Thursday, 29 August 2024

*‼️गेहूं की तोंद ‼️*

 *‼️गेहूं की तोंद ‼️*


*पहले  लोग बिररा अर्थात चना और गेहूं का मिक्स आटा, किसी भी अनाज की मोटा  आटा की रोटी खाते थे जिसमें ज्वार, बाजरा, मक्का, जो ,रागी, धान इत्यादि हुआ करते थे जिसको खाने के बाद आदमी अपने कार्य पर निकल जाता था उसे सुस्ती कभी नहीं आती थी और ऊर्जा के साथ काम करता था पर जिस दिन गेहूं की रोटी जो मेहमानों के लिए बनाते थे उनको खाने के बाद एक नशा जैसा होता है* *जिससे आप को कुछ सुस्ती जैसी आती है इसलिए स्वस्थ रहने के लिए मल्टीग्रेन सभी प्रकार के अनाज इस्तेमाल करें,एवं गेहूं को  10% से 20% से ज्यादा नहीं खाना चाहिए और खासकर  रोगी को गेहूं कतई नहीं खाना चाहिए* और इसके बारे में अधिक जानने के लिए इसको जरूर ध्यान से पढ़ें👇👇


*‼️गेहूं की तोंद ‼️*

गेंहू मूलतः भारत की फसल नहीं है ...ये यूरोप से होता हुआ भारत तक आया था ...... अमेरिका के एक हृदय रोग विशेषज्ञ हैं डॉ विलियम डेविस...उन्होंने एक पुस्तक लिखी थी 2011 में जिसका नाम था "Wheat belly गेंहू की तोंद"...यह पुस्तक अब फूड हेबिट पर लिखी सर्वाधिक चर्चित पुस्तक बन गई है...पूरे अमेरिका में इन दिनों गेंहू को त्यागने का अभियान चल रहा है...कल यह अभियान यूरोप होते हुये भारत भी आएगा...


यह पुस्तक ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं और कोई फ़्री में पढ़ना चाहे तो भी मिल सकती है....


*चौंकाने वाली बात यह है कि डॉ डेविस का कहना है कि अमेरिका सहित पूरी दुनिया को अगर मोटापे, डायबिटिज और हृदय रोगों से स्थाई मुक्ति चाहिए तो उन्हें पुराने भारतीयों की तरह ज्वार, बाजरा, रागी, चना, मटर, कोदरा, जो, सावां, कांगनी ही खाना चाहिये गेंहू नहीं*..जबकि यहां भारत का हाल यह है कि 1980 के बाद से लगातार सुबह शाम गेंहू खा खाकर हम महज 40 वर्षों में मोटापे और डायबिटिज के मामले में दुनिया की राजधानी बन चुके हैं...*गेंहू मूलतः भारत की फसल नहीं है. यह मध्य एशिया और अमेरिका की फसल मानी जाती है और आक्रांताओ के भारत आने के साथ यह अनाज भारत आया था...उससे पहले भारत में जौ की रोटी बहुत लोकप्रिय थी और मौसम अनुसार मक्का, बाजरा, ज्वार आदि...भारतीयों के मांगलिक कार्यों में भी  जौ अथवा चावल (अक्षत) ही चढाए जाते रहे हैं। प्राचीन ग्रंथों में भी इन्हीं दोनों अनाजों का अधिकतम जगहों पर उल्लेख है...*

