Thursday, 30 November 2023

सभी पालक मंत्री बेमौसम प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे

 सभी पालक मंत्री बेमौसम प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे


सभी जिलों के पंचनामों के प्रस्ताव एक साथ प्रस्तुत करें


किसानों को मुआवजा दिया जाएगा- मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे


राज्य कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री का


प्रशासन को युद्धस्तर पर काम करने का निर्देश


            मुंबई, दि. 29: पिछले दो दिनों में राज्य के कुछ जिलों में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से कृषि तथा फलों की फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। लगभग 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है। किसानों को बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा और 3 हेक्टेयर तक का मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए राजस्व, कृषि विभाग तत्काल कालबद्ध तरीके से एक साथ सभी जिलों के पंचनामे पूरा करें, ऐसा निर्देश मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने आज राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में दिया। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने भी निर्देश दिए कि प्रशासन इस संबंध में युद्धस्तर पर काम करे। 


            आज मदद व पुनर्वास के साथ कृषि विभाग ने राज्य में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि को लेकर प्रेजेंटेशन दिया। प्रचलित कार्य पद्धति के अनुसार तत्काल पंचनामा करने का आदेश सभी जिलाधिकारी सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को दें और 33 प्रतिशत से ज्यादा खेती का नुकसान होने के मामले में निधि की मांग संबंधी प्रस्ताव शीघ्र सरकार के पास भेजने की व्यवस्था करें। इस तरह का औपचारिक निर्देश राजस्व व वन (आपत्ति प्रबंधन) विभाग द्वारा कल ही सभी जिलाधिकारियों के दिए जाने की बात पर मंत्रिमंडल ने गौर किया। राज्य के प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द मदद उपलब्ध कराने के लिए निधि मांग का प्रस्ताव सभी जिलाधिकारियों से प्राप्त करके निधि आवंटित करने के एकत्रित प्रस्ताव पर विभाग द्वारा तत्काल निर्णय लेने का निर्देश इस अवसर पर मंत्रिमंडल ने दिया।


            ठाणे जिले की शाहपुर, मुरबाड तहसील प्रभावित हुई हैं और 53 हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जियों को नुकसान पहुंचा है। पालघर जिले के पालघर, वसई और दहाणू तहसील में 41 हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जियों को नुकसान पहुंचा है, नासिक जिले के कलवन, नांदगांव, नासिक, निफाड, त्र्यंबकेश्वर, सटाणा, दिंडोरी, पेठ, सुरगाणा, इगतपुरी, सिन्नर, चांदवड, येवला तहसील में 32 हजार 833 हेक्टेयर क्षेत्र में प्याज, अंगूर, सोयाबीन, मक्का, गेहूं, गन्ना और फलों की फसलें, धुले जिले की साक्री, शिरपुर, शिंदेखेडा तहसील में 46 हेक्टेयर क्षेत्र में केला, पपीता, कपास, चना, नंदुरबार जिले में नवापुर, अक्कलकुवा, नंदुरबार, शहादा, तलोदा, अक्राणी तहसील में 2 हजार 239 हेक्टेयर क्षेत्र में चावल, कपास, अरहर, मिर्च, मक्का, प्याज की फसल, जलगांव जिले की जलगांव, भुसावल, यावल, रावेर, मुक्ताईनगर, अमलनेर, चोपडा, एरंडल, पारोला, चालीसगांव, जामनेर, पाचोरा, धरणगांव, बोदवड, भडगांव, तहसील के 552 हेक्टेयर क्षेत्र में प्याज, चना, गेहूं, मक्का, ज्वार और फलों की फसलें को नुकसान पहुंचा है।


            अहमदनगर जिले के संगमनेर, अकोले, कोपरगांव, पारनेर, राहाता में 15 हजार 307 हेक्टेयर क्षेत्र में केला, पपीता, मक्का की फसल को नुकसान हुआ है। पुणे जिले की खेड़, आंबेगांव, शिरूर तहसील में 3 हजार 500 हेक्टेयर क्षेत्र में अंगूर और प्याज की फसल को नुकसान हुआ है, सातारा जिले की जावली तहसील में 15 हेक्टेयर क्षेत्र में चावल की फसल को नुकसान पहुंचा है। छत्रपति संभाजीनगर जिले की पैठन, गंगापुर, वैजापुर, कन्नड़, खुलताबाद, सिल्लोड, सोयगांव, और फुलंब्री तहसील में 4 हजार 200 हेक्टेयर क्षेत्र में केले, पपीता और मक्के की फसल को नुकसान हुआ है।


