रिज़र्व बैंक भारत की आर्थिक स्थिरता का आधारस्तंभ; डिजिटल लेन-देन में देश को वैश्विक नेतृत्व दिलाने में आरबीआई की महत्वपूर्ण भूमिका - राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
मुंबई, 1 अप्रैल: भारत 2047 तक 'विकसित भारत' (Viksit Bharat 2047) बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में आर्थिक क्षेत्र की नई चुनौतियों का सामना करने के लिए एक नवीन और समावेशी वित्तीय प्रणाली आवश्यक है। रिज़र्व बैंक भारत की आर्थिक स्थिरता का आधारस्तंभ बना रहेगा। भारत को डिजिटल लेन-देन में वैश्विक नेतृत्व दिलाने में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का बड़ा योगदान है। मजबूत बैंकिंग प्रणाली, वित्तीय नवाचार और उपभोक्ताओं के विश्वास को बनाए रखने की दिशा में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होगी। यह विचार आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने व्यक्त किए।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुंबई के नरिमन पॉइंट स्थित एनसीपीए में आयोजित भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के 90वें स्थापना दिवस समारोह में बोल रही थीं। इस अवसर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. पी. राधाकृष्णन, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा उपस्थित थे।
आरबीआई – भारत के आर्थिक विकास की धुरी
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि भारतीय रिज़र्व बैंक के 90वें स्थापना दिवस का यह उत्सव एक महत्वपूर्ण अवसर है। आरबीआई भारत की सबसे महत्वपूर्ण संस्थाओं में से एक है। एक केंद्रीय बैंक के रूप में, आरबीआई देश की अनोखी विकास यात्रा के केंद्र में रहा है। स्वतंत्रता-पूर्व के कठिन समय से लेकर आज वैश्विक महाशक्ति बनने तक के सफर में आरबीआई एक मजबूत स्तंभ बना हुआ है।
1935 में स्थापित इस संस्था ने हमेशा देश के आर्थिक विकास की दिशा में अग्रणी भूमिका निभाई है। आरबीआई न केवल एक केंद्रीय बैंक है, बल्कि वित्तीय समावेशन और संस्थागत निर्माण में भी इसकी भूमिका अहम रही है। इस दृष्टिकोण से, आरबीआई ने नाबार्ड, आईडीबीआई, सिडबी और नेशनल हाउसिंग बैंक जैसी महत्वपूर्ण वित्तीय संस्थाओं की स्थापना की, जो कृषि, लघु व्यवसाय और आवास क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
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