जयपुर  निवासी प्रशासनिक अधिकारी नृसिंह जी की बहन विजयकांता भट्ट (81 वर्षीय) अम्मा जी कहती हैं कि 1975-80 तक भी आम भारतीय घरों में *बेजड़* (मिक्स अनाज, Multigrain) की रोटी का प्रचलन था जो धीरे धीरे खतम हो गया। 1980 के पहले आम तौर पर घरों में मेहमान आने या दामाद के आने पर ही गेंहू की रोटी बनती थी और उस पर घी लगाया जाता था, अन्यथा बेजड़ की ही रोटी बनती थी ......आज घरवाले उसी बेजड़ की रोटी को चोखी ढाणी में खाकर हजारों रुपए खर्च कर देते हैं....*हम अक्सर अपने ही परिवारों में बुजुर्गों के लम्बी दूरी पैदल चल सकने, तैरने, दौड़ने, सुदीर्घ जीने, स्वस्थ रहने के किस्से सुनते हैं। वे सब मोटा अनाज ही खाते थे गेंहू नहीं।* 


*एक पीढ़ी पहले किसी का मोटा होना आश्चर्य की बात होती थी, आज 77 प्रतिशत भारतीय ओवरवेट हैं और यह तब है जब इतने ही प्रतिशत भारतीय कुपोषित भी हैं...फ़िर भी 30 पार का हर दूसरा भारतीय अपनी तौंद घटाना चाहता है....*


*_गेंहू की लोच ही उसे आधुनिक भारत में लोकप्रिय बनाये हुये है क्योंकि इसकी रोटी कम समय और कम आग में आसानी से बन जाती है...पर यह अनाज उतनी आसानी से पचता नहीं है...समय आ गया है कि भारतीयों को अपनी रसोई में 80-90 प्रतिशत अनाज जौ, ज्वार, बाजरे, रागी, मटर, चना, रामदाना आदि को रखना चाहिये और 10-20 प्रतिशत गेंहू को..._*


*हाल ही कोरोना ने जिन एक लाख लोगों को भारत में लीला है उनमें से डायबिटिज वाले लोगों का प्रतिशत 70 के करीब है...*


*वाकई गेहूं त्यागना ही पड़ेगा.... अन्त में एक बात और भारत  kar sakta .hai yadi.ek bar than le...*


*मात्र बीते 40 बरसों में यह हाल हो गया है तो अब भी नहीं चेतोगे फ़िर अगली पीढ़ी के बच्चे डायबिटिज लेकर ही पैदा होंगे...शेष- समझदार को इशारा ही काफी है।*


🪷 _ 🪷 _ 🪷 _ 🕉️ _ 🪷 _ 🪷 _ 🪷

 *🪷🪷।। शुभ वंदन ।।🪷🪷*

             

ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः।

सर्वे सन्तु निरामयाः।

सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।

मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्॥

Wednesday, 28 August 2024

रुग्णांची सुरक्षा, संसर्ग नियंत्रणासाठी जे जे रुग्णालयात आता अत्याधुनिक तंत्रज्ञान

 रुग्णांची सुरक्षा, संसर्ग नियंत्रणासाठी जे जे रुग्णालयात आता अत्याधुनिक तंत्रज्ञान


इजराइलच्या सहयोगातून अँटीमायक्रोबायोल इमर्जन्सी रूमचे उद्घाटन


 


 मुंबई, दि. 28 : जेजे हॉस्पिटल येथे अत्याधुनिक अँटीमायक्रोबायोल इमर्जन्सी कक्षाचे उद्घाटन करण्यात आले. इस्रायलचे परराष्ट्र व्यवहार महासंचालक कर्नल (निवासी) याकोव्ह ब्लिटश्टाइन यांच्या हस्ते या सुविधेचा प्रारंभ करण्यात आला. रुग्णांची सुरक्षा आणि संसर्ग नियंत्रणासाठी यामध्ये अत्याधुनिक तंत्रज्ञानाचा वापर करण्यात आला आहे. 