            जालना जिले की बदनापुर, जालना, जाफराबाद तहसील में 5 हजार 279 हेक्टेयर क्षेत्र में अंगूर, केला, प्याज, खरीफ ज्वार, गेहूं और चना की फसल को नुकसान हुआ है। बीड जिले की परली, बीड तहसील में 215 हेक्टेयर क्षेत्र में प्याज, ज्वार, सब्जियों को नुकसान पहुंचा है, हिंगोली जिले की वसमत तहसील में 100 हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जियों को नुकसान पहुंचा है। परभणी जिले की परभणी, गंगाखेड, जिंतूर, पाथरी, पूर्णा, पालम, मानवत, सोनपेठ, सेलू तहसील में 1 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में रबी ज्वार, कपास, सीताफल, अमरूद, सब्जियों का नुकसान हुआ है, नांदेड़ जिले की नांदेड़ और मुदखेड़ तहसील में 50 हेक्टेयर क्षेत्र में केले की फसल खराब हो गई है। बुलढाणा जिले के बुलडाना, नांदुरा, लोनार, सिंदखेड़ाराजा, देउलगांव राजा, संग्रामपुर, मेहकर, जलगांव जामोद, मलकापुर, खामगांव, शेगांव, मोताला, नांदुरा तहसील में 33 हजार 951 हेक्टेयर क्षेत्र में सब्जियों को नुकसान पहुंचा है।


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Guardian Ministers of all affected regions will visit areas hit by untimely rains


All districts should collectively present their assessment reports


Farmers will be compensated for their losses - Chief Minister Eknath Shinde


At the state cabinet meeting, the Chief Minister and Deputy Chief Ministers instructed the administration to work at a war level.


            Mumbai, Nov 29: In the last two days, several districts in the state have suffered extensive damage to agriculture and fruit crops due to untimely rains and hailstorms, affecting about 1 lakh hectares of land. Farmers will not be left stranded and will receive compensation for up to 3 hectares, for which the Revenue and Agriculture Departments should urgently complete all districts' (panchnama) assessments in a time-bound manner, as directed today by Chief Minister Eknath Shinde at the state cabinet meeting. Deputy Chief Ministers Devendra Fadnavis and Ajit Pawar also instructed the administration to work at a war level in this regard.


            Today, the Relief and Rehabilitation and Agriculture Departments presented the situation of untimely rains and hailstorms in the state. All District Collectors must urgently conduct assessments as per existing procedures and should arrange to send proposals for funding requests to the government in cases where more than 33% of crops are damaged, as formally directed by the Revenue and Forest (Disaster Management) Department yesterday, which was noted by the cabinet. Proposals for funding requests from all District Collectors are being collected to distribute funds to the affected farmers as soon as possible, as directed by the cabinet this time.


            In Thane district, Shahapur and Murbad talukas are affected, with 53 hectares of vegetable crops damaged. In Palghar district, Palghar, Vasai, and Dahanu talukas have 41 hectares of vegetable crops damaged. In Nashik district, Kalwan, Nandgaon, Nashik, Niphad, Trimbakeshwar, Satana, Dindori, Peth, Surgana, Igatpuri, Sinnar, Chandwad, and Yeola talukas have 32,833 hectares of onion, grape, soyabean, corn, wheat, sugarcane, and fruit crops damaged. In Dhule district, Sakri, Shirpur, and Shindkheda talukas have 46 hectares of banana, papaya, cotton, and chickpea crops damaged. In Nandurbar district, Navapur, Akkalkuwa, Nandurbar, Shahada, Taloda, and Akrani talukas have 2,239 hectares of rice, cotton, pigeon pea, chili, corn, and onion crops damaged. In Jalgaon district, Jalgaon, Bhusawal, Yawal, Raver, Muktainagar, Amalner, Chopda, Erandol, Parola, Chalisgaon, Jamner, Pachora, Dharangaon, Bodwad, and Bhadgaon talukas have 552 hectares of onion, chickpea, wheat, corn, sorghum, and fruit crops damaged.


            In Ahmednagar district, Sangamner, Akole, Kopargaon, Parner, and Rahata talukas have 15,307 hectares of banana, papaya, and corn crops damaged. In the Pune district, Khed, Ambegaon, and Shirur talukas have 3,500 hectares of grape and onion crops damaged. In Satara district, Jawali taluka has 15 hectares of rice crops damaged. In Chhatrapati Sambhajinagar district, Sambhajinagar, Paithan, Gangapur, Vaijapur, Kannad, Khultabad, Sillod, Soygaon, and Phulambri talukas have 4,200 hectares of banana, papaya, and corn crops damaged.


            In Jalna district, Badnapur, Jalna, and Jafrabad talukas have 5,279 hectares of grape, banana, onion, Kharif sorghum, wheat, and chickpea crops damaged. In Beed district, Parli, and Beed talukas have 215 hectares of onion, sorghum, and vegetable crops damaged. In Hingoli district, Vasmat taluka has 100 hectares of vegetable crops damaged.


