Friday, 13 May 2022

संदेश

 *🌻धम्म संदेश ज्ञ🌻*

"न हि वेरेन वेरानि, 

सम्मन्तीध कुदाचनं ।

अवेरेन च सम्मन्ति, 

एस धम्मो सनन्तनो ।"

         - तथागत बुद्ध 

*इस संसार में वैर से वैर कभी शान्त नहीं होता, मैत्री से ही (वैर) शान्त होता है। यही संसार का सनातन नियम है।*

मन को मंगल कामनाओं से भर देने को भगवान बुद्ध *'मैत्री भावना'* कहते हैं । 

भिक्षुओं को सम्बोधित करते हुए तथागत बुद्ध ने कहा- 

भिक्षुओ ! मैत्री रखने में ग्यारह लाभ है? 

कौन-से ११ लाभ है?

*🍀मंगल मैत्री के 11 लाभ🍀*  

मैत्री भावना करनेवाला : 

*🍀1. सुख की नींद सोता है।*

*🍀2. तरोताज़ा जागता है।*

*🍀3. दुःस्वप्न नहीं देखता है।*

*🍀4. मनुष्यों में प्रिय होता है।*

*🍀5. अमनुष्यों में प्रिय होता है।*

*🍀6. देवता उसकी रक्षा करते है।*

*🍀7. अग्नि, विष, शस्त्र उसे मार नहीं सकते। ( यानी कोई शत्रु नहीं होने के कारण कोई उसे अग्नि, विष, शस्त्रसे  नही मारते है।)*

*🍀8. सहज समाधिस्थ हो सकता है।*

*🍀9. मुख का वर्ण निखरता है। मुखाकृति शांत होती है।*

*🍀10. बेहोशी में नहीं मरता है।*

*🍀11. मरने के बाद अच्छी गति होती है ।*

🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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