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Monday, 14 April 2025
Efforts Should Be Made to Fulfill the Dream of Social Transformation by Bharat Ratna Dr. Babasaheb Ambedkar
Efforts Should Be Made to Fulfill the Dream of Social Transformation by Bharat Ratna Dr. Babasaheb Ambedkar
- Governor C. P. Radhakrishnan
Governor and Chief Minister Pay Tribute at Chaityabhoomi on the Occasion of the 134th Birth Anniversary of Bharat Ratna Dr. Babasaheb Ambedkar
Mumbai, 14th April: On the occasion of the 134th birth anniversary of Bharat Ratna Dr. Babasaheb Ambedkar, Governor C.P. Radhakrishnan called upon everyone to strive towards realizing Dr. Ambedkar’s dream of social transformation and a society based on social and economic equality. He was speaking at an event held at Chaityabhoomi. Present at the event were Deputy Chief Minister Eknath Shinde, Deputy Chief Minister Ajit Pawar, Chairman of the Legislative Council Ram Shinde, Minister of Social Justice Sanjay Shirsat, Minister of Cultural Affairs Ashish Shelar, Minister of Soil and Water Conservation Sanjay Rathod, Chief Secretary Sujata Saunik, Municipal Commissioner of Mumbai Bhushan Gagrani, and other distinguished guests.
Governor Radhakrishnan said, Dr. Babasaheb is revered as the architect of India’s Constitution, a great social reformer, and a patriot. He praised Dr. Ambedkar’s contributions towards democracy, social equality, and gender equality.
The Governor also mentioned that Prime Minister Narendra Modi, when taking the oath of office, had considered the Constitution as his guiding force. He expressed his belief that the Dr. Ambedkar Memorial being built at Indu Mill would become an inspiration for future generations.
गुरु अपने लिए नहीं, समाज के लिए लड़ते हैं; यह आदर्श आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचना
गुरु अपने लिए नहीं, समाज के लिए लड़ते हैं;
यह आदर्श आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचना चाहिए
- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
ठाणे, 14 अप्रैल : “सच्चे गुरु कभी भी अपने स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि समाज के कल्याण के लिए लड़ते हैं। हमारे गुरुओं ने जो आदर्श हमारे सामने रखे हैं, वे पूरी मानवता के लिए प्रेरणास्रोत हैं, और इन्हें अगली पीढ़ियों तक पहुँचाना हमारा कर्तव्य है,” ऐसा वक्तव्य मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज गुरमत समागम कार्यक्रम के दौरान दिया। यह कार्यक्रम नवी मुंबई के गुरुद्वारे के समीप स्थित एनएमएमसी मैदान में आयोजित किया गया।
इस अवसर पर महाराष्ट्र के वन मंत्री गणेश नाईक, विधायक मंदाताई म्हात्रे, प्रशांत ठाकुर, संजीव नाईक, नवी मुंबई महापालिका आयुक्त कैलास शिंदे, मुख्यमंत्री वैद्यकीय सहायता प्रकोष्ठ के प्रमुख रामेश्वर नाईक सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि उन्हें इस कार्यक्रम में भाग लेकर गुरुओं का आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। “गुरु ग्रंथ साहिब के माध्यम से हमें जो विचार प्राप्त होते हैं, वे केवल सिख समुदाय तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे संपूर्ण मानव जाति के कल्याण के लिए हैं,” उन्होंने कहा।
उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव जी ने पूरे देश में अपने विचारों का प्रचार किया, जिससे एक विशाल नानकपंथी समाज खड़ा हुआ। “हमें उनके दिखाए मार्ग पर चलना चाहिए। हमारे गुरुओं ने हमें केवल ज्ञान ही नहीं दिया, बल्कि अन्याय के खिलाफ लड़ने की हिम्मत और शक्ति भी दी,” उन्होंने जोर देते हुए कहा।
फडणवीस ने यह भी उल्लेख किया कि इस वर्ष गुरु तेग बहादुर सिंह जी की 350वीं शहादत वर्षगांठ मनाई जा रही है। “उन्हें आज भी 'हिंद की चादर' के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कश्मीरी पंडितों को मुगलों के अत्याचार से बचाने के लिए अपना बलिदान दिया। गुरु गोविंद सिंह जी ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया,” मुख्यमंत्री ने बताया।
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि महाराष्ट्र सरकार गुरु पर्व के आयोजन में सक्रिय रूप से भाग लेगी और जनता तक गुरुओं की शिक्षाओं और गाथाओं को पहुँचाने के लिए विविध सांस्कृतिक और शैक्षिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पंजाब साहित्य अकादमी का पुनर्गठन किया गया है, जो गुरुओं के विचारों को जनसामान्य तक पहुँचाने में सहायक बनेगी।