            In Parbhani district, Parbhani, Gangakhed, Jintur, Pathri, Purna, Palam, Manvat, Sonpeth, and Selu talukas have 1,000 hectares of Rabi sorghum, cotton, custard apple, guava, and vegetable crops damaged. In Nanded district, Nanded and Mudkhed talukas have 50 hectares of banana crops damaged. In Buldhana district, Buldhana, Nandura, Lonar, Sindkhedraja, Deulgaon Raja, Sangrampur, Mehkar, Jalgaon Jamod, Malkapur, Khamgaon, Shegaon, Motala and Nandura talukas have 33951 hectares of vegetable crops damaged.



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Wednesday, 29 November 2023

अवकाळीग्रस्त भागाला सर्व पालकमंत्री भेट देणार सर्व जिल्ह्यांचे पंचनाम्यांचे प्रस्ताव एकत्रित सादर करावे शेतकऱ्यांना नुकसानभरपाई देणार-

 अवकाळीग्रस्त भागाला सर्व पालकमंत्री भेट देणार

सर्व जिल्ह्यांचे पंचनाम्यांचे प्रस्ताव एकत्रित सादर करावे

शेतकऱ्यांना नुकसानभरपाई देणार- मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे

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राज्य मंत्रिमंडळ बैठकीत मुख्यमंत्रीउपमुख्यमंत्र्यांचे

प्रशासनाला युद्धपातळीवर काम करण्याचे निर्देश

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            मुंबई, दि. 29 : गेल्या दोन दिवसांत राज्यातील काही जिल्ह्यांमध्ये अवकाळी पाऊस,गारपीट यामुळे शेती आणि फळ पिकांचे मोठ्या प्रमाणात नुकसान झाले असून सुमारे १ लाख हेक्टर क्षेत्र बाधित झाले आहे. आहे. शेतकऱ्यांना वाऱ्यावर सोडणार नसून ३ हेक्टरपर्यंत नुकसानभरपाई देण्यात येईलयासाठी महसूलकृषी विभागाने तातडीने कालबध्द रितीने एकत्रितरित्या सर्व जिल्ह्यांचे पंचनामे पूर्ण करावेत असे निर्देश आज मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे यांनी राज्य मंत्रिमंडळ बैठकीत दिले.  उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस उपमुख्यमंत्री अजित पवार यांनी देखील यासंदर्भात प्रशासनाने युद्ध स्तरावर काम करावे अशा सूचना दिल्या.

            आज मदत व पुनर्वसन तसेच कृषी विभागाने राज्यातील पडलेल्या अवकाळी पाऊस आणि गारपीट याबाबत सादरीकरण केले.  पंचनामे  प्रचलित कार्यपद्धतीप्रमाणे तातडीने करण्याचे आदेश सर्व जिल्हाधिकारी यांनी सर्व क्षेत्रीय यंत्रणांना द्यावेत व ३३ टक्क्यांपेक्षा जास्त शेती पिकांचे नुकसान झालेल्या प्रकरणी निधी मागणीचा प्रस्ताव तत्काळ शासनाकडे पाठविण्याची व्यवस्था करावीअसे औपचारिक निर्देश महसूल व वन (आपत्ती व्यवस्थापन) विभागाने सर्व जिल्हाधिकारी यांना कालच दिल्याची मंत्रिमंडळाने नोंद घेतली. राज्यातील बाधित शेतकऱ्यांना लवकरात लवकर मदत देण्याकरिता निधी मागणीचे प्रस्ताव सर्व जिल्हाधिकारी यांचेकडून प्राप्त करून घेऊन निधी वितरित करण्याचे एकत्रित प्रस्तावावर विभागाने तातडीने निर्णय घेण्याचे निर्देश मंत्रिमंडळाने यावेळी दिले.

            ठाणे जिल्ह्यातील शहापूरमुरबाड हे तालुके बाधित असून यातील ५३ हेक्टर क्षेत्रातील भाजीपाल्याचे नुकसान झाले आहे.पालघर जिल्ह्यातील पालघरवसई व डहाणू तालुक्यातील ४१ हेक्टर क्षेत्रातील भाजीपाल्याचे नुकसान झाले आहेनाशिक जिल्ह्यातील कळवणनांदगावनाशिकनिफाडत्र्यंबकेश्वरसटाणादिंडोरीपेठसुरगाणाइगतपुरीसिन्नरचांदवडयेवला तालुक्यातील  ३२ हजार ८३३ हेक्टर क्षेत्रातील कांदाद्राक्षसोयाबीनमकागहूऊस व फळपिकेधुळे जिल्ह्यातील साक्रीशिरपूरशिंदखेडा तालुक्यातील ४६ हेक्टर क्षेत्रातील केळीपपईकापूसहरभरानंदुरबार जिल्ह्यातील नवापूरअक्कलकुवानंदुरबारशहादातळोदाअक्राणी तालुक्यातील २ हजार २३९ हेक्टर क्षेत्रातील भातकापूसतूरमिरचीमकाकांदा पिकांचेजळगाव जिल्ह्यातील जळगावभुसावळयावलरावेरमुक्ताईनगरअमळनेरचोपडाएरंडोलपारोळाचाळीसगावजामनेरपाचोराधरणगावबोदवडभडगाव तालुक्यातील ५५२ हेक्टर क्षेत्रातील कांदाहरभरागहूमकाज्वारी व फळपिकांचे नुकसान झाले.

