सन 2019 में सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग और जय वकील फाउंडेशन के बीच एक सामंजस्य करार हुआ। इसके तहत महाराष्ट्र के सभी सरकारी अनुदानित और बिना अनुदानित विशेष पहचानपत्र स्कूलों में इस पाठ्यक्रम को लागू करना शुरू हुआ। छह वर्षों में दिशा अभियान का 453 स्कूलों में क्रियान्वयन हो चुका है, 2,673 विशेष शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया है और 18,431 विद्यार्थियों को इस अभियान का सीधा लाभ मिला है। महाराष्ट्र के 36 जिलों में यह अभियान पहुंच चुका है। इस उपलब्धि से बौद्धिक अक्षमता वाले बच्चों के लिए राज्यव्यापी पाठ्यक्रम वाला महाराष्ट्र देश का पहला और एकमात्र राज्य बन गया है। सन 2025-2028 तक इस सामंजस्य करार को बढ़ा दिया गया है।
मुख्यमंत्री श्री फडणवीस ने कहा कि पिछले छह वर्षों में कोविड काल के दौरान ऑनलाइन शिक्षा से लेकर पुनः स्कूलों में प्रत्यक्ष क्रियान्वयन तक दिशा अभियान ने निरंतरता बनाए रखी है। सन 2023-24 में मुंबई महानगरपालिका के स्कूलों को शामिल किया गया और 2024 में ‘भागीदार स्कूल’ की संकल्पना शुरू की गई। इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है और NIEPID, SNDT, BMC तथा विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाएं साझेदार बनी हैं। एच. टी. पारेख फाउंडेशन और बजाज फिन्सर्व CSR के सहयोग से इस अभियान का प्रभाव बढ़ा है और महाराष्ट्र का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी मार्गदर्शक बन रहा है।
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