Thursday, 13 November 2025

पत्रकारों को एआई जनरेटेड कंटेंट का उपयोग करते समय करनी होगी तथ्यों की पड़ताल

 पत्रकारों को एआई जनरेटेड कंटेंट का उपयोग करते समय करनी होगी तथ्यों की पड़ताल

-         प्रधान सचिव व महानिदेशक ब्रिजेश सिंह

 

मुंबई, 11 नवम्बर :अब एआई जनरेटेड कंटेंट की सत्यता की जांच आवश्यक हो गई है। डीपफेक की पहचान के लिए 15–20 पैरामीटर्स पर आधारित विशेष टूल्स विकसित किए गए हैं। सभी फैक्ट-चेकिंग संस्थाएं हर तथ्य की जांच नहीं करतींजिससे पूर्वाग्रह की संभावना रहती है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) में निहित बायस आज एक वैश्विक समस्या बन चुका है — ऐसा मत महाराष्ट्र सूचना एवं जनसंपर्क महासंचालनालय के प्रधान सचिव तथा महानिदेशक ब्रिजेश सिंह ने व्यक्त किया।

 

वे रतन टाटा महाराष्ट्र राज्य कौशल विश्वविद्यालय तथा मंत्रालय एवं विधानमंडल वार्ताहर संघ द्वारा मंत्रालय में आयोजित प्रिंट व डिजिटल मीडिया पत्रकारों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रशिक्षण कार्यशाला में बोल रहे थे।

प्रधान सचिव ब्रिजेश सिंह ने कहा कि एआई सत्य का स्रोत नहीं है। यह जानकारी को बदल या सारांशित कर सकता हैलेकिन सत्य निर्धारित नहीं कर सकता। नई पीढ़ी के एआई टूल्स — जैसे रियल टाइम सर्च करने वाले एआई — कई स्रोतों से सूचना एकत्र कर त्वरित सारांश दे सकते हैं। यह पत्रकारों को शीघ्र संदर्भ प्रदान कर रिपोर्टिंग आसान बनाते हैंलेकिन इन स्रोतों की पुष्टि करना जरूरी हैऐसा उन्होंने जोर देकर कहा। एआई से प्राप्त जानकारी पर मानवीय सत्यापन के बिना निष्कर्ष निकालना खतरनाक हो सकता हैइसलिए मानवीय निगरानी और तथ्य-पड़ताल अनिवार्य हैयह उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया।

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