Saturday, 22 February 2025

मराठी से राष्ट्र की सांस्कृतिक निर्माण का महान कार्य

 मराठी से राष्ट्र की सांस्कृतिक निर्माण का महान कार्य




– प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

राष्ट्रीय राजधानी में अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन का उत्साहपूर्ण उद्घाटन

स्वभाषा के अभिमान की सीख छत्रपति शिवाजी महाराज से फडणवीस

संस्कृति की शक्ति रखने वाली भाषा को लोगों को जोड़ना चाहिए तारा भवाळकर

नई दिल्ली, 21 फरवरी: भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होतीबल्कि यह संस्कृति की संवाहक होती है। भाषाएं समाज में जन्म लेती हैं और समाज के निर्माण में बड़ी भूमिका निभाती हैं। मराठी भाषा ने न केवल महाराष्ट्र में बल्कि पूरे देश में महान व्यक्तियों के विचारों को अभिव्यक्ति देकर सांस्कृतिक निर्माण का महान कार्य किया है। यह गौरवोद्गार आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं में कभी कोई वैरभाव नहीं रहा। सभी भाषाओं ने एक-दूसरे को समृद्ध किया हैऔर भाषाई भेदभाव से दूर रहकर भाषाओं को संरक्षित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित 98वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीससम्मेलन के स्वागताध्यक्ष शरद पवारनियोजित अध्यक्ष डॉ. तारा भवाळकरपूर्व अध्यक्ष डॉ. रविंद्र शोभणेअखिल भारतीय मराठी साहित्य महासभा की अध्यक्ष प्रो. उषा तांबेमहासचिव डॉ. उज्ज्वला मेहेंदळेकोषाध्यक्ष प्रकाश पागेसम्मेलन के निमंत्रक संजय नहार सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उपस्थित जनसमूह का मराठी में स्वागत करते हुए कहा कि मराठी साहित्य सम्मेलन केवल एक भाषा तक सीमित नहीं हैबल्कि इसमें स्वतंत्रता संग्राम की सुगंध और एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत समाहित है। उन्होंने कहा कि 1878 से अब तक कई महान विभूतियों ने इस सम्मेलन की अध्यक्षता की हैऔर इस परंपरा से जुड़ने का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है। जागतिक मातृभाषा दिवस के अवसर पर यह सम्मेलन आयोजित किया जाना अत्यंत सराहनीय है। प्रधानमंत्री ने संत ज्ञानेश्वर के शब्दों को उद्धृत करते हुए कहा, "माझ्या मराठाचि बोलू कौतुकेअमृताते पैजा जिंके।" उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें मराठी भाषा से अत्यधिक प्रेम है और वह इसे सीखने का प्रयास लगातार कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा देने का कार्य पूर्ण करने का अवसर पाकर उन्हें अत्यंत संतोष हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक के 350 वर्षपुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होळकर की 300वीं जयंतीऔर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा लिखित भारतीय संविधान के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में यह सम्मेलन हो रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100वीं वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए कहा कि वेदों से लेकर स्वामी विवेकानंद के विचारों तक को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संस्कारयज्ञ निरंतर जारी है।

प्रधानमंत्री ने मराठी भाषा को पूर्ण और समृद्ध बताते हुए कहा कि इसमें शौर्य और वीरतासौंदर्य और संवेदनासमानता और समरसताआध्यात्म और आधुनिकताशक्तिभक्ति और युक्ति सभी तत्व समाहित हैं। उन्होंने कहा कि जब देश को आध्यात्मिक ऊर्जा की आवश्यकता थीतब महाराष्ट्र के संतों ने संत ज्ञानेश्वरसंत तुकारामसंत रामदाससंत गाडगे महाराजसंत तुकडोजी महाराजगोरा कुंभार जैसे संतों के माध्यम से समाज को नई दिशा दी।

मराठी भाषा केवल संवाद का माध्यम नहींबल्कि स्वतंत्रता और क्रांति की आवाज रही है। यह विचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराजसंभाजी महाराज और बाजीराव पेशवा ने मराठी भाषा को अपनी प्रशासनिक और युद्धनीति का हिस्सा बनाकर आक्रमणकारियों को पीछे हटने पर मजबूर किया। भारत के स्वतंत्रता संग्राम में वासुदेव बळवंत फडकेलोकमान्य टिळक और वीर सावरकर जैसे क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों की सत्ता को चुनौती दीऔर मराठी साहित्य ने राष्ट्रभक्ति की भावना को प्रज्वलित कर नई ऊर्जा दी।