 


ही सुविधा इस्त्रायल येथील डीप-टेक कंपनी नॅनोसोनोने निर्लाटच्या सहकार्याने विकसित केली आहे. प्रगत प्रतिजैविक ऍक्रेलिक पेंटचा यामध्ये वापर करण्यात आला आहे. हे नाविन्यपूर्ण पेंट काही तासांत 99.99% जीवाणू, विषाणू यावर नियंत्रण मिळविते. इस्रायलच्या आरोग्य सेवा प्रणालीमध्ये आधीच यश मिळालेले हे तंत्रज्ञान मुंबईतील इस्रायलचे महावाणिज्य दूतावास, ग्रँट गव्हर्नमेंट मेडिकल कॉलेज आणि महाराष्ट्र सरकार यांच्या संयुक्त प्रयत्नांतून भारतात आणले गेले आहे. पेंटमध्ये समाविष्ट केलेले "QUACTIV™️ क्वाएक्टीव्ह हे तंत्रज्ञान पेंट जोपर्यंत भिंतींवर राहते तोपर्यंत हानिकारक सूक्ष्मजीवांपासून सतत संरक्षण देते. हे पेंट आणि तंत्रज्ञान संक्रमण नियंत्रणासह पर्यावरणास अनुकूल आणि सुरक्षित आहे.


 


कर्नल (निवासी) याकोव्ह ब्लिटश्टाइन यावेळी म्हणाले की "जेजे हॉस्पिटलमध्ये या प्रगत प्रतिजैविक आणीबाणी कक्षाचे होत असलेले उदघाटन हे इस्रायल आणि भारत यांच्यातील आरोग्य सेवेतील सहकार्यातील एक महत्त्वपूर्ण पाऊल आहे. भारतात रुग्णांची सुरक्षा आणि सार्वजनिक आरोग्य सुविधा विकसित करण्यामध्ये हे पाऊल निश्चितच महत्त्वपूर्ण ठरेल, असा विश्वास त्यांनी व्यक्त केला. 


 


 इस्रायलचे मुंबईतील कौन्सुल जनरल श्री. कोबी शोशानी म्हणाले की, इजराइल आणि भारतामध्ये आरोग्य क्षेत्रातील देवाण-घेवाणसाठी होत असलेले सहकार्य महत्त्वपूर्ण आहे. वैद्यकीय क्षेत्रातील हा एक महत्त्वाचा टप्पा आहे. दोन्ही राष्ट्रांमधील सहयोग यामुळे आणखी वृधिंगत होईल. वैद्यकीय सुविधांमध्ये बदल घडवून आणणारी ही झेप आहे. रुग्णांची सुरक्षा आणि संसर्ग नियंत्रण यामध्ये या नव्या तंत्रज्ञानाचा व्यापक परिणाम होईल, असा विश्वास त्यांनी व्यक्त केला.


 


जेजे रुग्णालयाच्या अधिष्ठाता डॉ. पल्लवी सापळे म्हणाल्या की, या अत्याधुनिक तंत्रज्ञानाच्या अवलंबामुळे रुग्णांची सुरक्षा सुनिश्चित होईल. "QUACTIV™️ क्वाएक्टीव्ह प्रतिजैविक पेंटची अंमलबजावणी हे जेजे रुग्णालयासाठी एक मोठे पाऊल आहे. हे तंत्रज्ञान आमच्या रुग्णांना संरक्षणाचा अतिरिक्त स्तर प्रदान करेल, जे संक्रमण रोखण्यासाठी आणि सुरक्षित वातावरण राखण्यासाठी आवश्यक आहे."


 


नॅनोसोनोचे मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री.ओरी बार चेम यांनी या नवोपक्रमाच्या व्यापक प्रभावाविषयी माहिती दिली. "QUACTIV™️ हे तंत्रज्ञान संक्रमण नियंत्रणातील एक महत्वपूर्ण प्रगती आहे. भारतात त्याचा सकारात्मक प्रभाव पाहून आम्ही उत्साहित आहोत, असे त्यांनी सांगितले. 


