Monday, 11 August 2025

छह वर्षों में दिशा अभियान का 453 स्कूलों में क्रियान्वयन हो चुका है, 2,673 विशेष शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है और 18,431 विद्यार्थियों को इस अभियान का

 सन 2019 में सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग और जय वकील फाउंडेशन के बीच एक सामंजस्य करार हुआ। इसके तहत महाराष्ट्र के सभी सरकारी अनुदानित और बिना अनुदानित विशेष पहचानपत्र स्कूलों में इस पाठ्यक्रम को लागू करना शुरू हुआ। छह वर्षों में दिशा अभियान का 453 स्कूलों में क्रियान्वयन हो चुका है, 2,673 विशेष शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है और 18,431 विद्यार्थियों को इस अभियान का सीधा लाभ मिला है। महाराष्ट्र के 36 जिलों में यह अभियान पहुंच चुका है। इस उपलब्धि से बौद्धिक अक्षमता वाले बच्चों के लिए राज्यव्यापी पाठ्यक्रम वाला महाराष्ट्र देश का पहला और एकमात्र राज्य बन गया है। सन 2025-2028 तक इस सामंजस्य करार को बढ़ा दिया गया है।

मुख्यमंत्री श्री फडणवीस ने कहा कि पिछले छह वर्षों में कोविड काल के दौरान ऑनलाइन शिक्षा से लेकर पुनः स्कूलों में प्रत्यक्ष क्रियान्वयन तक दिशा अभियान ने निरंतरता बनाए रखी है। सन 2023-24 में मुंबई महानगरपालिका के स्कूलों को शामिल किया गया और 2024 में भागीदार स्कूल’ की संकल्पना शुरू की गई। इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है और NIEPID, SNDT, BMC तथा विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाएं साझेदार बनी हैं। एच. टी. पारेख फाउंडेशन और बजाज फिन्सर्व CSR के सहयोग से इस अभियान का प्रभाव बढ़ा है और महाराष्ट्र का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी मार्गदर्शक बन रहा है।

 

‘दिशा अभियान’ का सफल क्रियान्वयन महाराष्ट्र अभियान में देश में अग्रणी, विशेष बच्चों की शिक्षा में नया आदर्श

 मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की संकल्पना से दिशा अभियान’ का सफल क्रियान्वयन

महाराष्ट्र अभियान में देश में अग्रणीविशेष बच्चों की शिक्षा में नया आदर्श

 

मुंबईदिनांक 10 : बौद्धिक अक्षमता वाले विद्यार्थियों के लिए समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा दिखाने वाला दिशा अभियान’ महाराष्ट्र में सफलतापूर्वक लागू किया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की दूरदर्शी संकल्पना से आकार लेने वाले दिशा अभियान’ ने बौद्धिक अक्षमता वाले विद्यार्थियों की शिक्षा में अभूतपूर्व बदलाव लाया है। महाराष्ट्र में इस पहल के अत्यंत प्रभावी और सफल क्रियान्वयन से पूरे देश के लिए एक आदर्श स्थापित किया गया है। जय वकील फाउंडेशन द्वारा विकसित और नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर द एम्पावरमेंट ऑफ पर्सन्स विथ इंटेलेक्चुअल डिसएबिलिटीज (NIEPID) द्वारा मान्यता प्राप्त यह अभिनव पाठ्यक्रम राज्य के 453 विशेष विद्यालयों में लागू किया गया हैइसकी जानकारी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दी।

मुख्यमंत्री श्री फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्रदिव्यांगों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देने वाला देश का पहला राज्य है। दिव्यांगों के लिए स्वतंत्र विभाग शुरू करने वाला भी महाराष्ट्र पहला राज्य है और दिशा अभियान की वजह से विशेष विद्यार्थियों को समान अवसर देने वाली गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संभव हुई है। यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047’ के समावेशी और स्वावलंबी समाज के दृष्टिकोण के अनुरूप है। सन 1944 में स्थापित जय वकील फाउंडेशन ने अपने 80 वर्षों के अनुभव पर आधारितशोध-आधारित और सार्वभौमिक पद्धतियों पर आधारित पाठ्यक्रम विकसित किया है। यह पाठ्यक्रम NIEPID (दिव्यांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण के लिए राष्ट्रीय संस्था) से प्रमाणित है।

