अपघातग्रस्त व्यक्तींचे प्राण
वाचविणकरिता मदत करणाया मदतदूताच्या (Good
Samaritan) संरक्षणाकरिता
मार्गदर्शक सूचना
महाराष्ट्र शासन
सार्वजनिक आरोग्य विभाग
शासन परिपत्रक क्रमांक : संकीर्ण २०१८/प्र.क्र. १३०/आरोग्य-३
ए विंग, १० वा मजला, गो. ते. रुग्णालय संकूल इमारत
लो.टि. मार्ग, मुंबई - ४०० ००१
तारीख २५ एप्रिल, २०१८
वाचा :-
१) केंद्र शासनाच्या रस्ते परिवहन व राजमार्ग मंत्रालयाची
अधिसूचना क्रमांक :
क्र २५०२५/१०१/२०१४-RS दि. १२ मे. २०१५
प्रस्तावना :-
सेव्ह लाईफ फाऊंडेशन आणि इतर यांनी सन्मा. सर्वोच्च
न्यायालयांत दाखल केलेल्या (दिवाणी) रिट याचिका क्र. २३५/२०१२ संदर्भात दिनांक २९.१०.२०१४
रोजी पारीत केलेल्या आदेशास अनुसरुन केंद्र शासनाने संदर्भ क्र. १ ची अधिसूचना प्रसिध्द्
केली आहे.
सदर अधिसूचनेतील मार्गदर्शक सूचनांची अंमलबजावणी
संपूर्ण राज्यात करण्यासाठी पुढीलप्रमाणे शासन परिपत्रक निर्गमित करण्यात येत आहे.
शासन परिपत्रक :
रस्ते, अपघातातातील जखमींचे प्राण वाचविणाया मदतदूताचे (Good Samaritan) विविध यंत्रणेमार्फत होणाया त्रासापासून संरक्षण करण्याकरिता सर्व प्रशासकीय
विभाग, रुग्णालये, पोलिस आणि इतर यंत्रणा यांनी सोबत जोडलेल्या मार्गदर्शक सूचनाचे
काटेकोरपणे पालन करुन आवश्यक ती कार्यवाही करावी. तसेच सदर परिपत्रक अधिनस्त कार्यालयांच्या
निदर्शनास आणावे.
भारत
का राजपत्र
सडक परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय अधिसूचना
नई दिल्ली, १२ मई २०१५
सं २५०२५/१०१/२०१४-आरएस-जबकि माननीय सर्वोच्च
न्यायालय ने २०१२ की रिट याचिका (सिबिल) संख्या २३५ मे सेवलाईफ फाऊंडेशन और अन्य बनाम
युनियन ऑफ इंडिया और अन्य के मामले मे अपने आदेश दिनांक २९ अक्तूबर, २०१४ के तहत अन्य
बातों के साथ-साथ केंद्रीय सरकार को केंद्रीय विधान मंडल द्वारा उचित विधि निर्माण
किए जाने तक गुड सेमेरिटन के बचाव के संबंध मे आवश्यक निर्देश जारी करने का निर्देश
दिया है,
और जबकि केंद्रीय सरकार, सडक दुर्घटना पीडितो
की जान बचाने के लिए उनके द्वारा की जा रही कारवाईयों के संबंध मे गुड सेमेरिटन के
बचाव के संबंध मे आवश्यक निर्देश जारी करने का निर्देश दिया है,
और जबकि केंद्रीय सरकार, सडक दुर्घटना पीडीतों
की जान बचाने के लिए उनके द्वारा की जा रही कारवाईयों के संबंध मे गुड सेमेरिटन को
उत्पीडन से बचाव के लिए इसे आवश्यक समझती है तथा, इसलिए केंद्रीय सरकार, एतद्वारा गुड
सेमेरिटन के बचाव के लिए अस्पतालो, पुलिस और अन्य सभी प्राधिकरणां को अनुपालन किए जाने
हेतू निम्नलिखित दिशानिर्देश जारी करती है, अर्थात -
१) किसी सडक दुर्घटना के प्रत्यक्षदर्शी सहित कोई भी
बाईस्टैंडर या गुड सेमेरिटन किसी घायल व्यक्ती को निकटतम अस्पताल मे लेकर जा सकता है,
तथा उस बाईस्टैंडर या गुड सेमेरिटन को तुरंत जाने की अनुमति दे दी जाएगी और उस बाईस्टैंडर
या गुड सेमेरिटन से कोई प्रश्न नही पुछा जाएगा, सिवाय सिर्फ प्रत्यक्षदर्शी के, जिसे
पत्ता बताने के बाद जाने दिया जाएगा.
