पुराने समय का सिनेमा हॉल । इसमें फिल्म देखने का जो आनंद था वो आज मल्टीप्लेक्स में नहीं । धक्का मुक्की करते हुए टिकट कटाना, टिकट का साईज छोटा होना, हाऊसफुल हो जाने पर ब्लैक में टिकट बेचने वाले को ढूंढना और ब्लैक में टिकट खरीद कर फिल्म देखना, इंटरवल में मूंगफली इत्यादि बेचने वालों का हॉल में इन और उनसे खाने का सामान खरीदना ।गाने के बुकलेट वालों से बुकलेट खरीदना । नृत्य के सीन में पर्दै पर सिक्का फेंकना, विलेन के कमीनेपन पर उसे गालियां देना । हीरो के द्वारा विलेन को पीटने पर हॉल में तालियां, सीटियां बजना । ये सब अतीत की बातें हो गई है।
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