Saturday, 14 August 2021

 -फसल सर्वेक्षण परियोजना देश के लिए बनेगी मार्गदर्शक

-मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे

 

            मुंबई13 अगस्त: आने वाले समय में ई-फसल सर्वेक्षण मोबाइल एप (एप्लिकेशन) किसानों को अपना लगने लगेगाइस बाबत विश्वास है। पूरे राज्य में लागू होने वाली ई-फसल सर्वेक्षण परियोजना देश के लिए एक मार्गदर्शक साबित होगीऐसा भी विश्वास मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने व्यक्त किया है।

            आने वाले स्वतंत्रता दिवस से राजस्व और कृषि विभाग द्वारा लागू की जाने वाली संयुक्त परियोजना ई-फसल सर्वेक्षण का उद्घाटन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के करकमलों द्वारा सह्याद्री गेस्ट हाउस में "ई-फसल सर्वेक्षण" ("ई-पीक पाहणी") परियोजना का ऑनलाइन लोकार्पण इलेक्ट्रॉनिक बटन दबाकर किया गया।

            मोबाइल एप का ऑनलाइन लोकार्पण करने के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि कुछ साल पहले किसानों को अपना सातबारा (7/12 इक्स्ट्रैक्ट) देखने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ती थीलेकिन आज किसानों के लिए उनका सातबारा मोबाइल में देखना संभव हो गया है। समय के हिसाब से प्रकृति का नियम बदलता है। ऐसा हम कहते हैं। परंतु बदलाव के समय आधुनिक तकनीक की मदद से हम प्रयोग कर किसानों की कठिनाइयों को कम करने के साथ-साथ उन्हें सरल और सुलभ तरीके से आवश्यक दस्तावेज को उपलब्ध करानेफसलों की जानकारी मुहैया करने पर जोर दिया जा रहा है। इस बात की भी ख़ुशी है। किसी भी तरह का नया प्रयोग करते समय सफलता तभी मिलती है जब हम सभी लोग सामूहिक प्रयास करते हैं। हम सभी ने सामुहिक प्रयास किया है इसलिए अब हमारे किसान भाइयों की पीड़ा को कम करने में मदद मिलेगी।

कम से कम गारंटीकृत कीमत (एमएसपी) नहीं तो एक निश्चित कीमत (अशुर्ड प्राइस) देने पर जोर

            मुख्यमंत्री श्री. ठाकरे ने कहा कि  जो बिकेगावही उगेगा’ (विकेल ते पिकेल) की संकल्पना को पूरे राज्य में लागू किया गया है। इसे लागू करते समय ही प्रत्येक जिले की विशेषताओं को पहचानते हुए एक जिलाएक फसल का ब्रांड तैयार करना आवश्यक है। तभी ही किसानों को उसकी फसल का कम से कम गारंटीकृत कीमत (एमएसपी) नहीं तो एक निश्चित कीमत मिलेगी।

          आने वाले दिनों में किसानों द्वारा उगाई जाने वाली सब्जियां ज्यादा दिनों तक कैसे चल सकेंगीइस बाबत प्रयास किया जाना आवश्यक है। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और हरित क्रांति के प्रणेता वसंतराव नाइक ने कृषि में समय से आगे जाकर प्रयास किया है। उसी तरह से अब भी किसानों को नई बातों और तकनीक की मदद से उनका जीवन सरल और सुलभ करने पर जोर देना आवश्यक है।

                

 

ई-फसल सर्वेक्षण परियोजना को प्रत्येक परिवार से जोड़ा जाएगा

- बालासाहेब थोरात

            राजस्व मंत्री श्री. बालासाहेब थोरात ने कहा कि पूरे महाराष्ट्र में लागू किया गया भले ही यह एक पायलट प्रोजेक्ट है लेकिन आज का दिन ऐतिहासिक है। ई-फसल सर्वेक्षण परियोजना एक ऐसी परियोजना है जिसे हर परिवार को जोड़ा जाएगा। भले ही आज आयोजित किए गए कार्यक्रम का स्वरूप सीमित हैलेकिन इसका प्रभाव दूरगामी होने वाला है। शुरुआत में  टाटा ट्रस्ट के माध्यम से इस परियोजना को सिर्फ दो जिलों में एक पायलट परियोजना के रूप में शुरू किया गया थालेकिन अब इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। इस परियोजना की मदद से किसानों को उनके फसल की जानकारी स्वयं भरने में सक्षम करेगी। आज शुरू हुई इस परियोजना को राज्य स्तर पर लागू किया जाएगा। उसी तरह से अगले 15 दिनों में राज्य के किसानों को ऐप पर उन्हें उनके फसल का पंजीकरण कैसे करना हैइस बात प्रशिक्षण दिया जाएगा। ऑनलाइन सात बारा सुलभता से उपलब्ध होने के साथ-साथ अब 8 अ को भी ऑनलाइन किया गया है।

            कृषि मंत्री श्री दादा भूसे ने कहा कि ई-फसल सर्वेक्षण परियोजना को राज्य भर में राजस्व एवं कृषि विभाग द्वारा संयुक्त रूप से लागू किया जाएगा और इसका उद्देश्य 'जो बिकेगावही उगेगा’ (विकेल ते पिकेल) अभियान के माध्यम से किसानों की आय में वृद्धि करना है। किसान स्वयं अपनी फसल का पंजीयन करा सकेंगे और खेती के लिए फसल ऋण एवं फसल बीमा की सुविधा आसानी से उपलब्ध होने में मदद मिलेगी।

          राजस्व राज्य मंत्री श्री. अब्दुल सत्तार ने कहा कि चूंकि किसान को सात बारा अपनी फसल का स्वयं ही रिकॉर्ड कर सकेंगेइससे वे बुवाई और फसल की परिस्थिति का अनुमान लगा सकेंगे। ई-फसल सर्वेक्षण परियोजना के माध्यम से गांवतहसील (तालुका) और जिलावार तरीके से प्रत्येक फसल के क्षेत्रफल को अनुमान लगाया जा सकेगा।

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