राज्यपाल ने बताया कि वे हाल ही में गांव-गांव जाकर लोगों में प्राकृतिक खेती के प्रति जनजागृति कर रहे हैं। ऐसी ही एक यात्रा के दौरान आनंद जिले के 25 गांवों में भूजल स्रोतों में नाइट्रेट पाए जाने से पानी पीने योग्य नहीं रहा, यह तथ्य सामने आया। दूषित पानी के कारण लोगों को गंभीर बीमारियां हो रही हैं। इसलिए रसायनों के उपयोग के प्रति जागरूकता अत्यंत आवश्यक है।
राज्यपाल ने कहा कि किसानों को यह समझाना होगा कि केवल एक गाय होने पर भी प्राकृतिक खेती संभव है।
उन्होंने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में साहिवाल, थारपारकर, कांकरेजऔर गिर जैसी देशी गायों का संरक्षण किया जाए तो यह खेती के लिए वरदान सिद्ध होगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी।
इस अवसर पर ‘आत्मा’ के संचालक सुनील बोरकर ने प्रस्तुतीकरण किया।
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