Tuesday, 9 September 2025

स्पेक्स 2030” पहल से गड़चिरोली के नागरिकों को मिलेगी नेत्रसेवा

 

स्पेक्स 2030 पहल से गड़चिरोली के नागरिकों को मिलेगी नेत्रसेवा

– मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
जन स्वास्थ्य विभाग व विश्व स्वास्थ्य संगठन के संयुक्त प्रयास

मुंबई, 8 मार्च: आदिवासी व पिछड़े जिलों जैसे गड़चिरोली में नेत्र स्वास्थ्य के प्रति जनजागृति पैदा करनेकिफायती व गुणवत्तापूर्ण नेत्र सेवाएँ पहुँचाने और उपचार उपलब्ध कराने को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग एवं विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा संचालित SPECS 2030 परियोजना से बच्चों की शिक्षायुवाओं के लिए रोजगार और पूरे समाज के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।

मुख्यमंत्री ने एसपीईसीएस 2030 पहल को गड़चिरोली जिले में लागू करने का आग्रह किया। यह initiative अहेरी तालुका को देश में आदर्श दृष्टि सेवा केंद्र बनाएगा।

स्पेक्स 2030 वन साइट प्रोग्राम नामक इस योजना को राज्य शासन के स्वास्थ्य विभागवन साइट लकॉटिका फाउंडेशन और WHO के सहयोग से गड़चिरोली सहित देश के पाँच पिछड़े जिलों में लागू किया जाएगा। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय अंधत्व निवारण व दृष्टिदोष नियंत्रण कार्यक्रम (NPCBVI) के अंतर्गत संचालित होगा।

विश्व स्तर पर 2.2 अरब लोग दृष्टिदोष का सामना कर रहे हैंऔर इनमें से कम से कम अरब मामले इलाज योग्य हैं। भारत में लगभग 53% दृष्टिदोष अपूर्ण दृष्टिदोष (Refractive Errors) के कारण होता हैजो लगभग प्रत्येक दसवां स्कूल जाने वाले छात्र प्रभावित करता है। इसी संदर्भ में WHO ने स्पेक्स 2030 पहल की शुरुआत कीजिसका लक्ष्य 2030 तक सस्ते व गुणवत्तापूर्ण चश्मों की सार्वभौमिक उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

इस पहल के तहत गड़चिरोली के साथ-साथ आसाम (धुबड़ी)ओडिशा (कलाहांडी)राजस्थान (अलवर)और उत्तर प्रदेश (प्रयागराज) में आशा किरण मॉडल अपनाया जाएगा। इस मॉडल में आशा कार्यकर्ता घर-घर पहुंच कर प्राथमिक नेत्र जाँच करेंगेप्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चश्मे उपलब्ध कराए जाएंगेऔर सरकारी अस्पतालों में मोतियाबिंद की सर्जरी कराई जाएगी।

इस योजना में स्थानीय स्वास्थ्य कर्मचारियों का प्रशिक्षणजनजागृति अभियानविद्यालय व ग्राम पंचायत स्तर पर स्वास्थ्य संवादस्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं व मीडिया द्वारा प्रचार प्रसारऔर कार्यक्रम की प्रभावशीलता मापने हेतु डेटा संकलन जैसे विविध कार्य शामिल हैं।

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महाराष्ट्र विज़न 2047’ सिर्फ कागज़ पर नहीं, वास्तविकता

 उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि इस विज़न में यह दिखता है कि महाराष्ट्र 22 साल बाद कैसा होना चाहिए। यह एक ऐसा रोडमैप है जो भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर दिशा निर्धारित करता है। बड़े सपने तभी सच होते हैं जब जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार दोनों पर बराबर हो। विज़न में जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने की शक्ति हैऔर समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुँचाना इसका मुख्य उद्देश्य है।

बैठक में यह विश्वास दोहराया गया कि विकसित महाराष्ट्र विज़न 2047’ सिर्फ कागज़ पर नहींवास्तविकता में लागू होकर राज्य के विकास को तेज करेगा। मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री के निर्देशन में तैयार इस विज़न डॉक्यूमेंट से आने वाले दो दशकों में महाराष्ट्र की आर्थिकसामाजिक और औद्योगिक प्रगति सुनिश्चित होगी।

बैठक में उपलब्ध सेक्टरों के लिए वीज़न प्रस्तुत किए गए जैसे जलसंपदाऊर्जाउच्च व तकनीकी शिक्षास्कूल शिक्षाकौशल विकाससामाजिक न्यायउद्योगसेवासूचना प्रौद्योगिकीवित्तस्वास्थ्य एवं पर्यटन।