            अहमदनगर जिल्ह्यातील संगमनेरअकोलेकोपरगावपारनेरराहाता येथील १५ हजार ३०७ हेक्टर क्षेत्रातील केळीपपईमक्याचे नुकसान झाले आहे. पुणे जिल्ह्यातील खेडआंबेगावशिरुर तालुक्यातील ३ हजार ५०० हेक्टर क्षेत्रातील द्राक्षकांदा पिकांचे नुकसान झाले आहेसातारा जिल्ह्यातील जावळी तालुक्यातील १५ हेक्टर क्षेत्रातील भात पिकाचे नुकसान झाले आहे.छत्रपती संभाजीनगर जिल्ह्यातील संभाजीनगरपैठणगंगापूरवैजापूरकन्नडखुलताबादसिल्लोडसोयगाव आणि फुलंब्री तालुक्यातील ४ हजार २०० हेक्टर क्षेत्रातील  केळीपपई व मका पिकांचे नुकसान झाले आहे,

            जालना जिल्ह्यातील बदनापूरजालनाजाफराबाद तालुक्यातील ५ हजार २७९ हेक्टर क्षेत्रातील द्राक्षकेळीकांदाखरीप ज्वारीगहू व हरभरा पिकांचे नुकसान झाले आहे. बीड जिल्ह्यातील परळीबीड तालुक्यातील २१५ हेक्टर क्षेत्रातील कांदाज्वारीभाजीपाल्याचे नुकसान झाले आहेहिंगोली जिल्ह्यातील वसमत तालुक्यातील १०० हेक्टर क्षेत्रातील भाजीपाल्याचे नुकसान झाले आहे. परभणी जिल्ह्यातील परभणीगंगाखेडजिंतूरपाथरीपूर्णापालम, मानवत, सोनपेठसेलू तालुक्यातील १ हजार हेक्टर क्षेत्रातील रब्बी ज्वारीकापूससीताफळपेरूभाजीपाला या पिकांचे नुकसान झाले आहेनांदेड जिल्ह्यातील नांदेडमुदखेड तालुक्यातील ५० हेक्टर क्षेत्रातील केळी पिकाचे नुकसान झाले आहेबुलढाणा जिल्ह्यातील बुलडाणानांदुरालोणारसिंदखेडराजादेऊळगाव राजासंग्रामपूरमेहकरजळगाव जामोदमलकापूरखामगावशेगावमोताळानांदुरा तालुक्यातील ३३ हजार ९५१ हेक्टर क्षेत्रातील भाजीपालाचे नुकसान झाले आहे.

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लातूर, धाराशीव जिल्ह्यातील भूकंपग्रस्तांच्या समस्या सोडवण्यास प्राधान्य द्यावे

 लातूरधाराशीव जिल्ह्यातील भूकंपग्रस्तांच्या

समस्या सोडवण्यास प्राधान्य द्यावे

- विधान परिषद उपसभापती डॉ. नीलम गोऱ्हे

            मुंबईदि. 29 :- लातूरधाराशीव जिल्ह्यातील भूकंपग्रस्तांच्या समस्या व प्रलंबित प्रश्न प्राधान्याने सोडवण्यासाठी संबधित विभागांनी प्राधान्य द्यावे. या  कामासाठी निश्चित कालमर्यादा आखून त्यानुसार कार्यवाही करावीअसे निर्देश विधान परिषदेच्या उपसभापती डॉ. नीलम गोऱ्हे यांनी आज दिले.

            लातूर आणि धाराशीव जिल्ह्यातील भूकंपग्रस्तांच्या समस्यांबाबत उपसभापती डॉ. गोऱ्हे यांच्या अध्यक्षतेखाली विधान भवनात बैठक झाली. बैठकीस आमदार अभिमन्यू  पवार, आमदार ज्ञानराज चौगुलेमदत व पुनर्वसन विभागाचे उप सचिव सत्यनारायण बजाजलातूरच्या जिल्हाधिकारी वर्षा ठाकूर-घुगेवन विभागाचे अवर सचिव गणेश जाधव यांच्यासह संबधित विभागाचे अधिकारी व लातूर आणि धाराशीव जिल्ह्यातील भूकंपग्रस्तांचे प्रतिनिधी उपस्थित होते.

