हिंद-प्रशांत में सुरक्षा बंधन को मजबूती
यह साझेदारी केवल अर्थव्यवस्था और व्यापार तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में भी हो रहा है, जो 'विजन 2035' रोडमैप की एक प्रमुख आधारशिला है। हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र आज वैश्विक भू-राजनीति का केंद्र बनता जा रहा है, और भारत तथा ब्रिटेन दोनों ने इस क्षेत्र को एक मुक्त, खुले, नियम-आधारित और स्थिर क्षेत्र के रूप में बनाए रखने के लिए एक साझा दृष्टिकोण अपनाया है।
यह सहयोग हाल ही में संपन्न हुए नौसैनिक अभ्यास 'कोंकण 2025' में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया, जहाँ भारत के स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत और ब्रिटेन के एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स ने एक साथ मिलकर जटिल युद्धाभ्यास किए। यह दो आधुनिक नौसेनाओं के बीच बढ़ती अंतर-संचालनीयता (Interoperability) और क्षेत्रीय शांति के प्रति उनकी दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक था। इसी तरह, भारतीय वायु सेना के साथ किए गए हवाई रक्षा अभ्यासों ने इस सहयोग को और भी गहरा किया है। यह त्रि-सेवा समन्वय इस साझेदारी की गहराई और परिपक्वता का एक दुर्लभ उदाहरण है।
इसके अतिरिक्त, जुलाई 2025 में हस्ताक्षरित 'रक्षा औद्योगिक रोडमैप' एक मौलिक बदलाव का संकेत है। यह पारंपरिक क्रेता-विक्रेता संबंध से आगे बढ़कर सह-विकास (Co-development) और संयुक्त उत्पादन (Joint Production) के एक नए युग की शुरुआत करता है। प्रधानमंत्री मोदी की 'आत्मनिर्भर भारत' की अवधारणा के अनुरूप, यह रोडमैप प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, संयुक्त अनुसंधान और भारत की घरेलू रक्षा उत्पादन क्षमता को बढ़ाने पर केंद्रित है। इसका लक्ष्य भारत को वैश्विक रक्षा नवाचार का एक प्रमुख केंद्र बनाना है, जिससे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता मजबूत होगी और साथ ही बड़ी संख्या में उच्च-कुशल रोजगार भी पैदा होंगे।
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