Monday, 14 July 2025

न्यायसहायक प्रयोगशालाओं को मजबूत करने के लिए लोकाभिमुख और ब्लॉकचेन पद्धति अपनाई जाएगी

 न्यायसहायक प्रयोगशालाओं को मजबूत करने के लिए

लोकाभिमुख और ब्लॉकचेन पद्धति अपनाई जाएगी

– मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस

·                          महाराष्ट्र में देश की सर्वोत्तम साइबर न्यायसहायक प्रयोगशालाएं

·                          मुख्यमंत्री के हाथों प्रादेशिक न्यायसहायक वैज्ञानिक प्रयोगशाला के भवन का भूमिपूजन

 

नागपुर, 13: महाराष्ट्र में देश की सबसे अत्याधुनिक साइबर न्यायसहायक वैज्ञानिक व्यवस्था स्थापित की गई है। आधुनिक साइबर प्रयोगशालाओं के साथ-साथ मोबाइल न्यायसहायक वैज्ञानिक प्रयोगशालाएं भी स्थापित की जा रही हैं। बढ़ते हुए तकनीकीसाइबर और धोखाधड़ी के अपराधों को ध्यान में रखते हुएआगामी समय में लोगों-केंद्रित (लोकाभिमुख) और ब्लॉकचेन पद्धति का उपयोग करके न्यायसहायक वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं की व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगायह प्रतिपादन मुख्यमंत्री तथा गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज यहां किया।

यहां धंतोली परिसर में प्रादेशिक न्यायसहायक वैज्ञानिक प्रयोगशाला के नए प्रशासनिक भवन का भूमिपूजन और गृह विभाग की तीन नई परियोजनाओं का ऑनलाइन लोकार्पण मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों हुआ। इस अवसर पर उन्होंने यह बात कही। गृह (ग्रामीण) राज्यमंत्री डॉ. पंकज भोयरसांसद श्यामकुमार बर्वेविधायक संदीप जोशी और संजय मेश्राममहासंचालक (न्यायिक व तकनीकी) संजय वर्मामहाराष्ट्र राज्य पुलिस गृहनिर्माण व कल्याण महामंडल की प्रबंध निदेशक अर्चना त्यागी और न्यायसहायक वैज्ञानिक प्रयोगशाला निदेशालय के निदेशक डॉ. विजय ठाकरे इस अवसर पर उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अपराधों की सिद्धता कर अपराधियों को दंड दिलाने और पीड़ितों को न्याय दिलाने में न्यायसहायक वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि नए भारतीय फौजदारी कानूनों ने न्यायसहायक साक्ष्यों के महत्व को रेखांकित किया हैऔर विशिष्ट अपराधों में यह अनिवार्य हो गया है। राज्य में अपराध सिद्धता दर बढ़ाने के लिए 2014 के बाद विशेष प्रयास किए गए हैंजिसमें विभिन्न पद्धतियों का उपयोगतकनीकी साक्ष्यों और न्यायसहायक वैज्ञानिक साक्ष्यों पर जोर दिया गया हैतथा 14 शासकीय निर्णय जारी कर अपराध सिद्धता दर को 9% से बढ़ाकर 54% किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ते हुएइस अपराध सिद्धता दर को 90% से ऊपर ले जाना होगा। उन्होंने बताया कि राज्य में आधुनिक साइबर न्यायसहायक प्रयोगशालाएंन्यायसहायक वैज्ञानिक प्रयोगशालाएंमोबाइल न्यायसहायक वैज्ञानिक प्रयोगशालाएं और नवी मुंबई में साइबर केंद्र स्थापित कर उसे महामंडल में रूपांतरित किया गया है।

नागपुर स्थित प्रादेशिक न्यायसहायक वैज्ञानिक प्रयोगशाला को अत्याधुनिक बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। इस प्रयोगशाला के भवन का भूमिपूजन संतोष का विषय हैऔर उन्होंने उम्मीद जताई कि इस भवन का निर्माण फरवरी 2027 तक पूरा हो जाएगा।

प्रादेशिक न्यायसहायक वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं के कार्यों में लोकाभिमुखता और ब्लॉकचेन पद्धति का उपयोग किया जाएगा। इससे समय पर अपराधों की सिद्धता होकर न्यायदान में तेजी आएगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि न्यायसहायक वैज्ञानिक व्यवस्था एक जनसेवा का कार्य हैऔर इस वर्ष के अंत तक सभी लंबित मामलों का निपटारा किया जाए।

इससे पहलेगृह विभाग के अंतर्गत नए सिरे से कार्यान्वित हुई प्रयोगशाला कम्प्यूटरीकरण के दूसरे चरणमुंबई स्थित सेमी ऑटोमेटेड सिस्टम और पुणे स्थित सेंटर ऑफ एक्सलेंस का ऑनलाइन लोकार्पण मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के हाथों हुआ।

न्यायसहायक वैज्ञानिक प्रयोगशाला निदेशालय के निदेशक डॉ. विजय ठाकरे ने प्रास्ताविक भाषण दियाजबकि प्रादेशिक न्यायसहायक वैज्ञानिक प्रयोगशालानागपुर के उपनिदेशक अश्विन गेडाम ने आभार व्यक्त किया।

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