प्रधानमंत्री ने मराठी भाषा के सामाजिक सुधारों में योगदान को रेखांकित करते हुए महात्मा ज्योतिबा फुलेसावित्रीबाई फुलेमहर्षि कर्वे और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मराठी साहित्य ने दलित समाज के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाईजिससे वंचित वर्गों को अपनी आवाज बुलंद करने का अवसर मिला। मराठी भाषा ने न केवल प्राचीन विचारों को सहेजाबल्कि विज्ञान और आधुनिकता को भी अपनाया। महाराष्ट्र ने हमेशा प्रगतिशील विचारों को स्वीकार कियाऔर इसी कारण मुंबई आज देश की आर्थिक राजधानी बनी है। मुंबई ने मराठी के साथ-साथ हिंदी फिल्म उद्योग (बॉलीवुड) को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

भाषाई समरसता का प्रतीक है मराठी

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की भाषाई विविधता ही उसकी एकता का मजबूत आधार हैऔर मराठी भाषा इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। "भाषा मां के समान होती हैजो अपने बच्चों को नया विचार देती हैविकास से जोड़ती है और भेदभाव नहीं करती।" मराठी भाषा ने अन्य भाषाओं से साहित्य को आत्मसात किया और स्वयं भी अन्य भाषाओं को समृद्ध किया। उन्होंने कहा कि मराठी सहित सभी प्रमुख भारतीय भाषाओं में उच्च शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा हैजिससे महाराष्ट्र के युवा अब मातृभाषा में उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।

युवाओं को साहित्य से जोड़ने की अपील

प्रधानमंत्री ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और साहित्यिक सम्मेलनों तथा संस्थानों की देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि मराठी साहित्य को डिजिटल युग में अधिक प्रासंगिक बनाने के लिए सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। साथ हीयुवाओं के लिए साहित्यिक प्रतियोगिताओं का आयोजन करने का भी आह्वान किया। उन्होंने यह विश्वास व्यक्त किया कि मराठी साहित्य और भाषा की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य साहित्य मंडलों और संस्थाओं के माध्यम से सफलतापूर्वक किया जाएगा।

शिवाजी महाराज से सीखा स्वभाषा का अभिमान फडणवीस

मराठी भाषा को अभिजात भाषा का दर्जा मिलने के बाद दिल्ली में आयोजित हो रहे मराठी साहित्य सम्मेलन को गर्व का विषय बताते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि यह वैश्विक मराठी समुदाय के सपने के साकार होने जैसा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं द्वारा भाषा को प्रदूषित करने के प्रयासों के बावजूद छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने प्रशासन में मराठी भाषा को प्राथमिकता दी। उन्होंने फारसी और उर्दू के शब्दों को हटाकर मराठी शब्दों को अपनाने की परंपरा शुरू की। उन्होंने कहा, "स्वभाषा के प्रति गर्व और आग्रह हमें शिवाजी महाराज से ही मिला है।"

संमेलन स्थल तालकटोरा स्टेडियम का ऐतिहासिक महत्व बताते हुए फडणवीस ने कहा कि 1737 में मराठों ने यहीं छावनी डालकर दिल्ली पर विजय प्राप्त की थी। अब मराठी विचारों की शक्ति से दिल्ली एक बार फिर जीती जाएगी।

उन्होंने प्रसिद्ध मराठी लेखक पु. ल. देशपांडे के शब्दों को याद करते हुए कहा कि "जो अपनी मातृभाषा से प्रेम करता हैवही दूसरी भाषाओं को भी सम्मान देता है।" मराठी भाषा ने सभी को अपनाया है और लोकभाषा के रूप में इसकी समृद्धि संत साहित्य और लोकसंस्कृति से जुड़ी हुई है।

फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र में लगातार होने वाले साहित्य सम्मेलनों में विभिन्न बोली भाषाओं को स्थान दिया जाता हैजिससे मराठी की विविधता बनी रहती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि यह अधिवेशन ऐतिहासिक रहेगा और 100वें अधिवेशन को भी भव्य रूप में मनाया जाएगा।

संस्कृति की शक्ति रखने वाली भाषा को लोगों को जोड़ना चाहिए – भवाळकर

अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन विभिन्न बोलियों का संगम हैऔर प्रधानमंत्री को भेंट की गई विठ्ठल की मूर्ति महाराष्ट्र की उदार संस्कृति का प्रतीक हैऐसा उल्लेख करते हुए डॉ. तारा भवाळकर ने कहा कि मराठी भाषा का महत्व संत ज्ञानेश्वर और संत एकनाथ ने बताया है। छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्य की स्थापना से पहले संतों ने इसके लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया था। मराठी भाषा को संतों ने जीवित रखा। भाषा जीवन का हिस्सा होनी चाहिए। यह एक जैविक तत्व हैजिसे यदि बोला जाए तो वह जीवित रहती है।

महाराष्ट्र में संतों ने लोगों को पांडुरंग की भक्ति मराठी भाषा के माध्यम से करवाईजिससे यह भाषा जीवंत बनी रही। जिस दिन किसी माँ ने अपने बच्चे के लिए पहली lullaby (ओवी) गाई होगीउसी दिन मराठी भाषा जन्मी होगी। संतों ने विठ्ठल से संवाद भी मराठी में ही किया। संत वास्तव में प्रगतिशील विचारों वाले थे। इन सभी कारणों से मराठी भाषा को अभिजात्यता प्राप्त हुई। मराठी भाषा बोली के रूप में फैलीजिससे शिवाजी महाराज को गाँवों और दूरस्थ क्षेत्रों से मावले मिले।

भाषा संस्कृति की नींव होती है। भाषा को जोड़ने वाला तत्व होना चाहिएतोड़ने वाला नहीं। सम्मेलन की अध्यक्ष चुने जाने में महिला होने की बजाय गुणवत्ता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। महाराष्ट्र ने विचारों और साहित्य के माध्यम से दिल्ली के तख्त को प्रभावित किया है। उन्होंने यह भी आशा व्यक्त की कि साहित्य सम्मेलन के माध्यम से प्रेम और सौहार्द का संदेश दिया जाए।

वर्तमान समय में साहित्यकारों पर बड़ी जिम्मेदारी – शरद पवार

मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा मिलने के बाद यह पहला साहित्य सम्मेलन दिल्ली में हो रहा हैऔर इसका उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होने पर शरद पवार ने विशेष हर्ष व्यक्त किया। उन्होंने मराठी को अभिजात भाषा का दर्जा दिलाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों की सराहना की।

उन्होंने कहा कि मराठी साहित्यकारों ने संत परंपरा से ही समावेशी विचारों को आगे बढ़ाने का कार्य किया है। महिला साहित्यकारों के योगदान से मराठी साहित्य और अधिक समृद्ध हुआ है। साहित्य ने समाज को दिशा देने का कार्य किया है। साहित्यकारों की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई हैऔर उन्हें समाज सुधारकों के सकारात्मक मार्ग पर समाज का नेतृत्व करना चाहिए।

नई पीढ़ी को पुस्तकों से जोड़ने के लिए आधुनिक तकनीकों और डिजिटल माध्यमों का रचनात्मक उपयोग किया जाना चाहिए। यदि युवा पीढ़ी में साहित्य के प्रति रुचि बनी रहीतो साहित्य का भविष्य सुरक्षित रहेगा। यदि महिलाओं को अध्यक्ष पद के अवसर अधिक मिलेतो महिला साहित्यकारों की परंपरा और अधिक गति से आगे बढ़ेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति और साहित्य के बीच संबंध ऐतिहासिक रूप से हैं और वे एक-दूसरे के पूरक हैं।

लेखन और पुस्तकालयों के महत्व को रेखांकित करने वाला सम्मेलन – नहार

संजय नहार ने कहा कि दिल्ली में आयोजित यह साहित्य सम्मेलन लेखन और पुस्तकालयों के महत्व को उजागर करने का एक अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा उद्घाटन किया जाना महाराष्ट्र के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। यह सम्मेलन देश के विकास में महाराष्ट्र की सकारात्मक भूमिका की नींव को और मजबूत करने का कार्य करेगा।

