एक ऐतिहासिक मोड़ : 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' का सशक्तिकरण
वर्ष 2025 भारत और ब्रिटेन के संबंधों के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ है। सदियों के उतार-चढ़ाव भरे इतिहास वाले इस रिश्ते को अब एक औपचारिक और सुदृढ़ 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' (Comprehensive Strategic Partnership) का स्वरूप दिया गया है। इस साझेदारी का मार्गदर्शक 'भारत-यूके विजन 2035' है, जो एक ऐसा महत्वाकांक्षी रोडमैप है जिसमें दोनों देशों के लिए साझा विकास, सुरक्षा और समृद्धि की एक विस्तृत योजना तैयार की गई है। इस रिश्ते की सबसे बड़ी ताकत दोनों राष्ट्रों के नेतृत्व में मौजूद मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति है। इसी वर्ष जुलाई में प्रधानमंत्री मोदी की सफल ब्रिटेन यात्रा के बाद, प्रधानमंत्री स्टारमर की यह भारत यात्रा इस साझेदारी को एक नई गति और ठोस आकार प्रदान कर रही है। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के आम नागरिकों के जीवन में महत्वपूर्ण और मूर्त लाभ पहुँचाना है। आज का मुख्य भाषण, जिसमें 100 से अधिक देशों के एक लाख से अधिक वैश्विक प्रतिनिधि भाग लेंगे, इस साझेदारी की असीम क्षमता को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करने वाला एक निर्णायक क्षण होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए, जिनके राजनयिक प्रयासों का केंद्रबिंदु दुनिया भर के रणनीतिक भागीदारों के साथ संबंधों को गहरा करना रहा है, यह क्षण एक वैश्विक महाशक्ति के रूप में भारत के उदय का प्रतीक है। घरेलू स्तर पर साहसिक आर्थिक सुधारों को बढ़ावा देने से लेकर वैश्विक मंच पर समान विचारधारा वाले लोकतांत्रिक भागीदारों के साथ जुड़ने तक, प्रधानमंत्री मोदी के अथक प्रयासों ने ब्रिटेन के साथ इस नवीनीकृत अध्याय की नींव रखी है। वहीं, ब्रिटेन, जिसका भारत के साथ एक जटिल और बहुआयामी ऐतिहासिक संबंध रहा है, अब औपनिवेशिक अतीत की छाया से बाहर निकलकर एक समान और सम्मानित भागीदार के रूप में उभरा है।
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