उन्होंने बताया कि एक 11 सदस्यीय समिति का गठन किया गया है, जो समाज की आवश्यकताओं को सरकार तक पहुँचाने और निरंतर संवाद बनाए रखने का कार्य करेगी। “विस्थापित लोगों और पूजा स्थलों के लिए जमीन दी जाएगी, और शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं को सरकार की ओर से सहायता प्रदान की जाएगी,” मुख्यमंत्री ने कहा।
इस अवसर पर आयोजकों एवं उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों द्वारा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का विशेष सत्कार भी किया गया।
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों से हुई मुंबई सहित संयुक्त महाराष्ट्र की स्थापना
डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों से हुई
मुंबई सहित संयुक्त महाराष्ट्र की स्थापना
- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
वडाला के कोरबा मिठागर क्षेत्र में डॉ. आंबेडकर की पूर्णाकृति प्रतिमा का अनावरण
मुंबई, 14 अप्रैल : “मुंबई महाराष्ट्र की है” यह दृढ़ और स्पष्ट संदेश भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने दिया था। मुंबई और महाराष्ट्र का संबंध गहराई से जुड़ा हुआ है। भाषायी आधार पर राज्यों के पुनर्गठन के दौरान मुंबई सहित संयुक्त महाराष्ट्र का निर्माण डॉ. आंबेडकर के विचारों से ही संभव हुआ, यह बात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कही। उन्होंने कहा कि मुंबई और बाबासाहेब का संबंध अतूट है।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने वडाला पूर्व स्थित कोरबा मिठागर क्षेत्र में डॉ. आंबेडकर की पूर्णाकृति प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर आयोजित समारोह में उन्होंने जनता को संबोधित किया। मंच पर सांस्कृतिक कार्य मंत्री ॲड. आशिष शेलार, विधायक कालिदास कोळंबकर, विधायक कैप्टन तमिल सेल्वन सहित अन्य मान्यवर उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबासाहेब के कार्य और उनके योगदान को उजागर करने के लिए राज्य सरकार इंदू मिल में एक भव्य स्मारक का निर्माण कर रही है। उन्होंने कहा, “बाबासाहेब द्वारा दिया गया संविधान दुनिया का सर्वश्रेष्ठ संविधान है। देश की शासन प्रणाली इसी पर आधारित है और यही संविधान भारत को महाशक्ति बनाने की दिशा में अग्रसर कर रहा है।”
उन्होंने कहा कि बाबासाहेब की प्रतिमा संविधान के बिना अधूरी है। “संविधान के माध्यम से उन्होंने शोषितों और पीड़ितों को न्याय दिलाया। संविधान ने सभी नागरिकों को समान अवसर दिए। इसके निर्माण में बाबासाहेब की दूरदर्शिता और बौद्धिक गहराई स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब डॉ. आंबेडकर ने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी, तब उनका पहला सत्कार मुंबई में हुआ था। केंद्रीय मंत्री, प्रांतीय अध्यक्ष और गोलमेज सम्मेलन से लौटने के बाद, और संविधान निर्माण के बाद जब वे लौटे, तब भी उनका स्वागत मुंबई में ही हुआ। उनकी 50वीं वर्षगांठ पर चैत्यभूमि में अभिवादन सभा भी मुंबई में ही आयोजित की गई थी।
“बाबासाहेब के जीवन के कई महत्वपूर्ण पल, उनकी स्मृतियों को संजोने वाले अनेक प्रसंग मुंबई ने देखे हैं। उनके पुस्तक प्रकाशन और छपाई का कार्य भी मुंबई में ही हुआ। उनका राजनीतिक जीवन भी यहीं से शुरू हुआ। उन्होंने शोषितों की आवाज बनकर आजीवन संघर्ष किया,” मुख्यमंत्री ने कहा।
कार्यक्रम का प्रारंभ पूर्णाकृति प्रतिमा के अनावरण से हुआ, इसके बाद एक एम्बुलेंस सेवा का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम की प्रस्तावना विधायक कोळंबकर ने की। बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।
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भारत की एकता और संविधानिक मूल्यों का आधार डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने रखा
भारत की एकता और संविधानिक मूल्यों का आधार डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने रखा
- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि भारत के संविधान के माध्यम से देश की एकता और अखंडता बनाए रखने का अमूल्य कार्य भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने किया है। आज हम जो एकजुट भारत का अनुभव कर रहे हैं, वह डॉ. आंबेडकर के संविधान पर आधारित है। हम संविधान की 75वीं वर्षगांठ का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। डॉ. आंबेडकर ने देश में सामाजिक विषमता को चुनौती दी और समानता और बंधुत्व के मूल्य स्थापित करने का ऐतिहासिक कार्य किया। संविधान के माध्यम से उन्होंने प्रत्येक नागरिक को जीने का समान अधिकार, अवसरों की समानता और अपनी सपनों को साकार करने का विश्वास दिया, ऐसा मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस अवसर पर कहा।