सम्मेलन का शुभारंभ और समापन

प्रारंभिक भाषण में श्रीमती उषा तांबे ने सम्मेलन के आयोजन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन मराठी मन को देश की राजधानी से और अधिक निकट लाने वाला आयोजन है।

कार्यक्रम का शुभारंभ मान्यवरों द्वारा दीप प्रज्वलन और रुकय्या मकबूल द्वारा नवकार मंत्र के उच्चारण से हुआ। शमिका अख्तर ने महाराष्ट्र गीत प्रस्तुत किया। समापन संत ज्ञानेश्वर के पसायदान के साथ हुआ।

इस अवसर पर केंद्रीय राज्य मंत्री प्रतापराव जाधवविधान परिषद अध्यक्ष प्रो. राम शिंदेपूर्व गृहमंत्री सुशीलकुमार शिंदेलोकसभा के पूर्व अध्यक्ष शिवराज पाटिल चाकूरकरविनय सहस्रबुद्धे सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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सावधान

 They are going to upload some photos of the earthquake in Japan and Morocco on Whatsapp. The file is called Seismic Waves CARD, do not open or see it, it will hack your phone in 10 seconds and it cannot be stopped in any way. Pass the information on to your family and friends. DO NOT OPEN IT. 

This news was announced on TV also.

आरोग्यदायी दिवा* pl share

 *आरोग्यदायी दिवा* 




आपण सर्वजण घरामधील मंदिरात, तुळशीजवळ दिवा लावतो, कारण दिवा लावल्याने तन व मन प्रसन्न होते, भक्ती बरोबर शक्ती हि मिळते, तर हि शक्ती म्हणजे त्या दिव्यामधुन येणारा सुगंध.. आपणांस माहित असेलही कि त्या सुगंधाने आपल्याला निरोगी सुध्दा राहता येऊ शकते. 

दिवा कशाचा लावला तर त्याने वातावरण शुध्द होते व आरोग्य कसे चांगले होते किंवा आजारपणात ते कसे फलदायी ठरतात हे पाहुया. दिवा छोटा व मातीचा असणे आवश्यक. 


◼️ शुध्द तुपाच्या दिव्यात एक कापुर वडी व एक लवंग टाकल्यास, सतत होणारी सर्दि व डोके दुखी बरी होण्यास मदत होते. दिवसातून केवळ एक वेळेस.

◼️ शुध्द तुपाच्या दिव्यात एक कापुर व एक काळेमिरी टाकल्यास, मानसिक आजार, हातापायात येणारी सुज कमी होण्यास मदत होते.

◼️ मोहरीच्या तेलाच्या दिव्यात हिंग व लवंग टाकल्यास, अंगात होणारी जळजळ, ॲसिडीटी, मळमळ, डोक जड होणे, जुलाब होणे हे विकार थांबण्यास मदत होते. 

◼️ मोगर्याचे तेल ( चमेली तेल ) मध्ये दोन थेंब दुधाचे टाकल्यास, सतत होणारी बेचैनी, अंगदुखी, मणक्याचा त्रास, मान अवघडणे हे त्रास बरे होण्यास मदत होते. 

◼️सुर्यफुलाच्या तेलाच्या दिव्यात एक कडुलिंबाचे एकपान टाकल्यास कोणत्याही आजारातुन लवकर बरे होण्यास मदत होते. 

◼️शुध्द तुपाच्या दिव्यात भिमसेन कापुर व ओवा टाकल्यास हवेतील बारिक किटक जे दिसत नाहीत ते राहत नाही व ॲाक्सीजन चे प्रमाण सामान्यत: वाढण्यास मदत होते.

◼️ शुध्द तुपाच्या दिव्यात खाण्याच्या पानाचे एक देठ, हिंग, एक इलायची, एक लवंग टाकल्यास घरातील मतभेद दुर होतात, शांतता व लहान मुलांचे बुध्दी चातुर्य वाढते. 