 


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Director General of Foreign Affairs of Israel Inaugurates Advanced Antimicrobial Emergency Room at JJ Hospital, Mumbai


New Facility at JJ Hospital, will be equipped with innovative Israeli technology to enhance patient safety and infection control


 


Mumbai,28, – In a landmark event for healthcare innovation, Col. (Res) Yaakov Blitshtein, Director General of Foreign Affairs of Israel, inaugurated a state-of-the-art emergency room at JJ Hospital, Mumbai. The facility is equipped with advanced antimicrobial acrylic paint developed by the Israeli deep-tech company Nanosono, in collaboration with Nirlat. This innovative paint can eliminate up to 99.99% of bacteria, viruses, and moulds within hours.


Already a success within Israel’s healthcare system, this technology has been introduced to India through the collaborative efforts of the Consulate General of Israel in Mumbai, Grant Government Medical College, and the Government of Maharashtra. The QUACTIV™️ technology integrated into the paint offers continuous protection against harmful microorganisms as long as the paint remains on the walls. The paint achieves its antimicrobial effects without toxic substances, ensuring an environmentally friendly and safe solution for infection control.


During the inauguration, Col. (Res) Yaakov Blitshtein stated, "The launch of this advanced antimicrobial emergency room at JJ Hospital marks a significant milestone in the collaboration between Israel and India in healthcare. This initiative reflects our commitment to sharing Israeli technological advancements to enhance patient safety and public health in India."


Consul General of Israel to Mumbai, Mr. Kobbi Shoshani remarked, "This cooperation represents a significant milestone in the medical sector by seamlessly integrating India’s advanced healthcare system with Israel’s pioneering expertise in speciality chemicals. It underscores a unique collaborative effort between our nations, marking a transformative leap in revolutionizing medical facilities. This initiative not only enhances patient safety and infection control but also symbolizes a profound partnership, where both countries contribute equally to advancing healthcare standards. By merging our strengths, we are setting a new benchmark in medical innovation that will have a lasting impact on healthcare practices in both India and Israel."


Dr. Pallavi Saple, Dean, JJ Hospital, expressed the hospital's commitment to adopting cutting-edge technology: "The implementation of QUACTIV™️ antimicrobial paint is a major step forward for JJ Hospital. This technology provides an additional layer of protection for our patients, which is essential for preventing infections and maintaining a safe environment."


Mr. Ori Bar Chaim, CEO, Nanosono, highlighted the broader impact of this innovation: "QUACTIV™️ is a breakthrough in infection control, setting new safety standards in healthcare environments and beyond. We are excited to see its positive impact in India and look forward to further expanding its applications." Mr Bar Chaim has three decades of extensive experience in the realm of international business and investments. Before embarking on his journey with Nanosono, Ori held pivotal roles as the CEO and Senior Advisor in both the private and public sectors, both in Israel and on a global scale.


With this inauguration, JJ Hospital Mumbai is leading the way in adopting innovative solutions to enhance patient safety, demonstrating the success of the partnership between Israel and India in addressing critical public health challenges.

महाराष्ट्रात केंद्राप्रमाणेच एकीकृत निवृत्ती वेतन योजना लागू

 महाराष्ट्रात केंद्राप्रमाणेच एकीकृत निवृत्ती वेतन योजना लागू

मुंबई दि. 28 : केंद्र सरकारने 24 ऑगस्ट रोजी 'एकीकृत निवृत्तिवेतन योजना' (Unified Pension Scheme) घोषित केली. त्याच धर्तीवर प्रस्तावित 'सुधारीत राष्ट्रीय निवृत्तिवेतन योजनाऐवजी महाराष्ट्र राज्यामध्ये ही योजना (Unified Pension Scheme) जशीच्या तशी लागू करण्यात येत आहे. तसेच या अनुषंगाने येणाऱ्या अतिरिक्त खर्चास मान्यता देण्यात येत आहे असे वित्त विभागाने कळविले आहे

केंद्र सरकारच्या कर्मचाऱ्यांना लागू केलेल्या एकीकृत निवृत्तिवेतन योजनेची मार्गदर्शक तत्वे केंद्र सरकारचे अनुषंगाने महाराष्ट्र राज्यात लागू करण्याकरिता "वित्त विभागास प्राधिकृत करण्यात येत आहे.


