एआय की मदद से अब रियल-टाइम कंटेंट, इन्फोग्राफिक्स और वीडियो भी तैयार किए जा रहे हैं। इससे समाचार लगातार बदलते और गतिशील रूप में उपलब्ध हो रहे हैं। जानकारी का प्रवाह अत्यंत तेज हो गया है। आज एआय के कारण एक व्यक्ति प्रतिदिन 20-30 लेख तैयार कर सकता है। हालांकि जानकारी की मात्रा बढ़ने के साथ उसकी विश्वसनीयता का प्रश्न भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है।
उन्होंने कहा कि एआय की एक बड़ी सीमा भारतीय भाषाओं की समझ है। तकनीकी प्रगति के बावजूद एआय अभी भी मराठी सहित भारतीय भाषाओं के संदर्भ को पूरी तरह नहीं समझ पाता। अधिकांश बड़े भाषा मॉडल विकिपीडिया और रेडिट जैसे पश्चिमी स्रोतों पर आधारित हैं, जहां भारतीय अनुभव, संस्कृति और भाषाओं से जुड़ा डेटा अपेक्षाकृत कम है। इसलिए भारतीय भाषाओं के लिए स्वतंत्र एआय विकास और डेटा सार्वभौमत्व अत्यंत आवश्यक है।
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