वरील दिव्यांचे उपाय हे सकाळी व सायंकाळी केल्यास उत्तम, हा दिवा अश्याठिकाणी लावावा कि त्याचा सुगंध हा रूम मध्ये आत येईल, देवघरातच लावणे बंधनकारक नाही. आपण घेत असलेला श्वास व त्यातील सुगंध हे आपल्या शरिरात पोषक स्वरूपात मिळाले तर त्याचा नक्कीच लाभ होतो. हा प्रयोग १० दिवस नियमित केल्यास उत्तम, तीस-या दिवसापासून सकारात्मक परिणाम जाणवू शकतात.

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*सहेली.. शब्द प्रांगण Whatsapp group 3*



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दहावीच्या परीक्षेत प्रश्नपत्रिका फुटल्याच्या बातमीसंदर्भात राज्य शिक्षण मंडळाचे स्पष्टीकरण pl share

 दहावीच्या परीक्षेत प्रश्नपत्रिका फुटल्याच्या बातमीसंदर्भात

राज्य शिक्षण मंडळाचे स्पष्टीकरण

 

मुंबईदि. २१ : महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक व उच्च माध्यमिक शिक्षण मंडळपुणे यांच्यातर्फे घेण्यात येणारी इ. १० वी ची परीक्षा दि. २१/०२/२०२५ रोजी सुरू झाली आहे. सदरच्या दिवशी सकाळ सत्रात प्रथम भाषेचे पेपर होतेया पेपरच्या वेळी जालना जिल्हयातील जिल्हा परिषद हायस्कूलबदनापूर ता. बदनापूर जि.जालना येथील परीक्षा केंद्र कमांक ३०५० या केंद्रावर मराठी प्रथम भाषेचा पेपर फुटला असल्याबाबत व यवतमाळ जिल्हयातील महागाव व कोठारी या परीक्षा केंद्रांवर मराठी प्रथम भाषा विषयाची प्रश्नपत्रिका मोबाईलव्दारे व्हायरल झाल्याबाबततसेच जिल्हा परिषद प्रशालातळणीता.मंठाजि.जालनाकेंद्र क्रमांक ३४३६ या परीक्षा केंद्रासंदर्भात काही माध्यमांमधून बातम्या प्रसारित झालेल्या आहेत.

 

त्याअनुषंगाने सदर बातम्यांसंदर्भातील वस्तुस्थिती खालील प्रमाणे-

१) जालना जिल्ह्यातील जिल्हा परिषद हायस्कूलबदनापूरता. बदनापूरजि. जालना येथील परीक्षा केंद्र क्रमांक ३०५० या केंद्रावर पेपर फुटीच्या बातमी संदर्भात सदर केंद्रावर भेट दिली असता जी दोन पाने काही वृत्तवाहिन्यांवर प्रसिध्द झालेली आहेत त्याअनुषंगाने मराठी (प्रथम भाषा) विषयाच्या मूळ प्रश्नपत्रिकेची छाननी केली असता सदरची दोन पाने ही मूळ प्रश्नपत्रिकेची नसून अन्य खाजगी प्रकाशकाने प्रकाशित केलेली दिसून आली तसेच काही हस्तलिखित मजकूराची पानेही आढळून आलीत्यामध्ये प्रश्नपत्रिकेतील काही प्रश्न व त्या प्रश्नांची उत्तरे हस्तलिखितामध्ये आढळून आलेली आहेत. म्हणजे ही प्रश्नपत्रिका फुटलेली नसून गैरमार्ग करण्याच्या दृष्टीने प्रश्नपत्रिकेतील काही प्रश्न व उत्तरे व्हायरल केल्याचे दिसून येते. संबंधित घटनेची गांभीर्याने नोंद घेवून जिल्हा प्रशासनाने याबाबत सविस्तर चौकशी करून त्याचा अहवाल देण्याबाबत व दोषी असलेल्या व्यक्तींवर कारवाई करण्याबाबतच्या सूचना दिल्या आहेत.