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि डॉ. आंबेडकर के कार्यों के कारण आज का आधुनिक भारत बना है, और उनके विचारों का पालन करते हुए संविधानिक मूल्यों के प्रति निष्ठा रखना ही उनकी जयंती कर सबसे सच्ची श्रद्धांजली होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत का संविधान मेरे लिए सर्वोच्च है। भारत के विकास और प्रगति की दिशा में संविधान की भूमिका महत्वपूर्ण है। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के योगदान में शिक्षा, सामाजिक न्याय, औद्योगिक विकास और मानवाधिकारों का योगदान अमूल्य है। आधुनिक भारत की संरचना में उनका कार्य अतुलनीय है, जैसे पाटबंधारे योजनाएं, राष्ट्रीय विद्युत ग्रीड, कामकाजी अधिकारों की रक्षा, और अन्य महत्वपूर्ण नीतियों के शिल्पकार के रूप में उन्होंने देश को दीर्घकालिक दिशा दी।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि डॉ. आंबेडकर के कार्य और विचारों का सम्मान करना और संविधानिक मूल्यों के प्रति निष्ठा रखते हुए समानता, बंधुत्व और न्याय को अपनाना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजली होगी।
बृहन्मुंबई महानगरपालिका जनसंपर्क विभाग द्वारा डॉ. बाबासाहेब के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं की छायाचित्र प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसे मान्यवरों ने देखा।
इस अवसर पर राज्यपाल द्वारा सभी भिक्षुओं को चिवरदान दिया गया। मान्यवरों के हाथों अंधे विद्यार्थियों को उपहार भी दिए गए।
कार्यक्रम में भंते डॉ. राहुल बोधी महाथेरो, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर महापरिनिर्वाण दिवस समन्वय समिति के सचिव नागसेन कांबले और दादर चैत्यभूमि स्मारक समिति के प्रतिनिधि उपस्थित थे। सभी मान्यवरों की उपस्थिति में त्रिशरण बुद्धवंदना का आयोजन किया गया। इसके बाद पुष्पहार अर्पित कर भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को श्रद्धांजलि दी गई। हेलिकॉप्टर से चैत्यभूमि पर पुष्पवृष्टि की गई।
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भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के समाज परिवर्तन के सपने को साकार करने के लिए सभी को प्रयास करना चाहिए
भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के समाज परिवर्तन के
सपने को साकार करने के लिए सभी को प्रयास करना चाहिए
- राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन
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राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने चैत्यभूमि पर भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की
134वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की
मुंबई, 14 अप्रैल : भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की 134 वीं जयंती के अवसर पर राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन ने सभी से डॉ. आंबेडकर के समाज परिवर्तन और सामाजिक एवं आर्थिक समानता पर आधारित समाज के सपने को साकार करने के लिए प्रयास करने का आवाहन किया। वे चैत्यभूमि पर आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस मौके पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री अजित पवार, विधान परिषद के सभापति राम शिंदे, सामाजिक न्याय मंत्री संजय शिरसाट, सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशिष शेलार, मृद और जलसंवर्धन मंत्री संजय राठोड, मुख्य सचिव सुजाता सैनिक, मुंबई महानगरपालिका के आयुक्त भूषण गगराणी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
राज्यपाल राधाकृष्णन ने कहा, डॉ. बाबासाहेब को भारत के संविधान के शिल्पकार, महान समाज सुधारक और देशभक्त के रूप में सम्मानित किया जाता है। उन्होंने डॉ. आंबेडकर के लोकतंत्र, सामाजिक समानता और लिंग समानता के योगदान की सराहना की।
राज्यपाल महोदय ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, तब संविधान को अपना मार्गदर्शक माना था। उन्होंने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि इंदू मिल में बनने वाला डॉ. आंबेडकर स्मारक आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।
गुरु स्वतःसाठी न लढता समाजासाठी लढतो; हा आदर्श येणाऱ्या पिढ्यांपर्यंत पोहोचविणार
गुरु स्वतःसाठी न लढता समाजासाठी लढतो;
हा आदर्श येणाऱ्या पिढ्यांपर्यंत पोहोचविणार
- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
ठाणे, दि. 14 (जिमाका) : कोणताही गुरु स्वतःसाठी न लढता समाजासाठी लढतो, हा आदर्श त्यांनी आपल्यासमोर ठेवला आहे. हा आदर्श पुढच्या पिढीपर्यंत पोहोचविण्याचे काम आपल्याला करावयाचे आहे, असे प्रतिपादन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी गुरमत समागम कार्यक्रम, एनएमएमसी मैदान, गुरुद्वाराजवळ, नवी मुंबई येथे आयोजित कार्यक्रमात केले.
