उपमुख्यमंत्री शिंदे ने कहा कि इस विज़न में यह दिखता है कि महाराष्ट्र 22 साल बाद कैसा होना चाहिए। यह एक ऐसा रोडमैप है जो भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर दिशा निर्धारित करता है। बड़े सपने तभी सच होते हैं जब जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार दोनों पर बराबर हो। विज़न में जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने की शक्ति है, और समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुँचाना इसका मुख्य उद्देश्य है।
बैठक में यह विश्वास दोहराया गया कि ‘विकसित महाराष्ट्र विज़न 2047’ सिर्फ कागज़ पर नहीं, वास्तविकता में लागू होकर राज्य के विकास को तेज करेगा। मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री के निर्देशन में तैयार इस विज़न डॉक्यूमेंट से आने वाले दो दशकों में महाराष्ट्र की आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक प्रगति सुनिश्चित होगी।
बैठक में उपलब्ध सेक्टरों के लिए वीज़न प्रस्तुत किए गए जैसे जलसंपदा, ऊर्जा, उच्च व तकनीकी शिक्षा, स्कूल शिक्षा, कौशल विकास, सामाजिक न्याय, उद्योग, सेवा, सूचना प्रौद्योगिकी, वित्त, स्वास्थ्य एवं पर्यटन।
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