मुख्यमंत्री फडणवीस ने बताया कि प्रतिष्ठान ने दीनदयालजी के विचारों पर आधारित प्राकृतिक खेती का आदर्श मॉडल विकसित किया है। इसका उद्देश्य रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग घटाकर लागत कम करना और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाना है। राज्य में 25 लाख हेक्टेयर भूमि को प्राकृतिक खेती के दायरे में लाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से 13 लाख हेक्टेयर पर काम हो चुका है। साथ ही नानाजी देशमुख कृषि समृद्धि योजना और प्राथमिक सोसायटियों को बहुउद्देशीय संस्था बनाने का कार्य चल रहा है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘लखपति दीदी योजना’ शुरू की गई है, जिसके माध्यम से महाराष्ट्र की एक करोड़ महिलाओं को लखपति बनाने का लक्ष्य है।
प्रतिष्ठान ने पारधी समाज के लिए भी शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है, जिससे इस समाज की तस्वीर बदली है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, “पंडित दीनदयाल ने समाजकार्य किसी पुरस्कार के लिए नहीं किया। उनके विचार अमर हैं। उनकी हत्या हुई, लेकिन उनके विचार और तेज़ी से फैल गए। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हीं विचारों को संपूर्ण विश्व के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं।”
कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री फडणवीस ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मारक पर जाकर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि और खादी की माला अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर मूर्तिकार सुजीत गौड़ और उनकी पत्नी स्वाति गौड़ का सम्मान किया गया।
परियोजनाओं का निरीक्षण
मुख्य समारोह के पूर्व मुख्यमंत्री फडणवीस ने दीनदयाल सेवा प्रतिष्ठान परिसर में संचालित परियोजनाओं का निरीक्षण किया। इनमें प्रशिक्षण प्रबोधिनी, शबरी अतिथि गृह, आवासीय परिसर, छात्र प्रशिक्षण कक्ष, कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र शामिल हैं। उन्होंने प्रवेशद्वार पर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उनके जीवन पर आधारित प्रदर्शनी भी देखी। इस अवसर पर आवासीय परिसर में मुख्यमंत्री फडणवीस ने वृक्षारोपण भी किया।
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