              उपसभापती डॉ. गोऱ्हे म्हणाल्यासन १९९३ मध्ये किल्लारी येथे झालेल्या भूकंपाला तीस वर्षे पूर्ण झाली आहेत. अद्यापही भूकंपग्रस्तांचे काही प्रश्न प्रलंबित आहेत. हे प्रश्नसोडवण्यास जिल्हा प्रशासनाने व शासनाने गती देणे आवश्यक आहे. भूकंपग्रस्तांच्या पुनर्वसनसाठी ज्या शेतकऱ्यांच्या जमिनी संपादित केलेल्या आहेत, त्या शेतकऱ्यांना वाणिज्य वापरासाठी भूखंड वाटप करण्यापूर्वी प्रत्येक गावात किती भूखंड शिल्लक आहेत याची पडताळणी करून त्याबाबतचा प्रस्ताव संबधित जिल्ह्याच्या जिल्हाधिकाऱ्यांनी शासनास सादर करावा.

            जर त्याठिकाणी भूकंपाचा तीन स्केल पेक्षा  मोठा धक्का असेल, तर त्याभागातील लोकांना मदत आणि पुनर्वसन विभागामार्फत एनडीआरएफ च्या निकषांचा अभ्यास करून मदत दिली जावी असे निर्देश त्यांनी यावेळी दिले.

            अद्यापही जी मुले शिक्षणापासून वंचित आहेत त्यांच्यासाठी निश्चितच शासनाच्या माध्यमातून प्रयत्न केले जातील असे त्यांनी सांगितले.

            मालकी हक्काने वाटप केलेल्या दुकानांच्या हस्तातरणांबाबत ज्या पद्धतीने शासन निर्णय घेण्यात आला आहे त्याच पद्धतीने भूकंप बाधितांच्या घरांच्या हस्तातरणांबाबत निर्णय घेण्याबाबत कार्यवाही व्हावी. भूकंपग्रस्तांच्या पुनर्वसित वसाहतीमध्ये आवश्यक पायाभूत सुविधांसाठीचा प्रस्ताव सादर करावा. गढीबाधित भूकंपग्रस्तांना भूकंपग्रस्त प्रमाणपत्र देण्याबाबत शासनाच्या पुनर्वसन विभागाने कार्यवाही करावी,  ८  व्या व  ९ व्या फेरीत घरे वाटप,घरे पुनर्बांधणीपाणीपुरवठा योजना, विद्युत पंपास स्वतंत्र रोहित्र बसवणे यांचाही आवश्यक बाबींचा प्रस्ताव सादर करावाअसेही उपसभापती डॉ. गोऱ्हे यांनी बैठकीत सूचित केले.

            भूकंप बाधित गावांमध्ये अद्यापि भूकंपामुळे काय परिणाम जाणवत आहेत याबाबतचा अभ्यास करून त्यावर काय उपाययोजना करता येतील याचा अहवाल सादर करावा. तसेच या गावातील महिलांसाठी जिल्हा परिषदेमार्फत वेगळा उपक्रम सुरू करणेभूकंपग्रस्तांच्या वसाहतीमध्ये सुविधांसाठी सीएसआर (CSR) फंडातून निधी मिळणे बाबत प्रस्ताव सादर करण्याच्या सूचना त्यांनी बैठकीत दिल्या.

शेती महामंडळाच्या 502 एकरवर रोजगार निर्मितीस चालना मिळणार सावळीविहीर येथे नवीन एमआयडीसीस मंत्रिमंडळाची मान्यता

 शेती महामंडळाच्या 502 एकरवर रोजगार निर्मितीस चालना मिळणार


सावळीविहीर येथे नवीन एमआयडीसीस मंत्रिमंडळाची मान्यता


महसूल मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील यांची माहिती


 


            मुंबई, दि. २९ : सावळीविहीर (जि. अहमदनगर) येथे नवीन एमआयडीसी निर्माण करण्यास राज्य मंत्रिमंडळ बैठकीत मान्यता मिळाली आहे. त्यामुळे शेती महामंडळाच्या ५०२ एकर जमिनीवर रोजगार निर्मितीस चालना मिळणार असल्याची माहिती, महसूल मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील यांनी दिली.


            महाराष्ट्र राज्य शेती महामंडळाकडे असलेल्या सलग व समतल जमिनीचा सुयोग्य वापर करताना त्यावर औद्योगिक विकास क्षेत्र निर्मितीसह आणि रोजगार वाढीस चालना देण्याच्या दृष्टीने हा निर्णय घेण्यात आला आहे. त्यामुळे राहाता तालुक्यातील सावळीविहीर बु. व सावळीविहीर खु. तसेच कोपरगाव तालुक्यातील चांदेकसारे येथे शेती महामंडळाच्या ५०२ एकर जमिनीचा सुयोग्य वापर होणार आहे.