महाराष्ट्रातील ३६ जिल्ह्यांमध्ये हे अभियान पोहोचले आहे. या कामगिरीमुळे बौद्धिक अक्षमता असलेल्या मुलांसाठी अभियान

 सन २०१९ मध्ये सामाजिक न्याय व विशेष सहाय्य विभाग आणि जय वकील फाउंडेशन यांच्यात सामंजस्य करार झाला. त्यामुळे महाराष्ट्रातील सर्व शासकीय अनुदानित व विनाअनुदानित विशेष ओळखपत्र शाळांमध्ये हा अभ्यासक्रम राबविण्यास सुरुवात झाली. सहा वर्षांत दिशा अभियानाची ४५३ शाळांमध्ये अंमलबजावणी झाली असून २,६७३ विशेष शिक्षकांना प्रशिक्षण देण्यात आले असून या अभियानाचा लाभ १८,४३१ विद्यार्थ्यांना थेट लाभ मिळाला आहे.

महाराष्ट्रातील ३६ जिल्ह्यांमध्ये हे अभियान पोहोचले आहे. या कामगिरीमुळे बौद्धिक अक्षमता असलेल्या मुलांसाठी राज्यव्यापी अभ्यासक्रम असलेले महाराष्ट्र हे देशातील पहिले आणि एकमेव राज्य ठरले आहे. सन २०२५-२०२८ पर्यंत हा सामंजस्य करार वाढविण्यात आला आहे.

मुख्यमंत्री श्री. फडणवीस म्हणालेगेल्या सहा वर्षांत कोविड काळातील ऑनलाइन शिक्षणापासून ते पुन्हा शाळांमधील प्रत्यक्ष अंमलबजावणीपर्यंत दिशा अभियानाने सातत्य राखले आहे. सन २०२३-२४ मध्ये मुंबई महानगरपालिकेच्या शाळांचा समावेश तर २०२४ मध्ये भागीदार शाळा’ संकल्पना सुरू करण्यात आली. या उपक्रमाला राष्ट्रीय स्तरावर ओळख मिळाली असून NIEPID, SNDT, BMC तसेच विविध स्वयंसेवी संस्था भागीदारीत आल्या आहेत. एच. टी. पारेख फाऊंडेशन आणि बजाज फिन्सर्व्ह सीएसआरच्या सहकार्यामुळे या अभियानाचा प्रभाव वाढला असूनमहाराष्ट्राचे हे मॉडेल इतर राज्यांसाठीही मार्गदर्शक ठरत आहे.

महाराष्ट्र अभियानात देशात अग्रस्थानी विशेष मुलांच्या शिक्षणात नवा आदर्श

 मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांच्या संकल्पनेतून दिशा अभियानची यशस्वी अंमलबजावणी

महाराष्ट्र अभियानात देशात अग्रस्थानी विशेष मुलांच्या शिक्षणात नवा आदर्श

 

मुंबईदि. १० : बौद्धिक अक्षमता असलेल्या विद्यार्थ्यांसाठी एकसमान आणि गुणवत्तापूर्ण शिक्षणाची दिशा दाखवणारे दिशा अभियान’ महाराष्ट्रात यशस्वीपणे राबविण्यात आले असून मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांच्या दूरदृष्टीपूर्ण संकल्पनेतून आकाराला आलेल्या दिशा अभियानने बौद्धिक अक्षमता असलेल्या विद्यार्थ्यांच्या शिक्षणात अभूतपूर्व बदल घडवून आणला आहे. महाराष्ट्रात या उपक्रमाची अत्यंत प्रभावी आणि यशस्वी अंमलबजावणीमुळे संपूर्ण देशासाठी आदर्श घालून दिला आहे. जय वकील फाउंडेशनने विकसित केलेला आणि नॅशनल इन्स्टिट्यूट फॉर दि एम्पॉवरमेंट ऑफ पर्सन्स विथ इंटेलेक्च्युअल डिसॅबिलिटीज (NIEPID) मान्यताप्राप्त हा नाविन्यपूर्ण अभ्यासक्रम राज्यातील ४५३ विशेष शाळांमध्ये लागू झाला असल्याची माहिती मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस यांनी दिली.

