उन्होंने कहा कि कुंभ मेला भारतीय आध्यात्मिक संस्कृति का सबसे बड़ा आयोजन है, जो मन और आत्मा की शुद्धि का पर्व है। यह विचारों के प्रदूषण को दूर कर भारतीय संस्कृति को प्रवाहित रखने का माध्यम है। सभी जाति और धर्मों के लोग इसमें शामिल होते हैं, इसलिए यह राष्ट्रीय एकता और भारतीय संस्कृति का प्रतीक है। कुंभ मेले में केवल पवित्र स्नान ही नहीं, बल्कि संतों का मार्गदर्शन और विचारों का आदान-प्रदान भी होता है, जिससे आगामी कुंभ मेला अविस्मरणीय बनेगा।
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