२) यवतमाळ जिल्ह्यातील महागाव कोठारी या परीक्षा केंद्रांवर मराठी (प्रथम भाषा) विषयाची प्रश्नपत्रिका मोबाईलव्दारे व्हायरल झाली अशा पध्दतीच्या बातम्या काही वृत्तवाहिन्यांवर प्रसारित झाल्या आहेत. याबाबत संबंधितांकडून सदर घटनेचा सविस्तर अहवाल घेण्यात आला असून संबंधित केंद्रावर प्रश्नपत्रिका फुटलेली नसून गैरमार्ग करण्याच्या दृष्टीने प्रश्नपत्रिका व्हायरल केल्याचे दिसून येते. सदर प्रकरणात दोषी व्यक्तींवर फौजदारी गुन्हा दाखल करण्याच्या सूचना देण्यात आलेल्या आहेत.

३) जालना जिल्ह्यातील जिल्हा परिषद प्रशालातळणीता. मंठाजि.जालनाकेंद्र कमांक ३४३६ या परीक्षा केंद्रावर परीक्षा सुरू होण्यापूर्वी विद्यार्थ्यांना सोडण्यासाठी पालकांनी परीक्षा केंद्रावर गर्दी केली होतीपोलीसांच्या मदतीने पालकांना परीक्षा सुरू होण्यापूर्वी बाहेर काढण्यात आले सदर परीक्षेदरम्यान कोणताही अनुचित प्रकार घडलेला नाहीअसे महाराष्ट्र राज्य माध्यमिक व उच्च माध्यमिक शिक्षण मंडळाचे सचिव देविदास कुलाळ यांनी स्पष्ट केले आहे.

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Friday, 21 February 2025

98वां अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन ‘अभिजात मराठी’ का जयघोष, भव्य ग्रंथदिंडी से हुआ उद्घाटन

 98वां अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन

अभिजात मराठी’ का जयघोषभव्य ग्रंथदिंडी से हुआ उद्घाटन

तालकटोरा स्टेडियम परिसर मराठीमय

 

नई दिल्ली, 21 फरवरी: अखिल भारतीय मराठी साहित्य महामंडल द्वारा आयोजित 98वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन का आज भव्य ग्रंथदिंडी (पुस्तक शोभायात्रा) के साथ शुभारंभ हुआ। पारंपरिक वेशभूषा में शामिल मराठीजनलोकनृत्य प्रस्तुतियां और अभिजात मराठी’ के गगनभेदी जयघोष से तालकटोरा स्टेडियम का पूरा परिसर मराठी संस्कृति के रंग में रंग गया।

पुरानी संसद परिसर के रकाबगंज गुरुद्वारा के पास ग्रंथपूजन और ध्वजारोहण के साथ इस शोभायात्रा की शुरुआत हुई। इस अवसर पर सम्मेलन की अध्यक्ष डॉ. तारा भवाळकरअखिल भारतीय मराठी साहित्य महामंडल की अध्यक्ष प्रो. उषा तांबेनेशनल बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मिलिंद मराठेपूर्व अध्यक्ष डॉ. रवींद्र शोभणेसांसद सुप्रिया सुलेसरहद संस्था के अध्यक्ष संजय नहार समेत कई प्रख्यात साहित्यकार मौजूद रहे। दिल्ली और महाराष्ट्र से हजारों मराठी बंधुपारंपरिक वेशभूषा में बड़ी उत्साहपूर्वक इस शोभायात्रा में शामिल हुए। खासतौर पर पंढरपुर से आई विशेष ग्रंथदिंडी भी इस शोभायात्रा का हिस्सा रही।

लोककला और सांस्कृतिक रंगारंग कार्यक्रम

ढोल-ताशों की गूंज के बीच शोभायात्रा में पारंपरिक लोककला और नृत्य जैसे लावणीपोतराजवाघ्या-मुरलीगोंधळपोवाडावासुदेव और आदिवासी नृत्य का शानदार प्रदर्शन किया गया। महिलाओं ने भी फुगड़ी खेलते हुए पूरे जोश के साथ इस आयोजन में भाग लिया।

दिल्लीवासियों का दिल जीता महाराष्ट्र के चित्ररथ ने

संमेलन में आकर्षण का केंद्र रहा महाराष्ट्र का भव्य चित्ररथजिसे राज्य सरकार द्वारा विशेष रूप से तैयार किया गया था। इस चित्ररथ पर संत ज्ञानेश्वरछत्रपति शिवाजी महाराजमहाराष्ट्र के किले और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित मराठी साहित्यकारों की कृतियों को खूबसूरती से दर्शाया गया। दिल्ली के लोगों ने इस शानदार प्रस्तुति को खूब सराहा।

98वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन के अवसर पर तैयार किए गए इस विशेष चित्ररथ के माध्यम से देश की राजधानी में महाराष्ट्र की अभिजात भाषा और संस्कृति की झलक देखने को मिली

धर्मवीर, स्वराज्यरक्षक छत्रपती संभाजी महाराज मुंबई किनारी रस्त्यावर कोणतेही तडे अथवा खड्डे नाहीत प्रतिबंधक उपाययोजना म्हणून मास्टिकचे अतिरिक्त

 धर्मवीरस्वराज्यरक्षक छत्रपती संभाजी महाराज मुंबई किनारी रस्त्यावर

 कोणतेही तडे अथवा खड्डे नाहीत

प्रतिबंधक उपाययोजना म्हणून मास्टिकचे अतिरिक्त आवरण

मुंबई किनारी रस्ता प्रकल्प हा पूर्णपणे सुरक्षित

नागरिकांनी अफवांवर तसेच अपुऱ्या माहितीवर विश्वास ठेवू नये

- महानगरपालिका प्रशासनाकडून आवाहन

 

            मुंबई, दि. 21 : बृहन्मुंबई महानगरपालिकेने बांधलेल्या धर्मवीरस्वराज्यरक्षक छत्रपती संभाजी महाराज मुंबई किनारी रस्ता (दक्षिण) प्रकल्प अंतर्गत हाजी अली येथील पुलावर मास्टिकचे अतिरिक्त आवरण केल्याची दृश्ये तसेच छायाचित्रे प्रसारमाध्यमातून प्रसारित होत आहेत. त्यावरुन प्रकल्पाच्या बांधकामात दोष असल्याचे आरोप प्रसारमाध्यमातून केले जात आहेत. या संदर्भात महानगरपालिका प्रशासनाकडून ठामपणे नमूद करण्यात येते कीसदर आरोपांमध्ये कोणतेही तथ्य नाही. हा प्रकल्प पूर्णपणे सुरक्षित असूनया रस्त्यावर कोणतेही तडे अथवा खड्डे नाहीत. सध्या प्रसारमाध्यम व समाजमाध्यमांतून प्रसारित होत असलेल्या चित्रफितींमध्ये किनारी रस्त्यावर दिसणारे पट्टे (पॅचेस) हे मुळात खड्डे प्रतिबंधक उपाययोजना म्हणून टाकलेल्या मास्टिकच्या आवरणाचे आहेत. येत्या १५ ते २० दिवसांत या मार्गांचे स्वरुप पूर्ववत करण्यात येईलअसे बृहन्मुंबई महानगरपालिका प्रशासनाच्या वतीने स्पष्ट करण्यात येत आहे.

            याअनुषंगाने नागरिकांमध्ये गैरसमज पसरु नयेतयासाठी बृहन्मुंबई महानगरपालिका प्रशासनाकडून पुढीलप्रमाणे स्पष्टीकरण करण्यात येत आहे.

            मुंबई किनारी रस्ता अंतर्गत उत्तर दिशेने जाणारा मार्ग (चौपाटी ते वरळी) हा जुलै २०२४ मध्ये वाहतुकीसाठी खुला करण्यात आला. त्यापूर्वी त्याचे डांबरीकरण करण्यात आले होते. डांबरीकरणाच्या काही भागांमध्ये सांधे रुंद झाले होते. हे सांधे आणखी रुंद होवू नये आणि डांबरीकरण पूर्णपणे मजबूत रहावेटिकावे यासाठी त्यावर मास्टिकचे अतिरिक्त आवरण ठिकठिकाणी टाकण्यात आले आहे. कारण पावसाळा सुरु झाल्यानंतरसततच्या व जोरदार पावसामुळे डांबरीकरणाचे नुकसान होवू नयेरस्त्यांवर खड्डे होवू नयेतहा त्यामागचा हेतू आहे. या ठिकाणी आता अस्फाल्टचा नवीन थर निकषानुसार देण्यात येणार आहे. येत्या १५ ते २० दिवसांत या मार्गांचे स्वरुप पूर्ववत करण्यात येईलअसे बृहन्मुंबई महानगरपालिका प्रशासनाच्या वतीने स्पष्ट करण्यात येत आहे.