            नवीन एम.आय.डी.सी. उभारण्यासाठी प्रस्तावित करण्यात आलेले ठिकाण शिर्डी शहरापासून ५ किलोमीटर, समृद्ध महामार्गाच्या इंटरचेंजपासून केवळ ३ किलोमीटर व शिर्डी आंतरराष्ट्रीय विमानतळापासून १४ किलोमीटर अंतरावर आहे. रेल्वेमार्ग, रस्तेमार्ग तसेच हवाईमार्गाने देशभरातील सर्व प्रमुख शहरांना अत्यंत सुलभतेने जोडणारी औद्योगिक वसाहत म्हणून भविष्यात उद्योजकांकडून चांगला प्रतिसाद मिळेल. सहकार पंढरी म्हणून नावलौकीक असलेले प्रवरानगर, साईबाबांची पावनभूमी असलेली शिर्डी तीर्थक्षेत्र, याचबरोबर आता उद्योग नगरी म्हणून परिसराचा नावलौकीक होण्यास हातभार मिळणार आहे.

शेती महामंडळाच्या 502 एकरवर रोजगार निर्मितीस चालना मिळणार सावळीविहीर येथे नवीन एमआयडीसीस मंत्रिमंडळाची मान्यता

 शेती महामंडळाच्या 502 एकरवर रोजगार निर्मितीस चालना मिळणार

सावळीविहीर येथे नवीन एमआयडीसीस मंत्रिमंडळाची मान्यता

महसूल मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील यांची माहिती

 

            मुंबईदि. २९ : सावळीविहीर (जि. अहमदनगर) येथे नवीन एमआयडीसी निर्माण करण्यास राज्य मंत्रिमंडळ बैठकीत मान्यता मिळाली आहे. त्यामुळे शेती महामंडळाच्या ५०२ एकर जमिनीवर रोजगार निर्मितीस चालना मिळणार असल्याची माहिती, महसूल मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील यांनी दिली.

            महाराष्ट्र राज्य शेती महामंडळाकडे असलेल्या सलग व समतल जमिनीचा सुयोग्य वापर करताना त्यावर औद्योगिक विकास क्षेत्र निर्मितीसह आणि रोजगार वाढीस चालना देण्याच्या दृष्टीने हा निर्णय घेण्यात आला आहे. त्यामुळे राहाता तालुक्यातील सावळीविहीर बु. व सावळीविहीर खु. तसेच कोपरगाव तालुक्यातील चांदेकसारे येथे शेती महामंडळाच्या ५०२ एकर जमिनीचा सुयोग्य वापर होणार आहे.

            नवीन एम.आय.डी.सी. उभारण्यासाठी प्रस्तावित करण्यात आलेले ठिकाण शिर्डी शहरापासून ५ किलोमीटरसमृद्ध महामार्गाच्या इंटरचेंजपासून केवळ ३ किलोमीटर व शिर्डी आंतरराष्ट्रीय विमानतळापासून १४ किलोमीटर अंतरावर आहे. रेल्वेमार्गरस्तेमार्ग तसेच हवाईमार्गाने देशभरातील सर्व प्रमुख शहरांना अत्यंत सुलभतेने जोडणारी औद्योगिक वसाहत म्हणून भविष्यात उद्योजकांकडून चांगला प्रतिसाद मिळेल. सहकार पंढरी म्हणून नावलौकीक असलेले प्रवरानगरसाईबाबांची पावनभूमी असलेली शिर्डी तीर्थक्षेत्रयाचबरोबर आता उद्योग नगरी म्हणून परिसराचा नावलौकीक होण्यास हातभार मिळणार आहे.

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खंडकरी शेतकऱ्यांना राज्य सरकारचा दिलासा

 खंडकरी शेतकऱ्यांना राज्य सरकारचा दिलासा

- महसूल मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील

महाराष्ट्र राज्य शेती महामंडळाची जमीन वर्ग-2 मधून वर्ग-1 करण्यास,

सार्वजनिक प्रयोजनार्थ वापरण्यास मंत्रिमंडळाची मान्यता

 

            मुंबईदि. २९ : महाराष्ट्र राज्य शेती महामंडळाची जमीन वर्ग-२ मधून वर्ग-१ करण्यासतसेच सार्वजनिक प्रयोजनार्थ वापरण्यास मंत्रिमंडळाची मान्यता मिळाल्याची माहिती महसूल मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील यांनी दिली.

            महाराष्ट्र राज्य शेती महामंडळाच्या ताब्यातील जमिनी खंडकरी शेतकरी व त्यांच्या वारसांना भोगवटादार वर्ग-२ या धारणाधिकाराने वाटप करण्यात आलेल्या होत्या. ज्या खंडकरी शेतकऱ्यांनी वर्ग-१  च्या जमिनी खंडाने दिलेल्या होत्या, त्या परत मिळताना त्यांना वर्ग-२ म्हणून मिळाल्याने या जमिनींचा धारणा प्रकार वर्ग-१ करुन मिळण्याबाबत खंडकरी शेतकऱ्यांची दीर्घ कालावधीपासूनची मागणी होती. या खंडकरी शेतकऱ्यांची दीर्घ कालावधीच्या मागणीबाबत सकारात्मक विचार करुन मंत्रिमंडळ बैठकीत मांडलेल्या प्रस्तावास राज्य मंत्रिमंडळाने त्यास मान्यता दिली.