Tuesday, 27 August 2024

आशा स्वयंसेविका आणि गटप्रवर्तकांना सानुग्रह अनुदान लागू

 आशा स्वयंसेविका आणि गटप्रवर्तकांना सानुग्रह अनुदान लागू

 

मुंबईदि.२७ : आशा स्वयंसेविका व गटप्रवर्तक यांच्या कामाचे स्वरूप लक्षात घेता कर्तव्य बजावत असताना अपघाती मृत्यू झाल्यास रु.१०.०० लाख व कायमस्वरुपी अंपगत्व आल्यास रु.५.०० लाख रकमेचे सानुग्रह अनुदान लागू करण्यास मान्यता देण्यात आली आहे. याबाबत सार्वजनिक आरोग्य व कुटुंब कल्याण मंत्री प्रा. डॉ. तानाजी सावंत यांनी केलेल्या सततच्या पाठपुराव्याला यश आले असूनया संदर्भातील महाराष्ट्र शासनाचा आदेश निर्गमित करण्यात आला आहे. १ एप्रिल२०२४ पासून हा निर्णय लागू करण्यास मान्यता देण्यात आली आहे.

आशा स्वयंसेविका व गटप्रवर्तक यांना सानुग्रह अनुदान लागू करण्यासाठी प्रति वर्ष अंदाजित रु.१.०५ कोटी इतका आवर्ती निधी मंजूर करण्यात आला आहे. यासाठी आवश्यक असणारा निधी आगामी अधिवेशनात पुरवणी मागणीद्वारे उपलब्ध करुन देण्यास मान्यता देण्यात आली आहे.

आरोग्य यंत्रणासेवाभावी संस्था व ग्रामस्थसमाजातील अन्य घटक यांमध्ये आरोग्यासंदर्भात जागरुकतासुसंवादसमन्वयप्रोत्साहननिर्माण करण्याच्या दृष्टीने "आशा स्वयंसेविका व गटप्रवर्तक" महत्वपूर्ण सामाजिक दुवा म्हणून कार्यरत आहेत. राज्यातील आशा स्वयंसेविकांचा माता आरोग्यबाल आरोग्यकुटुंब नियोजन इत्यादी कारणांसाठी नियमित गृहभेटी देणेमाता व बालकांना मार्गदर्शन करणेरुग्णांना प्राथमिक आरोग्य केंद्रग्रामीण रुग्णालयउपजिल्हा रुग्णालयजिल्हा रुग्णालय येथे संदर्भीत करणे अशा प्रकारची कर्तव्ये बजावावी लागतात.

 आशा स्वयंसेविका व गटप्रवर्तक यांच्या कामाचे स्वरूप विचारात घेवून आशा स्वयंसेविका व गटप्रवर्तकांचा कर्तव्य बजावत असताना अपघाती मृत्यू आल्यास रु.१०.०० लक्ष व कायमस्वरुपी अंपगत्त्व आल्यास रु.५.०० लक्ष इतके सानुग्रह अनुदान देण्याची बाब शासनाच्या विचाराधीन होती.

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जैसे ज्याचे कर्म तैसे फळ देई ईश्वर


 

*मुंगूस दर्शन अत्यंत शुभ व धनलाभ दायक

 *मुंगूस दर्शन अत्यंत शुभ  व धनलाभ दायक*



आपल्या हिंदू धर्मात मुंगूस आणि भारद्वाज पक्षी हे दोन. अत्यंत शुभ पवित्र व लक्ष्मिदायक.मानलेले आहेत



ब्राह्म मुहूर्तरयापासून  सकाळी 10. पर्यंतची वेळ देवांची वेळ असते. या काळात या दोघांचे  दर्शन झाल्यास दैवी कृपा आणि लक्ष्मी प्राप्तीचा संकेत असतो. आणि त्याचे अनुभव आलेले आहेत


 मुंगसा लां साक्षात विष्णूचा अवतार समजतात  त्यामुळे मुंगूस दिसणे हे अतिशय शुभ समजले जाते.



