मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानमंडल में विभिन्न प्रकार के कानून बनाए जाते हैं, जो जनता की आशाओं और अपेक्षाओं को पूरी करने वाले होते हैं। कानून बनते समय सदन में गुणात्मक चर्चा होती है। किसी कानून का राज्य के अंतिम आम नागरिक पर क्या परिणाम होगा, इसकी चर्चा भी सदन में की जाती है। विधानमंडल की मंजूरी के बिना राज्य के खजाने का एक रुपया भी खर्च नहीं किया जा सकता। विभागों को अपनी मांगें सदन में पेश करनी होती हैं, उन पर चर्चा होती है, फिर मंजूरी के बाद बजट बनता है और उसके बाद कानून तैयार होता है। यह कानून ही राज्य के खजाने की चाबी है, ऐसा भी उन्होंने इस अवसर पर कहा।
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