            महाराष्ट्र राज्य शेती महामंडळाची जमीन वर्ग करण्याच्या या सुधारणेमुळे ६ जिल्ह्यांतील१० तालुक्यामध्ये वाटप करण्यात आलेल्या ३८ हजार ३६१ एकर क्षेत्राचा धारणा प्रकार भोगवटादार वर्ग-१ असा होणार असून सुमारे २ हजार ६०० खंडकरी शेतकऱ्यांना त्याचा लाभ मिळणार आहे. या सुधारणेमुळे दीर्घ कालावधीपासूनची खंडकरी शेतकऱ्यांची मागणी पूर्णत्वास जाऊन शेतकऱ्यांना मोठा दिलासा मिळणार आहे.

            तसेच शेती महामंडळाची जमीन मिळण्याबाबत वेगवगळ्या सार्वजनिक प्रयोजनांसाठी ग्रामपंचायतींकडून मागणी करण्यात येत होती. परंतु सिलिंग कायद्यातील तरतुदीनुसार नगरपालिका हद्दीपासून ५ कि.मी. अंतराबाहेरील जमिनी सार्वजनिक प्रयोजनासाठी देता येत नसल्याने या जमिनी ग्रामपंचायतींना देण्यास कायदेशीर अडचण निर्माण झालेली होती. शासकीय घरकूल योजनागावठाण विस्तार योजनाघनकचरा व्यवस्थापनपाणी पुरवठा योजना या कारणांसाठीची ग्रामपंचायतींची गरज विचारात घेऊन सिलिंग कायद्यात सुधारणा करण्यास मंत्रिमंडळ बैठकीत मान्यता देण्यात आली आहे. या सुधारणेनुसार आता ग्रामपंचायतींच्या मागणीनुसार सार्वजनिक प्रयोजनासाठी शेती महामंडळाची जमीन उपलब्ध करुन देता येईल.

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योग हा व्यक्तीच्या सर्वांगीण विकासाचा मार्ग

 योग हा व्यक्तीच्या सर्वांगीण विकासाचा मार्ग





- राष्ट्रपती द्रौपदी मुर्मू

कैवल्यधाम योग संस्थेचा शताब्दी सोहळा

            पुणेदि. 29 : योग हा व्यक्तीच्या सर्वांगीण विकासाचा मार्ग असून शारीरिकमानसिकभावनिकसामाजिक आणि अध्यात्मिक उत्कृष्टतेचे माध्यम म्हणून योग प्रणाली प्रभावी मानली जातेअसे प्रतिपादन राष्ट्रपती द्रौपदी मुर्मू यांनी आज येथे केले.

            लोणावळा येथील कैवल्यधाम योग संस्थेचा शताब्दी सोहळा आणि 'शालेय शिक्षणात योगाचे एकत्रीकरणया विषयावरील राष्ट्रीय परिषदेच्या उद्घाटन समारंभात राष्ट्रपती श्रीमती मुर्मू बोलत होत्या.

कार्यक्रमास राज्यपाल रमेश बैसमहिला व बालकल्याण मंत्री आदिती तटकरेमाजी केंद्रीय मंत्री तथा शताब्दी समितीचे अध्यक्ष सुरेश प्रभूकैवल्यधामचे अध्यक्ष डॉ. ओमप्रकाश तिवारीसचिव सुबोध तिवारी आदी उपस्थित होते.

            स्वामी कुवलयानंद यांनी स्थापन केलेल्या 'कैवल्यधाम'च्या शताब्दी सोहळ्याच्या उद्घाटनप्रसंगी उपस्थित राहून आनंद झालाअसे सांगून राष्ट्रपती श्रीमती मुर्मू म्हणाल्या कीभारताचे योग शिक्षण ही जागतिक समुदायासाठी आपली अमूल्य देणगी आहे. भारताच्या पुढाकाराने संयुक्त राष्ट्रांच्या आमसभेने 21 जून हा दिवस 'आंतरराष्ट्रीय योग दिनम्हणून साजरा करण्याचा निर्णय घेतला. योग प्रणाली ही आरोग्य आणि कल्याणासाठी सर्वांगीण दृष्टिकोन प्रदान करते आणि ती संपूर्ण जागतिक समुदायाच्या आरोग्यासाठी लाभदायक आहे, असे संयुक्त राष्ट्रांच्या महासभेने स्पष्ट केले आहे.