मुख्यमंत्री श्री. फडणवीस म्हणालेमहाराष्ट्र हे दिव्यांगाच्या गरजांना प्राधान्य देणारे देशातील पहिले राज्य आहे. दिव्यांगांसाठी स्वतंत्र विभाग सुरू करणारे ही महाराष्ट्र पहिले राज्य असून दिशा अभियानामुळे विशेष विद्यार्थ्यांना समान संधी देणारे गुणवत्तापूर्ण शिक्षण शक्य झाले आहे. हा उपक्रम विकसित भारत २०४७’ या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यांच्या समावेशक व स्वावलंबी समाजाच्या दृष्टिकोनाशी सुसंगत आहे. सन १९४४ मध्ये स्थापन झालेल्या जय वकील फाउंडेशनने आपल्या ८० वर्षांच्या अनुभवावर आधारितसंशोधनाधारित आणि सार्वत्रिक पद्धतींवर आधारित अभ्यासक्रम विकसित केला. हा अभ्यासक्रम NIEPID (अपंग व्यक्तींच्या सक्षमीकरणासाठी राष्ट्रीय संस्था) कडून प्रमाणित आहे.

अहिल्यानगर-पुणे रेल मार्ग के लिए प्रयास –

 अहिल्यानगर-पुणे रेल मार्ग के लिए प्रयास – मुख्यमंत्री

इस कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहाविदर्भ से पुणे जाने वालों की संख्या बड़ी है और वर्तमान में यात्रियों को महंगा टिकट लेकर निजी गाड़ियों से यात्रा करनी पड़ती हैसाथ ही इसमें अधिक समय भी लगता है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने रेल मंत्री से नागपुर-पुणे रेल गाड़ी शुरू करने का अनुरोध किया थाजिसके सकारात्मक प्रतिसाद से यह सेवा शुरू हुई। नागपुर-पुणे वंदे भारत एक्सप्रेस देश की सभी वंदे भारत एक्सप्रेस गाड़ियों में सबसे लंबी दूरी तय करने वाली गाड़ी है। वर्तमान में अहिल्यानगर-दौंड मार्ग से पुणे जाने वाली गाड़ी को 100 से 125 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है। इसका समाधान करने के लिए रेल मंत्रालय को सुझाव दिया गया है कि नगर से पुणे के बीच सीधा मार्ग बनाया जाएजिससे यात्रा की दूरी और समय दोनों कम होंगे। आने वाले समय में इस पर योजना बनाई जाएगी। छत्रपति संभाजीनगरअहिल्यानगर और पुणे यह औद्योगिक पट्टी है और यहां का विकास करना है तो रेलवे के नए मार्ग बनाना आवश्यक है। इसके अनुसार छत्रपति संभाजीनगर से पुणे नया एक्सप्रेस-वे बनाया जाएगा और उसके 'राइट ऑफ वेमें इस रेल मार्ग का विचार किया जाए तो यात्रा की दूरी और भी कम की जा सकती हैऐसा उन्होंने कहा।

नागपुर-पुणे वंदे भारत एक्सप्रेस का प्रधानमंत्री के हाथों शुभारंभ नगर-पुणे रेल मार्ग के लिए प्रयास

 नागपुर-पुणे वंदे भारत एक्सप्रेस का प्रधानमंत्री के हाथों शुभारंभ

नगर-पुणे रेल मार्ग के लिए प्रयास – मुख्यमंत्री

 

नागपुरदिनांक 10: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज दूरदृश्य संवाद प्रणाली के माध्यम से नागपुर-पुणे वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर शुभारंभ किया। इस अवसर पर यहां के मध्यवर्ती रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक आठ पर आयोजित कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