यावेळी वनमंत्री गणेश नाईक, आमदार मंदाताई म्हात्रे, प्रशांत ठाकूर, संजीव नाईक, नवी मुंबई महापालिकेचे आयुक्त कैलास शिंदे, मुख्यमंत्री वैद्यकीय सहायता पक्षाचे प्रमुख रामेश्वर नाईक आदी मान्यवर उपस्थित होते.
यावेळी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस म्हणाले की, गुरुमत समागम कार्यक्रमात गुरुजींचा आशीर्वाद घेण्यासाठी उपस्थित राहता आले, हे माझे सौभाग्य आहे. आपण सर्वजण गुरुजींचा आशीर्वाद घेतो. गुरु ग्रंथ साहेब यांच्या माध्यमातून जे विचार आपल्यापर्यंत पोहोचतात ते केवळ शीख समुदायाच्या कल्याणासाठी नसून समस्त मानव जातीच्या कल्याणासाठी आहेत, असे सांगून मुख्यमंत्री पुढे म्हणाले की, गुरुनानक देव साहेब यांनी जे विचार संपूर्ण देशांमध्ये पोहोचविले. त्यामुळे एक मोठा नानकपंथी समाज उभा राहिला, गुरुनानक देव साहेब यांनी जे विचार आपल्यासमोर ठेवले त्या विचारांवर चालण्याचे काम आपल्याला करावयाचे आहे.
आपल्या गुरूंनी नुसते विचार दिले नसून लढण्याची हिंमत व ताकद पण आपल्याला दिली आहे. गुरु तेग बहादूर सिंग यांच्या शहादतचा 350 वे पर्व सुरू आहे. त्यांना आजही "हिंद की चादर" असे संबोधले जाते. त्यांनी काश्मिरी पंडितांची जुलुमातून सुटका करण्यासाठी लढा दिला. गुरुगोविंद सिंग यांनी हा वारसा पुढे चालविला.
श्री. फडणवीस म्हणाले की, गुरु पुरव पर्वात महाराष्ट्र सरकार सामील होईल. शासनाच्या माध्यमातून विविध कार्यक्रमांचे आयोजन करण्यात येणार आहे. गुरूंची गाथा जनसामान्य माणसांपर्यंत पोहोचविण्यात येणार आहे. पंजाब साहित्य अकॅडमीची पुनर्निर्मिती करण्यात आली आहे. या माध्यमातून त्यांचे विचार जनसामान्य माणसांपर्यंत पोहोचविण्यास मदत होईल. अकरा लोकांची कमिटी स्थापन करण्यात आली असून या कमिटीच्या माध्यमातून संवाद साधला जातो. समाजासाठी आवश्यक बाबींची माहिती या कमिटीच्या मार्फत शासनास कळविली जाते. निर्वासित लोक, प्रार्थना स्थळे यांना जागा देण्यात येणार आहे. शिक्षण क्षेत्रात काम करणाऱ्या संस्थांना शासनाकडून मदत करण्यात येणार आहे.
यावेळी आयोजक आणि उपस्थित मान्यवरांच्या हस्ते मुख्यमंत्री महोदयांचा विशेष सत्कारही करण्यात आला.
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