  कोणत्याही कामाला जाताना वेळी मुंगूस दिसल्यास ते काम हमखास होते असे म्हणतात 


मुख्यत्वे धनलाभ होतो. मुंगूस दिसल्यापासून सात दिवसात कोणतेही महत्त्वाचे काम.....जे होणे अत्यंत कठीण असते असे.  ..... ते सहज होऊन जाते.



 मुंगूस जेथून  जाते    तेथील  . शक्यतो  शेतवड.   राना वनात. पायवाट. वगैरे... जेथे स्वच्छ  माती असेल ती घ्यावी त्यात कोणत्याही झाडा खालील  माती मिसळावी  ती गोधुळी मुहूर्तावर मिळाल्यास फार चांगले   .



 *गोधुळी मुहूर्त म्हणजे सायंकाळच्या  सुमारास    जनावरे  हुंदडत येतात ती वेळ     यावेळी आणलेली माती हि. अत्यंत पवित्र असते*  



तरी सुद्धा मनात अशुद्धतेचा संशय नको म्हणून. थोडेसे गोमूत्र मिळाल्यास त्यावर शिंपडावे ती माती . तांब्याच्या चांदी अथवा सोन्याच्या वाटीत घ्यावी व देव्हाऱ्यात ठेवावी  


 त्याची पूजा करून विष्णूचा मंत्र  किंवा    श्री विष्णू  सहस्त्रनाम  म्हणावे.  या उपायाने लक्ष्मी प्रसन्न होते कारण  जेथे  विष्णू तेथे लक्ष्मी



मुंगूस दिसण्याचे बरेच फायदे आहेत 


 मुंगूस मुद्दाम मारल्यास त्याचे गंभीर परीणाम या.  पिढीला तसेच पुढील पिढीला कल्पंता पर्यंत भोगावे लागतात व  कोणत्याही शांती करून त्याचा दोष जात नाही



यासाठी मुंगसला चुकूनही   मारू नका उलट ते दिसल्यास त्याला नमस्कार करा



*आनंद एस. मत्तिकोप कुलकर्णी  बेळगा व 9449410911*

महिला सुरक्षिततेबाबत शैक्षणिक संस्थांमधून मोहीम राबवावी

 महिला सुरक्षिततेबाबत शैक्षणिक संस्थांमधून मोहीम राबवावी

- उपसभापती डॉ. नीलम गोऱ्हे

मुंबईदि. 26: बदलापूर घटनेप्रमाणे अल्पवयीन मुलींवरील अत्याचार हे निंदनीय आहे. अशा घटनांना आळा घालण्यासाठी शासनस्तरावर विविध उपाययोजना करण्यात येत आहेत. भविष्यात अशा घटना घडूच नयेयासाठी शैक्षणिक संस्थांमधून मुली व महिला सुरक्षिततेबाबत विशेष मोहिमेद्वारे उपाययोजना राबवाव्यातअशा सूचना विधानपरिषदेच्या उपसभापती डॉ. नीलम गोऱ्हे यांनी दिल्या.

      विधानभवनातील समिती कक्षामध्ये महिला व मुलींवरील अत्याचार रोखण्यासाठी करावयाच्या उपाय योजनांबाबत बैठकीचे आयोजन करण्यात आले. बैठकीस उच्च व तंत्र शिक्षण विभागाचे प्रधान सचिव विकासचंद्र रस्तोगीग्रामविकास विभागाचे प्रधान सचिव एकनाथ डवलेपरिवहन विभागाचे सह आयुक्त जितेंद्र पाटीलशालेय शिक्षण विभागाचे उपसचिव तुषार महाजननगर विकास विभागाच्या सहसचिव सुशीला पवार,महिला व बाल अत्याचार प्रतिबंध विभागाच्या उपविभागीय पोलीस अधिकारी शुभदा चव्हाणगृह विभागाचे अवर सचिव अशोक नाईकवडे उपस्थित होते. 

