प्लास्टर ऑफ पेरिस की गणेश मूर्तियों के विसर्जन को लेकर
दीर्घकालिक व पर्यावरण अनुकूल नीति तैयार की जाए – मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
मुंबई, 27 जून : मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस ने आज निर्देश दिए कि प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) से बनी बड़ी गणेश मूर्तियों के विसर्जन के संदर्भ में परंपराओं और धार्मिक भावनाओं का आदर करते हुए एक दीर्घकालिक और पर्यावरण के अनुकूल नीति तैयार की जाए।
सह्याद्री अतिथिगृह में आज पर्यावरण अनुकूल तरीके से त्योहार मनाने को लेकर बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री श्री फडणवीस ने की। इस बैठक में सांस्कृतिक कार्य मंत्री तथा मुंबई उपनगर के पालक मंत्री ॲड. आशिष शेलार, बृहन्मुंबई महानगरपालिका आयुक्त भूषण गगरानी, महाधिवक्ता वीरेंद्र सराफ, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. श्रीकर परदेशी, पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव प्रवीण दराडे, बीएमसी के अतिरिक्त आयुक्त अमित सैनी, प्रधान सचिव व विधि सलाहकार सुवर्णा केवले, प्रदूषण नियंत्रण मंडल के प्रभारी सदस्य सचिव रविंद्र आंधळे आदि उपस्थित थे।
पीओपी गणेश मूर्तियों के विसर्जन को लेकर न्यायालय द्वारा कुछ निर्देश दिए गए हैं। इन निर्देशों के आधार पर राज्य सरकार ने राजीव गांधी विज्ञान व तंत्रज्ञान आयोग से रिपोर्ट मांगी थी। आयोग के अध्यक्ष डॉ. अनिल काकोडकर ने यह रिपोर्ट सरकार को सौंपी है, जिसमें कुछ महत्वपूर्ण सिफारिशें की गई हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि बड़ी मूर्तियों के गहरे समुद्र में विसर्जन की संभावनाओं का अध्ययन किया जाए और उस आधार पर न्यायालय में राज्य का पक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाए।
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि सार्वजनिक गणेश विसर्जन के बाद समुद्र तटों की सफाई को लेकर ठोस उपाय किए जाएं। मूर्ति निर्माण के दौरान पर्यावरण के अनुकूल सामग्री और प्राकृतिक रंगों का ही प्रयोग किया जाए ताकि प्रदूषण से बचा जा सके।
सांस्कृतिक कार्य मंत्री ॲड. आशिष शेलार ने कहा कि सार्वजनिक गणेशोत्सव को परंपरा के अनुसार ही मनाया जाना चाहिए। ऊंची व बड़ी मूर्तियों के विसर्जन हेतु पर्यावरण अनुकूल विकल्प तैयार किए जाएं, वहीं छोटी मूर्तियों का विसर्जन कृत्रिम तालाबों में किया जाए। शाडू मिट्टी व अन्य पर्यावरण हितैषी सामग्रियों से मूर्तियों का निर्माण करने के लिए जनजागृति आवश्यक है।
डॉ. अनिल काकोडकर ने कहा कि जल प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए गणेश मूर्तियों का निर्माण पर्यावरण अनुकूल तरीके से किया जाना चाहिए। रासायनिक रंगों के कारण प्रदूषण बढ़ता है, अतः प्राकृतिक रंगों एवं पर्यावरण हितैषी सामग्री के प्रयोग पर बल दिया जाए और इसके लिए जनजागृति अभियान चलाया जाए
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