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विजन डॉक्यूमेंट 2047”: राज्य की नीतियों के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत

 “विजन डॉक्यूमेंट 2047”: राज्य की नीतियों के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत


“विजन डॉक्यूमेंट 2047 के अनुसार नीति बनाएं, ‘विकसित महाराष्ट्र’ का सपना पूरा करें” मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस


मुंबई: महाराष्ट्र के ‘विजन डॉक्यूमेंट 2047’ को भविष्य की नीतियों के लिए मार्गदर्शक तत्वों का स्थान देने पर जोर दिया। गीता, बाइबिल, कुरान और विकास का सविंधान की तरह, विकसित महाराष्ट्र वीज़न डॉक्यूमेंट 2047 की समीक्षा हेतु सह्याद्री अतिथिगृह में हुई। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री फडणवीस ने की, जिसमें उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, मुख्य सचिव राजेश कुमार सहित कई विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव एवं सचिव उपस्थित थे। जल, ऊर्जा, शिक्षा, सामाजिक कल्याण, उद्योग और सेवा, प्रौद्योगिकी व अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों पर प्रस्तुतियों का विस्तार से मूल्यांकन किया गया।


मुख्यमंत्री फडणवीस ने प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि यह डीप थिंकिंग का प्रमाण हैं और उन्होंने संतोष व्यक्त किया। “हम सही रास्ते पर हैं। अगले 25 वर्षों के लिए एक रोडमैप तैयार हो रहा है। विज़न का मतलब दिशा होता है हमारे लक्ष्यों और दिशा का स्पष्ट होना आवश्यक है।” उन्होंने यह भी कहा कि यह सिर्फ कागजी योजना नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे वास्तविकता में उतराने के लिए पूरी क्षमता लगानी होगी। “पाँच साल तक इस विज़न पर लगातार काम किया, तो 2047 तक ‘विकसित महाराष्ट्र’ का सपना पूरा हो सकता है।”


मुख्यमंत्री फडणवीस ने सहकार क्षेत्र के महत्व, प्रशासन में सूचना प्रौद्योगिकी के अधिकतम उपयोग, भारत नेट का शीघ्र विकास, और साइबर सुरक्षा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी जोर दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि यह वीज़न डॉक्यूमेंट देश के सर्वश्रेष्ठ में से एक होगा, और शिक्षा संस्थानों व विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।

Vision Document 2047’: Guiding Principles for State Policies

 ‘Vision Document 2047’: Guiding Principles for State Policies

“Let’s shape policies according to Vision Document 2047 and fulfill the dream of Developed Maharashtra”  Chief Minister Devendra Fadnavis

Mumbai: Chief Minister Devendra Fadnavis emphasized today that just as sacred texts like the Gita, Bible, Quran  and constitution of development serve as guiding pillars, Maharashtra’s “Vision Document 2047” should serve as the foundational framework for the state’s future policies. He made these remarks during a review meeting on the ‘Developed Maharashtra Vision Document 2047’ held at Sahyadri Guest House. Attendees included Deputy Chief Minister Eknath Shinde, Chief Secretary Rajesh Kumar, and various department secretaries and principal secretaries. Presentations covered key sectors including water, power, education, social welfare, industry and services, technology, and the economy.

Fadnavis praised the presentations, noting the deep thinking involved and expressed satisfaction. “We are on the right path. A roadmap for the next 25 years is being laid. A vision provides direction; it is essential that our goals and direction are clearly defined.” He stressed that the vision document must go beyond mere paperwork and be fully implemented. “If we consistently work towards this vision over the next five years, we will surely realize the dream of Developed Maharashtra by 2047,” he added.

णात निरक्षर व शेतमजुर महिला असून जमिनीचा मालकीहक्क, राहते घर व उत्पन्नाचे साधन यांचा अभाव यामुळे या महिलांना आरोग्य, निवारा, उपजीविका

 राज्यमंत्री बोर्डीकर म्हणाल्याएकल महिला हा राज्यातील दुर्लक्षित प्रश्न आहे. या सर्वेक्षणातून त्यांची सामाजिकआर्थिक व शैक्षणिक दुरवस्था समोर आली आहे. आगामी कृती आराखड्यामुळे या महिलांचे सर्वांगीण सक्षमीकरण होईल आणि महिला सन्मान व सामाजिक समावेश साध्य करता येईल.