२) सडक दुर्घटना पीडीतों की मदद के लिए आगे आने हेतु
अन्य नागरिकों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकारों द्वारा यथा-विनिर्दिष्ट रुप
मे प्राधिकरणों द्वारा बाईस्टैंडर या गुड सेमेरिटन को उचित इनाम या मुआवजा दिया जाएगा.
३) बाईस्टैंडर या गुड सेमेरिटन किसी सिबील तथा अपराधिक
दायित्व के लिए उत्तरदायी नही होगा.
४) बाईस्टैंडर या गुड सेमेरिटन जो सडक पर घायल पडे
व्यक्ति के लिए पुलिस को सुचना देने अथवा आपातकालीन सेवाओं हेतु फोन कॉल करता है, उसे
फोन पर अथवा व्यक्तिगत रुप से उपस्थित होकर अपना नाम और व्यक्तिगत विवरण देने के लिए
बाध्य नही किया जाएगा.
५) गुड सेमेरिटन का नाम और संपर्क विवरण जैसी व्यक्तिगत
सूचना को बताया जाना स्वैच्छिक तथा वैकल्पिक बनाया जाएगा, ऐसा अस्पतालो द्वारा उपलब्ध
कराए गए मेडिको लीगल केस (एमएलसी) फार्म मे भी किया जाएगा
६) उन लोक अधिकारियों के विरुध्द् संबंधित सरकार द्वारा
अनुशासनात्मक या विभागीय कारवाई की जाएगी जो किसी बाईस्टैंडर या गुड सेमेरिटन को अपना
नाम अथवा व्यक्तिगत विवरण देने के लिए बाध्य करेंगे अथवा धमकाएंगे
७) यदि कोई बाईस्टैंडर या गुड सेमेरिटन जिसने स्वैच्छिक
रुप से उल्लेख किया है यह उस दुर्घटना का प्रत्यक्षदर्शी भी है तथा पुलिस द्वारा अथवा
मुकदमे के दौरान जांच-पडताल के प्रयोजनों के लिए उसका जांच किया जाना अपेक्षित है तो
उस बाईस्टैंडर या गुड सेमेरिटन से एक ही बार पुछताछ की जाएगी तथा राज्य सरकार मानक
संचालन प्रक्रिया विकसित की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी बाईस्टैंडर
या गुड सेमेरिटन को उत्पीडीत अथवा धमकाया ना जाए
८) जांच की विधीयां, अपराधिक प्रक्रिया संहिता १९७३
की धारा २८४ के अंतर्गत किसी आयोग द्वारा, अथवा कथित संहिता की धारा २९६ के अनुसार
औपचारिक तौर से शपथपत्र के द्वारा हो सकती है तथा इस अधिसूचना के जारी होने की तिथी
से ३० दिन की अवधि के भीतर मानक संचालन प्रक्रिया विकसित की जाएगी.