      लहान मुलांसाठी  गुड टच बॅड टच’ उपक्रम विस्तृत व प्रभावीपणे राबविण्याचे निर्देश देत उपसभापती डॉ. गोऱ्हे म्हणाल्यामुलांच्या जनजागृतीविषयी असलेले साहित्य एकत्रित करावे. या साहित्यावर शालेय शिक्षण विभागाने उत्कृष्ट सादरीकरण बनवून शाळांमधून ते मुलांपर्यंत पोहचवावे. राज्यात 81129  शाळांमध्ये सखी-सावित्री कक्षाची स्थापना करण्यात आली आहे. उर्वरित शाळांमधून हा कक्ष तातडीने कार्यान्वित करण्यात यावा. कक्ष स्थापन करण्यात आलेल्या शाळांपैकी सुरूवातीला किमान 8 हजार शाळांपर्यंत जनजागृतीपर उपक्रम पोहोचविण्यात यावा.

      मुले आणि मुलींच्या सुरक्षिततेबाबत शालेय शिक्षण विभाग,उच्च व तंत्र शिक्षण विभागपरिवहनग्रामविकास व नगरविकास विभागाने वेळोवेळी शासन निर्णय निर्गमीत केले आहे. या शासन निर्णयांच्या अंमलबजावणीचे मूल्यमापन करावे. शासन निर्णय अंमलबजावणीतील अडचणीही लक्षात घ्याव्यात. मुलींच्या सुरक्षिततेच्यादृष्टीने शाळांमध्ये स्वच्छतागृहापर्यंत ने-आण करण्यासाठी महिला सहायकविद्यार्थी बस वाहतूकीमध्ये महिला परिचर नियुक्तीबाबत पडताळणी करावी. शाळांमधून सीसीटीव्ही कॅमेरे बसवून दर दोन ते तीन दिवसांनी कॅमेऱ्यांच्या रेकॉर्डींग्जची पडताळणी करावी. संबंधित विभागांनी विद्यार्थ्यांच्या सुरक्षिततेबाबत हेल्पलाईन क्रमांक सुरु करावा. हेल्पलाईनवर तक्रारी करणे सोयीचे जाईलअसेही उपसभापती डॉ. गोऱ्हे यांनी सांगितले.

      संबंधित विभागांनी परिपत्रक जारी केल्यावर त्याबाबत झालेली जागरुकता ते कितपत गांभीर्याने घेतले जात आहे याबाबत नियमित मूल्यमापन केले जावे अशी यंत्रणा विकसित करावी. असे देखील यावेळी डॉ.गोऱ्हे यांनी सांगितले. बस वाहतूक करणाऱ्या बसवर किंवा प्रवासी वाहनांवर, सर्व नियम पाळणाऱ्या वाहनावर सुरक्षित वाहन असे स्टीकर लावावे. स्टीकर दर्शनी भागात बसवर लावण्यात यावे. तसेच एसटी बसमधील मुलीं व महिलांशी गैरवर्तन रोखण्यासाठी साध्या वेशात महिला पोलीस असावेत यामुळे बसमधील मुली सुरक्षित प्रवास करू शकतील. शाळांच्या स्नेहसंमेलनांमधून जनजागृती करावी, तसेच  प्रदर्शने भरवावीत, विशेष कार्यक्रम करावेत अशा सूचनाही उपसभापती डॉ. गोऱ्हे यांनी दिल्या. संबंधित विभागांच्या अधिकाऱ्यांनी महिला व मुली यांचेवरील अत्याचार रोखण्यासाठी विभाग करत असलेल्या उपाययोजनेबाबत सविस्तर माहिती दिली.

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