उन्होंने कहा कि एआय की एक बड़ी सीमा भारतीय भाषाओं की समझ है। तकनीकी प्रगति के बावजूद एआय अभी भी मराठी सहित भारतीय भाषाओं के संदर्भ को पूरी तरह नहीं समझ पाता। अधिकांश बड़े भाषा मॉडल विकिपीडिया और रेडिट जैसे पश्चिमी स्रोतों पर आधारित हैं, जहां भारतीय अनुभव, संस्कृति और भाषाओं से जुड़ा डेटा अपेक्षाकृत कम है। इसलिए भारतीय भाषाओं के लिए स्वतंत्र एआय विकास और डेटा सार्वभौमत्व अत्यंत आवश्यक है।
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