटा संकलन जैसे विविध कार्य शामिल हैं।

स्पेक्स 2030” पहल से गड़चिरोली के नागरिकों को मिलेगी नेत्रसेवा

 

स्पेक्स 2030 पहल से गड़चिरोली के नागरिकों को मिलेगी नेत्रसेवा

– मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
जन स्वास्थ्य विभाग व विश्व स्वास्थ्य संगठन के संयुक्त प्रयास

मुंबई, 8 मार्च: आदिवासी व पिछड़े जिलों जैसे गड़चिरोली में नेत्र स्वास्थ्य के प्रति जनजागृति पैदा करनेकिफायती व गुणवत्तापूर्ण नेत्र सेवाएँ पहुँचाने और उपचार उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा संचालित SPECS 2030 परियोजना से बच्चों की शिक्षायुवाओं के लिए रोजगार और पूरे समाज के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।

मुख्यमंत्री ने एसपीईसीएस 2030 पहल को गड़चिरोली जिले में लागू करने का आग्रह किया। यह initiative अहेरी तालुका को देश में आदर्श दृष्टि सेवा केंद्र बनाएगा।


Monday, 8 September 2025

महाराष्ट्र 22 साल बाद कैसा होना चाहिए। यह एक ऐसा रोडमैप

 उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि इस विज़न में यह दिखता है कि महाराष्ट्र 22 साल बाद कैसा होना चाहिए। यह एक ऐसा रोडमैप है जो भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर दिशा निर्धारित करता है। बड़े सपने तभी सच होते हैं जब जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार दोनों पर बराबर हो। विज़न में जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने की शक्ति हैऔर समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुँचाना इसका मुख्य उद्देश्य है।

बैठक में यह विश्वास दोहराया गया कि विकसित महाराष्ट्र विज़न 2047’ सिर्फ कागज़ पर नहींवास्तविकता में लागू होकर राज्य के विकास को तेज करेगा। मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री के निर्देशन में तैयार इस विज़न डॉक्यूमेंट से आने वाले दो दशकों में महाराष्ट्र की आर्थिकसामाजिक और औद्योगिक प्रगति सुनिश्चित होगी।

बैठक में उपलब्ध सेक्टरों के लिए वीज़न प्रस्तुत किए गए जैसे जलसंपदाऊर्जाउच्च व तकनीकी शिक्षास्कूल शिक्षाकौशल विकाससामाजिक न्यायउद्योगसेवासूचना प्रौद्योगिकीवित्तस्वास्थ्य एवं पर्यटन।

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विजन डॉक्यूमेंट 2047”: राज्य की नीतियों के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत

 विजन डॉक्यूमेंट 2047राज्य की नीतियों के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत

विजन डॉक्यूमेंट 2047 के अनुसार नीति बनाएं, ‘विकसित महाराष्ट्र’ का सपना पूरा करें  मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

मुंबई:  महाराष्ट्र के विजन डॉक्यूमेंट 2047’ को भविष्य की नीतियों के लिए मार्गदर्शक तत्वों का स्थान देने पर जोर दिया।  गीताबाइबिल, कुरान और विकास का सविंधान की तरह, विकसित महाराष्ट्र वीज़न डॉक्यूमेंट 2047 की समीक्षा हेतु सह्याद्री अतिथिगृह में हुई। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री फडणवीस ने कीजिसमें उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदेमुख्य सचिव राजेश कुमार सहित कई विभागों के अपर मुख्य सचिवप्रधान सचिव एवं सचिव उपस्थित थे। जलऊर्जाशिक्षासामाजिक कल्याणउद्योग और सेवाप्रौद्योगिकी व अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों पर प्रस्तुतियों का विस्तार से मूल्यांकन किया गया।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि यह डीप थिंकिंग का प्रमाण हैं और उन्होंने संतोष व्यक्त किया। हम सही रास्ते पर हैं। अगले 25 वर्षों के लिए एक रोडमैप तैयार हो रहा है। विज़न का मतलब दिशा होता है हमारे लक्ष्यों और दिशा का स्पष्ट होना आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ कागजी योजना नहीं होनी चाहिएबल्कि इसे वास्तविकता में उतराने के लिए पूरी क्षमता लगानी होगी। पाँच साल तक इस विज़न पर लगातार काम कियातो 2047 तक विकसित महाराष्ट्र’ का सपना पूरा हो सकता है।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने सहकार क्षेत्र के महत्वप्रशासन में सूचना प्रौद्योगिकी के अधिकतम उपयोगभारत नेट का शीघ्र विकासऔर साइबर सुरक्षा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह वीज़न डॉक्यूमेंट देश के सर्वश्रेष्ठ में से एक होगाऔर शिक्षा संस्थानों व विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।

उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि इस विज़न में यह दिखता है कि महाराष्ट्र 22 साल बाद कैसा होना चाहिए। यह एक ऐसा रोडमैप है जो भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर दिशा निर्धारित करता है। बड़े सपने तभी सच होते हैं जब जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार दोनों पर बराबर हो। विज़न में जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने की शक्ति हैऔर समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुँचाना इसका मुख्य उद्देश्य है।

बैठक में यह विश्वास दोहराया गया कि विकसित महाराष्ट्र विज़न 2047’ सिर्फ कागज़ पर नहींवास्तविकता में लागू होकर राज्य के विकास को तेज करेगा। मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री के निर्देशन में तैयार इस विज़न डॉक्यूमेंट से आने वाले दो दशकों में महाराष्ट्र की आर्थिकसामाजिक और औद्योगिक प्रगति सुनिश्चित होगी।

बैठक में उपलब्ध सेक्टरों के लिए वीज़न प्रस्तुत किए गए जैसे जलसंपदाऊर्जाउच्च व तकनीकी शिक्षास्कूल शिक्षाकौशल विकाससामाजिक न्यायउद्योगसेवासूचना प्रौद्योगिकीवित्तस्वास्थ्य एवं पर्यटन।

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Vision Document 2047’: Guiding Principles for State Policies

 Vision Document 2047’: Guiding Principles for State Policies

“Let’s shape policies according to Vision Document 2047 and fulfill the dream of Developed Maharashtra”  Chief Minister Devendra Fadnavis

Mumbai: Chief Minister Devendra Fadnavis emphasized today that just as sacred texts like the Gita, Bible, Quran  and constitution of development serve as guiding pillars, Maharashtra’s “Vision Document 2047” should serve as the foundational framework for the state’s future policies. He made these remarks during a review meeting on the ‘Developed Maharashtra Vision Document 2047’ held at Sahyadri Guest House. Attendees included Deputy Chief Minister Eknath Shinde, Chief Secretary Rajesh Kumar, and various department secretaries and principal secretaries. Presentations covered key sectors including water, power, education, social welfare, industry and services, technology, and the economy.

Fadnavis praised the presentations, noting the deep thinking involved and expressed satisfaction. “We are on the right path. A roadmap for the next 25 years is being laid. A vision provides direction; it is essential that our goals and direction are clearly defined.” He stressed that the vision document must go beyond mere paperwork and be fully implemented. “If we consistently work towards this vision over the next five years, we will surely realize the dream of Developed Maharashtra by 2047,” he added.

The Chief Minister also highlighted the vital role of the cooperative sector, urged greater use of information technology in governance, accelerated implementation of BharatNet, and international collaboration for cyber security. He expressed confidence that this will be one of the best vision documents in the country and called for increased focus on improving the quality of educational institutions and universities.

Deputy Chief Minister Shinde remarked that the vision crystalizes how Maharashtra should look 22 years from now. It is a plan that anticipates future needs and steers the state accordingly. He said big dreams are essential for progress, and that both governance and administrative responsibility are significant. The vision embodies the power to meet public expectations, with the ultimate goal of reaching every section of society.

It was reiterated that the “Developed Maharashtra Vision 2047” is not just a paper blueprint it is meant to accelerate Maharashtra’s development. Under the guidance of the Chief Minister and Deputy Chief Minister, this vision document is expected to anchor the state’s economic, social, and industrial growth over the next two decades.

The meeting featured presentations on the vision for sectors including water resources, energy, higher and technical education, school education, skill development, social justice, industry, services, information technology, finance, health, and tourism.

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