            वरळी ते चौपाटी या दक्षिणवाहिनी मार्गावर मास्टिकचे आवरण टाकलेले नाहीहे नागरिकांनी व प्रसारमाध्यमांनी कृपया लक्षात घ्यावे. कारण सदर दक्षिणवाहिनी मार्ग मार्च २०२४ मध्ये खुला करण्यात आला. परिणामीत्यावरील डांबरीकरण पावसाळ्यापूर्वी मजबूत होण्यास पुरेसा अवधी मिळाला. सबबप्रकल्पातील मार्ग बांधणीमध्ये कोणताही दोष नाहीहे सिद्ध होते.

            उपरोक्त वस्तुस्थिती लक्षात घेतासर्व मुंबईकरांनानागरिकांना तसेच प्रसारमाध्यमांना महानगरपालिका प्रशासनाच्या वतीने विनंती करण्यात येते कीकृपया कोणत्याही अपुऱया माहितीवर तसेच अफवांवर विश्वास ठेवू नये. धर्मवीरस्वराज्यरक्षक छत्रपती संभाजी महाराज मुंबई किनारी रस्ता (दक्षिण) प्रकल्प हा मुंबई व महाराष्ट्रासह देशाच्या पायाभूत सुविधांमधील आगळावेगळा मानदंड प्रस्थापित करणारा प्रकल्प आहे. त्याच्या अभियांत्रिकी बांधणीबाबतबांधकाम दर्जाबाबत आणि एकूणच सुरक्षेबाबत कृपया कोणत्याही शंका बाळगू नयेतअसे विनम्र आवाहन करण्यात येत आहे.

राज्यपालांकडून शिवाजी विद्यापीठाचा आढावा

 राज्यपालांकडून शिवाजी विद्यापीठाचा आढावा

 

मुंबई, दि. २१ : राज्यपाल तथा राज्यातील विद्यापीठांचे कुलपती सी. पी. राधाकृष्णन यांनी आज राजभवन मुंबई येथे कोल्हापूर येथील शिवाजी विद्यापीठाच्या कामकाजाचा विस्तृत आढावा घेतला.

विद्यापीठाचे कुलगुरु डॉ. दिगंबर शिर्के यांनी यावेळी विद्यापीठासंदर्भात विस्तृत सादरीकरण केले.

राष्ट्रीय शैक्षणिक धोरणाची अंमलबजावणीसंशोधन व आंतरराष्ट्रीय सहकार्यविद्यार्थ्यांचे प्लेसमेंटभाषांतर प्रकल्पांतर्गत कार्यआंतरवासिता कार्यक्रमाची अंमलबजावणीअध्यापकांची उपलब्धताविद्यार्थ्यांसाठी वसतिगृह सुविधाक्रीडा सुविधांचा विकास, 'स्वच्छ भारत अभियानव विकसित भारत उपक्रमांमध्ये विद्यापीठाचा सहभागउद्योग क्षेत्राशी सहकार्य आदी विषयांवर यावेळी चर्चा झाली.

बैठकीला प्रकुलगुरू प्रा. पी एस पाटीलवाणिज्य व व्यवस्थापन शाखा अधिष्ठाता प्रा डॉ श्रीकृष्ण महाजनपरीक्षा व मूल्यमापन मंडळाचे संचालक प्रा. डॉ अजितसिंह जाधव उपस्थित होते.

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Governor reviews work of Shivaji University

 

Mumbai 21 : Maharashtra Governor and Chancellor of State Universities C.P. Radhakrishnan conducted a review of Shivaji University, Kolhapur at Raj Bhavan Mumbai.

Vice Chancellor of the University Prof. Dr D.T. Shirke made a presentation before the Governor.

Status of implementation of the National Education Policy in Key Result Areas, Academic Research and Internationalisation, Student Placement status, Translation project, Implementation of internship programme, Common Academic Calendar, Hostel facilities for students, upgradation of sports infrastructure, Swachh Bharat and Viksit Bharat initiatives were among the subjects discussed at the meeting.

Pro VC Prof PS Patil, Dean of Faculty of Commerce S S Mahajan and Director of the Board of Examination and Evaluation Dr A N Jadhav were present.

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