Sunday, 7 December 2025

मांग करने वालों को सौर कृषि पंप’ योजना में महाराष्ट्र का विश्व रिकॉर्ड गिनीज बुक में दर्ज; मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस करेंगे प्रमाणपत्र प्रदान

 मांग करने वालों को सौर कृषि पंप’ योजना में महाराष्ट्र का विश्व रिकॉर्ड

गिनीज बुक में दर्ज;

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस करेंगे प्रमाणपत्र प्रदान

• समारोह कल छत्रपति संभाजीनगर के ऑरिक सिटी परिसर में

 

मुंबई4 दिसंबर: महाराष्ट्र ने मांग करने वालों को सौर कृषि पंप’ योजना के अंतर्गत एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है। महावितरण ने एक ही महीने में 45,911 सौर कृषि पंप स्थापित करने का उल्लेखनीय कार्य पूर्ण किया है। इस उपलब्धि की गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अधिकृत नोंद की गई है। विश्व रिकॉर्ड प्रमाणपत्र का वितरण 5 दिसंबर 2025सुबह 10 बजेछत्रपति संभाजीनगर के शेंद्रा एमआईडीसी स्थित ऑरिक सिटी मैदान में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के प्रमुख उपस्थितीत किया जाएगा।

 

कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदेउपमुख्यमंत्री अजित पवारअपारंपरिक ऊर्जा मंत्री अतुल सावेपालकमंत्री संजय शिरसाटऊर्जा राज्य मंत्री मेघना साकोरे-बोर्डीकरऊर्जा विभाग की अपर मुख्य सचिव आभा शुक्ला और महावितरण के अध्यक्ष एवं व्यवस्थापकीय संचालक लोकेश चंद्र उपस्थित रहेंगे।

 

किसान को सिर्फ रक्कम भर कर सौर पैनल और कृषि पंप का पूरा सेट उपलब्ध कराने वाली इस योजना में महाराष्ट्र पूरे देश में अग्रणी बन गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया है। प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत किसानों को केंद्र सरकार से 30% और राज्य सरकार से 60% अनुदान मिलता हैजिससे उन्हें केवल 10% राशि में पूरा संच प्राप्त होता है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के किसानों को सिर्फ 5% हिस्सेदारी भरनी होती है।

 

राज्य ने 15 लाख सौर कृषि पंप लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया हैजिससे 'पेड पेंडिंगबिजली कनेक्शन की दीर्घकालीन समस्या दूर होने वाली है। महावितरण ने इस योजना के लिए स्वतंत्र ऑनलाइन पोर्टल विकसित किया है। किसान ऑनलाइन आवेदन करते हैंजिसे मंजूरी मिलने के बाद किसान अपनी हिस्सेदारी भरते हैं और पंप लगाने के लिए एजेंसी का चयन करते हैं। महावितरणएजेंसी और किसान मिलकर स्थल का संयुक्त निरीक्षण करते हैं। उसके बाद कार्यादेश जारी होता है और पंप स्थापित किया जाता है। संबंधित एजेंसी ही भविष्य में रखरखाव और मरम्मत की जवाबदार भी रहेगी।

 

सौर पैनल 25 वर्षों तक बिजली उत्पन्न करते हैंजिससे इस अवधि में किसानों को बिजली बिल नहीं लगता। पारंपरिक बिजली पर निर्भर न रहने से किसान अपनी सुविधानुसार दिन के समय कभी भी सिंचाई कर सकते हैंऔर उनकी दिन में बिजली आपूर्ति की मांग पूरी होती है।

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