Monday, 6 October 2025

पंडित दीनदयाल सेवा प्रतिष्ठान – एकात्म मानव दर्शन और अंत्योदय का प्रतीक

 पंडित दीनदयाल सेवा प्रतिष्ठान – एकात्म मानव दर्शन और अंत्योदय का प्रतीक

- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

  • पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती समारोह सम्पन्न
  • मुख्यमंत्री ने दीनदयाल सेवा प्रतिष्ठान की परियोजनाओं का किया निरीक्षण

 

यवतमाल29 सितम्बर (जिमाका): समाज के ग़रीबवंचित और दुर्बल वर्ग को मुख्यधारा में लाकर उनके सर्वांगीण विकास हेतु पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया। उनके एकात्म मानव दर्शन और अंत्योदय के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने का प्रतीक पंडित दीनदयाल सेवा प्रतिष्ठान हैऐसा गौरवोद्गार मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने यवतमाल में दीनदयाल सेवा प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती समारोह का उद्घाटन किया और उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। इस अवसर पर मृदा एवं जलसंवर्धन मंत्री तथा जिले के पालकमंत्री संजय राठोड़आदिवासी विकास मंत्री प्रो. डॉ. अशोक वुइकेराष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष हंसराज अहीरपूर्व विधायक मदन येरावारप्रतिष्ठान के अध्यक्ष नरहर देवपदाधिकारी ज्योति चव्हाणडॉ. मनोज पांडेविजय कद्रेमनीष गंजीवालेगजानन परसोडकर सहित अन्य मान्यवर उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि यवतमाल में करीब 25 वर्ष पूर्व प्रारंभ हुई यह संस्था आज एक विशाल वटवृक्ष के समान विकसित हो चुकी है। आत्महत्या-पीड़ित किसानों के परिवारों की महिलाओं और पिछड़े पारधी समाज को यह संस्था सहारा दे रही है। पंडित दीनदयाल के एकात्म मानव दर्शन और अंत्योदय विचारों पर आधारित यह एक जीवंत सामाजिक परिवर्तन का उदाहरण है।

मुख्यमंत्री फडणवीस ने दीनदयाल उपाध्याय के जीवन के कई पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी शिक्षा पूरी की। सरकारी नौकरी का अवसर होने के बावजूद उन्होंने समाज सेवा का मार्ग चुना। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने के बाद वे पूर्णकालिक कार्यकर्ता बने। जनसंघ की स्थापना के बाद उन्होंने प्रदेश अध्यक्षअखिल भारतीय महामंत्री और राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसे बड़े पदों की जिम्मेदारी संभालीफिर भी वे सादगी और त्यागपूर्ण जीवन जीते रहे।

उन्होंने बताया कि उस समय विश्व में पूँजीवाद और साम्यवाद का बोलबाला थालेकिन दीनदयालजी ने एक तीसरा मार्ग प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भारतीय जीवन पद्धति में ही सामाजिक व आर्थिक परिवर्तन का उत्तर निहित है। एकात्म मानव दर्शन का मूल तत्व अंत्योदय हैयानी समाज के अंतिम व्यक्ति के विकास से ही राष्ट्र का विकास संभव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इसी विचारधारा पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने ग़रीबों के लिए घरशौचालयगैसबिजली और रोज़गार जैसी योजनाएँ शुरू कींजिससे पिछले 10 वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए और भारत 11वें स्थान से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया।

No comments:

Post a Comment

Featured post

Lakshvedhi