Saturday, 11 October 2025

आर्थिक विकास और अवसरों का नया इंजन : CETA

 आर्थिक विकास और अवसरों का नया इंजन : CETA

मुंबई में हो रही इन बहुप्रतीक्षित घोषणाओं का आधार इसी वर्ष 24 जुलाई2025 को हस्ताक्षरित 'व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता' (CETA - Comprehensive Economic and Trade Agreement) है। कई वर्षों की गहन वार्ताओं के बाद संपन्न हुआ यह ऐतिहासिक समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार के परिदृश्य को पूरी तरह से बदल देने की क्षमता रखता है। यह भारतीय उपभोक्ताओंउत्पादकों और निर्यातकों के लिए अवसरों के नए द्वार खोलेगाजिससे अनगिनत उद्योगों और करोड़ों लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है।

इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसके लागू होने के बाद ब्रिटेन के बाजार में प्रवेश करने वाले 99% भारतीय उत्पादों पर सीमा शुल्क (Tariffs) समाप्त हो जाएगा। इससे वस्त्रचमड़ाकृषि उत्पाद और ऑटोमोटिव घटक जैसे पारंपरिक भारतीय निर्यातकों को सीधा लाभ मिलेगाजिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और भारतीय उत्पादों को एक नयाप्रतिष्ठित बाजार मिलेगा। आंकड़ों से परेइस समझौते का मूल उद्देश्य रोजगार के नए अवसर पैदा करनानवाचार (Innovation) को बढ़ावा देना और जमीनी स्तर पर समृद्धि का विस्तार करना है।

यह समझौता प्रभावशाली आंकड़े भी प्रस्तुत करता है। अनुमान है कि द्विपक्षीय व्यापारजो वर्तमान में लगभग 43 बिलियन पाउंड हैमें प्रति वर्ष 25.5 बिलियन पाउंड की वृद्धि होगी। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इस समझौते से समय के साथ भारत की वार्षिक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 5.1 बिलियन पाउंड (लगभग 53,000 करोड़ रुपये) की वृद्धि हो सकती है। ये आंकड़े केवल संख्याएँ नहीं हैंइनके पीछे भारत के उन करोड़ों कारीगरोंउद्यमियों और पेशेवरों के सपने छिपे हैंजो वैश्विक बाजारों तक अपनी पहुँच बनाना चाहते हैं।

यह समझौता प्रधानमंत्री मोदी के 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेसके मंत्र को साकार करता हैजिसका उद्देश्य भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले छोटे और मझोले उद्यमों (SMEs) को सशक्त बनाना है। समझौते में यह वादा किया गया है कि सीमा शुल्क प्रक्रियाओं को सरल बनाया जाएगा ताकि 48 घंटों के भीतर माल की निकासी सुनिश्चित हो सके। यह कदम छोटे व्यवसायों को लालफीताशाही (Red Tape) की बाधाओं से मुक्त करेगा। इस समझौते को ब्रिटेन में द्विदलीय समर्थन प्राप्त हैजो इसकी राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करता है और यह दर्शाता है कि ब्रेक्सिट के बाद की वैश्विक व्यवस्था में ब्रिटेन भारत को एक अनिवार्य रणनीतिक भागीदार के रूप में कितना महत्व देता

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