मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि नागपुर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के लिए जाना जाता है। यह शहर कई ऐसी ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी रहा है, जिन्होंने देश को दिशा दी। गोंड राजाओं ने सार्वजनिक पुस्तकालयों की परंपरा शुरू कर ज्ञान-संस्कृति को विकसित किया। भोसले काल में हिंदवी स्वराज्य के विस्तार में नागपुर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज का साहित्य उच्चकोटि का है। श्रीपाद कृष्ण कोल्हटकर, राजा बढे, राम शेवाळकर, महेश एलकुंचवार, सुरेश भट, ग्रेस, वि.भि. कोलते, ग.त्र्यं. माडखोलकर, मारुति चितमपल्ली, परशुराम खुणे जैसे अनेक साहित्यकारों ने इस संस्कृति को समृद्ध किया है। विदर्भ की भूमि भाषा-संगम की भूमि है, जहाँ मराठी और हिंदी साहित्य की समानांतर समृद्ध परंपरा देखने को मिलती है। लिटरेचर फ़ेस्टिवल के माध्यम से नागपुर के सांस्कृतिक वातावरण में बड़ा परिवर्तन होगा, उन्होंने कहा।
उन्होंने आगे कहा कि जानकारी तब तक जानकारी ही रहती है जब तक वह ज्ञान में परिवर्तित नहीं होती। यदि जानकारी को ज्ञान में बदलना है और स्वयं को ज्ञानी व्यक्ति के रूप में स्थापित करना है, तो पुस्तकों का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने युवा पीढ़ी तक पुस्तकें पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्यमंत्री ने नागपुर बुक फ़ेस्टिवल के सफल आयोजन की सराहना की। एनबीटी देशभर में पठन-संस्कृति पुनर्स्थापित करने का उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। इस पहल का हिस्सा होने के नाते नागपुर पुस्तक महोत्सव नई ऊँचाइयाँ छुएगा, ऐसा विश्वास उन्होंने व्यक्त किया।
इसके पूर्व, मुख्यमंत्री ने विविध पुस्तक-प्रकाशन स्टॉलों का दौरा किया और बाल-मंडप में विद्यार्थियों से संवाद साधा।
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