परभणी जिल्ह्यातील ग्राम स्तरावरील सर्वेक्षणात  निरक्षर व शेतमजुर महिला असून
जमिनीचा मालकीहक्कराहते घर व उत्पन्नाचे साधन यांचा
  अभाव यामुळे या महिलांना आरोग्यनिवाराउपजीविका आणि सामाजिक सुरक्षा यांसारख्या मूलभूत सुविधांची  गरज असल्याचे त्यांनी यावेळी सांगितले.

परभणी जिल्ह्याच्या ग्रामीण भागात  ३४ हजार ७३३ एकल महिला असल्याचे अंगणवाडी सेविकांच्या मदतीने झालेल्या सर्वेक्षणातून  निदर्शनास आली आहे आहे. या महिलांपैकी  विधवा आणि ज्येष्ठ नागरिक आहेत.


एकल महिला हा राज्यातील दुर्लक्षित प्रश्न आहे. या सर्वेक्षणातून त्यांची सामाजिक, आर्थिक व शैक्षणिक दुरवस्था समोर

 राज्यमंत्री बोर्डीकर म्हणाल्याएकल महिला हा राज्यातील दुर्लक्षित प्रश्न आहे. या सर्वेक्षणातून त्यांची सामाजिकआर्थिक व शैक्षणिक दुरवस्था समोर आली आहे. आगामी कृती आराखड्यामुळे या महिलांचे सर्वांगीण सक्षमीकरण होईल आणि महिला सन्मान व सामाजिक समावेश साध्य करता येईल.

परभणी जिल्ह्यातील ग्राम स्तरावरील सर्वेक्षणात  निरक्षर व शेतमजुर महिला असून
जमिनीचा मालकीहक्कराहते घर व उत्पन्नाचे साधन यांचा
  अभाव यामुळे या महिलांना आरोग्यनिवाराउपजीविका आणि सामाजिक सुरक्षा यांसारख्या मूलभूत सुविधांची  गरज असल्याचे त्यांनी यावेळी सांगितले.

परभणी जिल्ह्याच्या ग्रामीण भागात  ३४ हजार ७३३ एकल महिला असल्याचे अंगणवाडी सेविकांच्या मदतीने झालेल्या सर्वेक्षणातून  निदर्शनास आली आहे आहे. या महिलांपैकी  विधवा आणि ज्येष्ठ नागरिक आहेत.

राज्यातील एकल महिलांच्या सक्षमीकरणासाठी विविध उपक्रम राबविणार

 राज्यातील एकल महिलांच्या सक्षमीकरणासाठी विविध उपक्रम राबविणार

मेघना बोर्डीकर

मुंबई,दि.८ : परभणी जिल्ह्यातील ग्रामपंचायत स्तरावर पहिले सर्वेक्षण पूर्ण केले असून जिल्ह्यातील एकल महिलांचे प्रमाण पाहून राज्यातील एकल महिलांच्या सक्षमीकरणासाठी विविध उपक्रम राबविणार असल्याचे महिला व बाल विकास राज्यमंत्री मेघना बोर्डीकर यांनी सांगितले.

राज्यमंत्री  बोर्डीकर यांनी या गंभीर प्रश्नात लक्ष घालूनपरभणी जिल्ह्यातील ग्रामपंचायत स्तरावर पहिले सर्वेक्षण पूर्ण केले आहे. नगरपंचायतनगरपालिका व महापालिका क्षेत्रातील सर्वेक्षण लवकरच होणार असल्याचे त्यांनी सांगितले.

सक्षमीकरणासाठी विविध उपक्रम राज्यमंत्री  बोर्डीकर म्हणाल्या  महिलांच्या आर्थिक सक्षमीकरणासाठी कौशल्यविकासबचत गटांचे सशक्तीकरणगृहउद्योग प्रोत्साहनआरोग्य व निवारा सुविधा यांसारखे कार्यक्रम राबवले जातील. यासाठी शासनस्थानिक स्वराज्य संस्था आणि सी आर एस भागीदार यांच्यामार्फत एकात्मिक धोरणात्मक कृती आराखडा तयार करण्यात येणार आहे.

तालुका व जिल्हा स्तरावर कृतीगट स्थापन करण्यात येणार ६० वर्षांवरील महिलांसाठी वृद्धापकाळातील योजनांचा अभाव लक्षात घेता त्यांना आरोग्यसुरक्षितता व उदरनिर्वाहासाठी नवे उपक्रम राबवले जाणार आहेत. उमेद व माविम यांच्या मदतीने स्वयंरोजगार व कौशल्यविकासाचे प्रयत्न वेगाने सुरू करण्यात येणार असून तालुका व जिल्हा स्तरावर कृतीगट स्थापन केले जातील.

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