अवसंरचना परियोजनाओं के निकट शासकीय भूमि पर विकसित करें आर्थिक केंद्र
– मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस
वर्सोवा से भायंदर समुद्री उत्तर वाहिनी मार्ग कार्य की समीक्षा बैठक संपन्न
मुंबई, 27 जून : मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज निर्देश दिए कि जब भी कोई पायाभूत सुविधा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) परियोजना पूर्ण हो, उसके आसपास की शासकीय जमीनों की पहचान कर उनका बंद्रा-कुर्ला संकुल (बीकेसी) की तर्ज पर विकास किया जाए तथा उन्हें नए आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित किया जाए।
सह्याद्री अतिथिगृह में आयोजित वर्सोवा से भायंदर तक के समुद्री किनारा उत्तर वाहिनी मार्ग कार्य की समीक्षा बैठकों में मुख्यमंत्री श्री. फडणवीस ने यह निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस मार्ग का कार्य करते समय कांदळवन (मैंग्रोव) का संरक्षण किया जाए और परियोजना के कारण जितना मैंग्रोव प्रभावित होगा, उससे अधिक नए मैंग्रोव रोपण की व्यवस्था की जाए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस परियोजना के लिए आवश्यक सभी अनुमतियां एक साथ प्राप्त की जानी चाहिए और यह संपूर्ण परियोजना दिसंबर 2028 तक हर हाल में पूरी की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि इस मार्ग के निर्माण हेतु लगभग 165 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है, जिसमें अधिकांश भूमि शासकीय है। इस शासकीय जमीन को परियोजना के लिए हस्तांतरित करने की कार्यवाही अगले 15 दिनों के भीतर पूर्ण की जाए। वर्सोवा स्थित मत्स्य व्यवसाय विभाग की आवश्यक भूमि भी तत्परता से प्राप्त की जाए। मढ से वर्सोवा जोड़ने वाला संपर्क मार्ग एमएमआरडीए के समन्वय से तैयार किया जाए।
साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इस समुद्री मार्ग के किनारे विज्ञापन (जैसे फ्लेक्स, होर्डिंग आदि) लगाने की योजना तैयार की जाए, जिसके लिए एक सलाहकार की नियुक्ति की जाए। इन विज्ञापनों से होने वाली आय का उपयोग सड़क के रखरखाव व व्यवस्थापन पर किया जा सकेगा।
इस बैठक में बृहन्मुंबई महानगरपालिका आयुक्त भूषण गगराणी, अतिरिक्त आयुक्त अभिजीत बांगर, ठाणे जिलाधिकारी अशोक शिनगारे, मुंबई उपनगर जिलाधिकारी सौरभ कटियार, मीरा-भायंदर मनपा आयुक्त श्री. शर्मा, महाराष्ट्र राज्य रस्ते विकास महामंडळ (MSRDC) के व्यवस्थापकीय संचालक अनिल गायकवाड आदि उपस्थित थे।
वर्सोवा से भायंदर समुद्री किनारा मार्ग परियोजना का विवरण :
मुख्य मार्ग की लंबाई : 26 किलोमीटर
संपर्क मार्गों सहित कुल लंबाई : 63 किलोमीटर
निर्माण योजना : 6 चरणों में
निविदा प्रक्रिया : शुरू हो चुकी है
भूमि आवश्यकता : कुल 165 हेक्टेयर भूमि
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