सूचना एवं जनसंपर्क महासंचालनालय में एआय का उपयोग
उन्होंने बताया कि एआय के कारण डीप-फेक जैसे खतरों की संभावना भी बढ़ रही है। नकली वीडियो बनाना आसान हो गया है, जबकि कभी-कभी असली वीडियो को भी डीप-फेक बताया जाता है। इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए सूचना एवं जनसंपर्क महासंचालनालय ने एआय आधारित फैक्ट-चेक प्रणाली शुरू की है, जिससे संदिग्ध वीडियो या जानकारी की जांच कर उसकी सत्यता का पता लगाया जा सकेगा।
उन्होंने “प्रोवेनेन्स तकनीक” का भी उल्लेख किया, जिसमें फोटो या वीडियो में डिजिटल हस्ताक्षर जोड़े जाते हैं, जिससे मूल सामग्री में बदलाव का पता लगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत में भी इस तकनीक को अपनाने की आवश्यकता है।
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