९) गुड सेमेरिटन को उत्पीडन से बचाने अथवा असुविधा
से दूर रखने के लिए, बाईस्टैंडर या गुड सेमेरिटन एवं उपर्युक्त (१) दिशा-निर्देश मे
संदर्भित व्यक्ती को प्रत्यक्षदर्शी है, से पुछताछ के दौरान विडियो काँफ्रेसिंग का
विस्तृत रुप से उपयोग किया जाएगा
१०) स्वास्थ एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, दिशा-निर्देश
जारी करेगी जिसमे यह उल्लेख किया जाएगा कि कोई भी पंजीकृत सार्वजनिक और निजी अस्पताल
बाईस्टैंडर या गुड सेमेरिटन को न रोके अथवा पंजीकरण और भर्ती लागतो के लिए भुगतान की
मांग न करे, जब तक कि गुड सेमेरिटन घायल व्यक्ती
के परिवार का सदस्य अथवा सगा-संबंधी न हो तथा पं. परमानंद कटारा बनाम युनियन ऑफ इंडिया
और अन्य (१९८९) ४ एससीसी २८६ मे मा. सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसरण में. घायल
व्यक्ति का तत्काल इलाज किया जाए
११) सडक दुर्घटनाओ से संबंधीत किसी आपातकालीन परिस्थिती
मे, जिस समय डॉक्टर से चिकित्सीय देखभाल प्रदान किये जाने की आशा की जाती है, किसी
डॉक्टर द्वारा प्रतिक्रीया के अभाव को भारतीय चिकित्सा परिषद (व्यवसायिक आचार, शिष्टाचार
और नैतिक) विनियम, २००२ के अध्याय-७ व्यवसायिक कदाचार के अंतर्गत संम्मिलित किया जाएगा
तथा उस डॉक्टर के विरुध्द् कथित विनियम के अध्याय-८ के तहत अनुशासनात्मक कारवाई की
जाएगी.
१२) सभी अस्पताल इस आशय का अपने प्रवेशद्वार पर हिंदी,
अंग्रेजी और राज्य संघ राज्य क्षेत्र की देशी भाषा मे एक चार्टर प्रकाशित करेंगे कि
वे बाईस्टैंडर या गुड सेमेरिटन को नही रोकेंगे अथवा किसी पीडीत के उपचार के लिए उनके
धन जमा कराने के लिए नही कहेंगे.
१३) यदि कोई बाईस्टैंडर या गुड सेमेरिटन चाहे तो अस्पताल
उसे घायल व्यक्ति को अस्पताल मे लाने तथा समय और स्थान के संबंध मे, उस गुड सेमेरिटन
को एक पावती उपलब्ध कराएगा तथा ऐसी पावती को राज्य सरकार द्वारा एक मानक फार्मेट मे
तैयार किया जाएगा तथा उपयुक्त समझे जाने पर बाईस्टैंडर या गुड सेमेरिटन को प्रोत्साहन
देने के लिए राज्य सरकार द्वारा सभी अस्पतालों मे इसे वितरित किया जाएगा
१४) सभी सार्वजनिक और निजी अस्पतालों द्वारा इन दिशा-निर्देशो
का अनुपालन तत्काल रुम से किया जाएगा तथा इन दिशा-निर्देशो का अनुपालन न किए जाने अथवा
उल्लंघन किए जाने के मामले मे संबंधित प्राधिकारियों द्वारा उचित कारवाई की जाएगी.
१५) इन दिशा-निर्देशो से युक्त एक पत्र केंद्रीय सरकार
और राज्य सरकार द्वारा अपने संबंधीत क्षेत्राधिकार के तहत सभी अस्पतालों और संस्थांनो
मे जारी किया जाएगा जिसमे इस अधिसूचना की राजपत्रित प्रति भी संलग्न होगी तथा स्वास्थ
एवं परिवार कल्याण, मंत्रालय और सडक परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा इन दिशा निर्देशे
के बारे मे आम जनता को सूचित किए जाने हेतु सभी राष्ट्रीय और एक क्षेत्रीय समाचार पत्र
एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया मे विज्ञापन प्रकाशित किए जाएंगे
२. बाईस्टैंडर या गुड सेमेरिटन के बचाव के संबंध मे
उपयुक्त दिशा-निर्देश, मोटर यान अधिनियम, १९८८ (१९८८ का ५९) की धारा १३४ के तहत यथाविनिर्दिष्ट
सडक दुर्घटना मे किसी मोटार वाहन के चालक के दायित्व के प्रति पुर्वाग्रह की धारणा
रहित है
संजय बंदोपाध्याय,
संयुक्त सचिव
No comments:
Post a Comment