Thursday, 21 October 2021

Suprabhat

 *’रिश्ते’ और ‘रास्ते’ के बीच,*

*एक अजीब रिश्ता होता है।*

*कभी 'रिश्तों' से 'रास्ते' मिल जाते है,*

*और कभी*

*'रास्तों' में 'रिश्ते' बन जाते हैं!*

*इसीलिए चलते रहिये और रिश्ते निभाते रहिये*

*खुशियाँ तो चन्दन की तरह होती हैं, दूसरे के माथे पे लगाओ तो अपनी उंगलियाँ भी महक जाती हैं..✒*

     🌹 GOOD  MORNING  🌹

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