            त्या पुढे म्हणाल्या कीयोगाच्या अमूल्य ज्ञानाचा मुलांना आणि तरुण पिढीला लाभ व्हावा या उद्देशाने राष्ट्रीय शैक्षणिक धोरण 2020 मध्ये भारतीय ज्ञान परंपरेत असलेल्या योग ज्ञानाला शिक्षण व्यवस्थेत महत्त्वाचे स्थान देण्यात आले आहे. प्राचीन भारतातील गुरुकुलमध्ये शिकणारे विद्यार्थीबौद्धिक ज्ञान तसेच अध्यात्मिक ज्ञानाच्या मार्गावर मार्गक्रमण करत असत. आपल्या विद्यार्थ्यांना भारताच्या प्राचीन परंपरेच्या उपयुक्त घटकांशी जोडणे हा राष्ट्रीय शैक्षणिक धोरणाचा एक महत्त्वाचा पैलू आहे.

            भारतीय परंपरेत कैवल्य म्हणजेच मोक्ष हा सर्वोत्तम प्रयत्न मानला जातो. अर्थकाम आणि धर्म या पायऱ्या पार करून माणसाला कैवल्य प्राप्त करायचे असते. व्यावहारिक ज्ञान आणि आध्यात्मिक ज्ञान एकमेकांना पूरक असल्याचे इश उपनिषदात स्पष्ट केले आहे. समग्र शिक्षणामध्ये व्यावहारिक आणि अध्यात्मिक ज्ञानाची सांगड घातली जाते.

            योगाची शिस्त कैवल्यप्राप्तीसाठी उपयुक्त आहे हे सत्य आपल्या ऋषीमुनींनी प्राचीन काळी विस्तृत संशोधन आणि चाचण्यांनंतर मांडले होते. महर्षी पतंजली यांनी योगसूत्रात योगविषयी महत्वपूर्ण संशोधन संकलित केले. विसाव्या शतकात स्वामी कुवलयानंद यांच्यासारख्या महान व्यक्तींनी योगपद्धतीची वैज्ञानिकता आणि उपयोगिता नव्या ऊर्जेने मांडली. योग आणि अध्यात्मावर आधारित आधुनिक विज्ञानातील तत्वे त्यांनी जागतिक समुदायासमोर मांडली.

            राष्ट्रपिता महात्मा गांधीडॉ. बाबासाहेब आंबेडकर यांच्यासह अनेक मान्यवर स्वामी कुवलयानंद यांच्या संपर्कात होते. स्वामीजींच्या मार्गदर्शनाचा देशातील महान व्यक्तिमत्त्व आणि सामान्य लोकांच्या जीवनावर सकारात्मक परिणाम झाला. स्वामीजींची योग शिकवण त्यांच्या शिष्य परंपरेने पुढे नेली जात आहे, असेही राष्ट्रपती म्हणाल्या.

            रायरंगपूरओडिशा येथील 'श्री अरबिंदो इंटेग्रल एज्युकेशन सेंटरमध्ये शिकविण्याची आणि आज कैवल्यधामच्या शताब्दी सोहळ्याच्या उद्घाटनात सहभागी होण्याची संधी मिळाली हे आनंददायी असल्याचे राष्ट्रपती म्हणाल्या.

            स्वामी कुवलयानंद शाळांमध्ये योगशिक्षणाच्या प्रसाराला खूप महत्त्व देत असत. कैवल्यधाम संस्थान संचालित कैवल्य विद्या निकेतन नावाची शाळा इतर शाळांसमोर याबाबतचे उदाहरण ठेवण्यास प्रेरणा देईलअसेही त्या म्हणाल्या.

            श्री. प्रभू म्हणाले कीलोणावळा या पुण्यभूमीत देशाच्या स्वातंत्र्यानंतर प्रथमच देशाचे राष्ट्रपती आले आहेत. योग ही एक विद्या आहे. त्यामुळे त्याचा अभ्यास व्हावा. ते शास्त्र आणि कला असल्यामुळे त्याचे आकलनतसेच संस्कृतीचा एक हिस्सा असल्यामुळे त्याचे जतन व्हावे. आस्था असल्यामुळे स्मरण व्हावेअध्यात्म असल्यामुळे चिंतन व्हावे आणि स्वीकार व्हावा म्हणून विश्लेषणही झाले पाहिजे. या सर्व बाबी कैवल्यधम येथे एकच ठिकाणी मिळतात, कैवल्यधाम हे येणारी हजारो वर्षे विश्वाला ऊर्जा देणारे स्थान ठरेलअसेही श्री. प्रभू म्हणाले.

            यावेळी संस्थेचे सचिव श्री. तिवारी यांनी स्वागत केले.

            याप्रसंगी कैवल्यधाम संस्थेच्या स्थापनेपासूनच्या प्रवासाचा माहितीपट दाखविण्यात आला. तसेच कैवल्यधाम प्रकाशनाच्या पुस्तकांचे प्रकाशन राष्ट्रपती महोदयांच्या हस्ते करण्यात आले. तत्पूर्वी राष्ट्रपती महोदयांनी कैवल्यधामचा इतिहास चित्ररूपाने मांडणाऱ्या गॅलरीला भेट देऊन पाहणी केली.


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