विधायक मोहन मतेकृष्णा खोपड़ेप्रवीण दटकेमध्य रेलवे के महाप्रबंधक धर्मवीर मीणामंडल रेल प्रबंधक विनायक गर्ग सहित मध्य रेलवे के अधिकारी इस अवसर पर उपस्थित थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूरदृश्य संवाद प्रणाली से आज नागपुर (अजनी)-पुणे गाड़ी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसी कार्यक्रम में बेंगलुरु-बेलगावी और कटरा-अमृतसर वंदे भारत एक्सप्रेस गाड़ियों का भी उनके हाथों शुभारंभ किया गया।

            नागपुर (अजनी)-पुणे वंदे भारत एक्सप्रेस के माध्यम से नागपुर से पुणे की दूरी लगभग बारह घंटे में तय करना संभव होगाजिससे पहले लगने वाला अधिक यात्रा समय बचेगा। अजनी-पुणे वंदे भारत एक्सप्रेस गाड़ी नागपुर से पुणे की यात्रा के दौरान वर्धाबडनेराअकोलाभुसावलजळगांवमनमाडकोपरगांवअहिल्यानगर और दौंड स्टेशनों पर रुकते हुए दौंड कॉर्डलाइन मार्ग से पुणे पहुंचेगी।

इस अवसर पर रेलवे स्टेशन परिसर को फूलमालाओंतोरणपताकाओं और फूलों से सजाया गया था। मुख्यमंत्री और अन्य उपस्थित अधिकारियों ने यात्रियों को शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में विद्यार्थीयात्री और नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

देश के रेल मार्गों का विकास यानी विकसित भारत को आधुनिक और गतिमान यात्रा सुविधाओं का तोहफा है। इस वंदे भारत एक्सप्रेस से पश्चिम महाराष्ट्र और विदर्भ के धार्मिक स्थलों तक की यात्रा अब आसान और तेज़ होगी। इस सुविधा से स्थानीय लोगों को व्यापारपर्यटन और रोजगार के अवसर बड़ी मात्रा में उपलब्ध होंगे।

अहिल्यानगर-पुणे रेल्वे मार्गासाठी प्रयत्न -मुख्यमंत्री

 अहिल्यानगर-पुणे रेल्वे मार्गासाठी प्रयत्न -मुख्यमंत्री

या कार्यक्रमानंतर प्रसार माध्यमांशी वार्तालाप करताना मुख्यमंत्री म्हणालेविदर्भातून पुण्याला जाणाऱ्यांची संख्या मोठी असून सद्यस्थितीत प्रवाशांना महागडे तिकीट काढून खासगी गाड्यांनी प्रवास करावा लागतो. शिवाय या प्रवासाला वेळही अधिक लागतो. या बाबींचा विचार करून राज्य सरकारने रेल्वे मंत्र्यांना नागपूर-पुणे रेल्वे गाड़ी सुरू करण्याबाबत विनंती केली असता त्यांच्या सकारात्मक प्रतिसादातून ही सेवा सुरू झाली. नागपूर-पुणे वंदे भारत एक्सप्रेस ही गाडी देशातील सर्व वंदे भारत एक्सप्रेस गाड्यांमध्ये सर्वाधिक अंतर पार करणारी गाडी आहे. सध्या नगर-दौंड मार्गे पुणे येथे जाणाऱ्या गाडीला शंभर ते सव्वाशे किलोमीटरचा फेरा पडतो. त्यावर उपाय म्हणून रेल्वे मंत्रालयाला असे सुचवण्यात आले आहे कीनगर ते पुणे असा थेट मार्ग तयार करण्यात आला तर प्रवासाचे अंतर कमी होईल व वेळही वाचेल. पुढील काळात याबाबत नियोजन करण्यात येईल. छत्रपती संभाजीनगरअहिल्यानगर व पुणे हा औद्योगिक पट्टा असून येथील विकास साधायचा तर रेल्वेचे नवीन मार्ग निर्माण करणे गरजेचे आहे. त्यानुसार छत्रपती संभाजीनगर ते पुणे नवीन एक्सप्रेस वे निर्माण करण्यात येणार असून त्याच्या 'राईट ऑफ वे'मध्ये या रेल्वे मार्गाचा विचार केल्यास प्रवासाचे अंतर अधिक कमी करता येणे शक्य आहेअसे त्यांनी सांगितले.

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